दक्षिण चीन सागर पर फिलीपींस ने चीन को दी युद्ध की चेतावनी

फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन को चेतावनी दी है। उन्होंने आगाह किया है कि चीन अगर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की सीमा लांघता है तो उनका देश युद्ध के लिए तैयार है। फिलीपींस के विदेश मंत्री एलन पीटर कायटानो ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, “राष्ट्रपति पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर कोई पश्चिमी फिलीपींस सागर में (दक्षिण चीन सागर) प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता है तो वह युद्ध के लिए तैयार हैं।”फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन को चेतावनी दी है। उन्होंने आगाह किया है कि चीन अगर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की सीमा लांघता है तो उनका देश युद्ध के लिए तैयार है। फिलीपींस के विदेश मंत्री एलन पीटर कायटानो ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, "राष्ट्रपति पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर कोई पश्चिमी फिलीपींस सागर में (दक्षिण चीन सागर) प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता है तो वह युद्ध के लिए तैयार हैं।"  इस दौरान उन्होंने दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकरण के चीनी प्रयास पर लचर नीति अपनाने के आरोप का बचाव भी किया। चीन ने हाल में विवादित दक्षिण चीन सागर के कृत्रिम द्वीप पर पहली बार अपने बमवर्षक विमान उतारे। इसकी वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इस पर अमेरिका ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। फिलीपींस के विदेश मंत्री ने कहा, "हमने अपने विभाग को दक्षिण चीन सागर में चीन के कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए कहा है। हम सभी तरह के कूटनीतिक कदम उठा रहे हैं। चीन को लाल निशान के बारे में अवगत करा दिया गया है।" उल्लेखनीय है कि चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम और ताइवान समेत कई अन्य देश इसका विरोध करते हैं।  इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने चीन के दावे को ठहराया था अवैध  साल 2016 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने फिलीपींस की ओर से दायर एक मामले में दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को अंतराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अवैध करार दिया था। चीन ने हालांकि इस फैसले को मानने से इन्कार कर दिया था।फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन को चेतावनी दी है। उन्होंने आगाह किया है कि चीन अगर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की सीमा लांघता है तो उनका देश युद्ध के लिए तैयार है। फिलीपींस के विदेश मंत्री एलन पीटर कायटानो ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, "राष्ट्रपति पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर कोई पश्चिमी फिलीपींस सागर में (दक्षिण चीन सागर) प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता है तो वह युद्ध के लिए तैयार हैं।"  इस दौरान उन्होंने दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकरण के चीनी प्रयास पर लचर नीति अपनाने के आरोप का बचाव भी किया। चीन ने हाल में विवादित दक्षिण चीन सागर के कृत्रिम द्वीप पर पहली बार अपने बमवर्षक विमान उतारे। इसकी वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इस पर अमेरिका ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। फिलीपींस के विदेश मंत्री ने कहा, "हमने अपने विभाग को दक्षिण चीन सागर में चीन के कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए कहा है। हम सभी तरह के कूटनीतिक कदम उठा रहे हैं। चीन को लाल निशान के बारे में अवगत करा दिया गया है।" उल्लेखनीय है कि चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम और ताइवान समेत कई अन्य देश इसका विरोध करते हैं।  इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने चीन के दावे को ठहराया था अवैध  साल 2016 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने फिलीपींस की ओर से दायर एक मामले में दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को अंतराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अवैध करार दिया था। चीन ने हालांकि इस फैसले को मानने से इन्कार कर दिया था।

इस दौरान उन्होंने दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकरण के चीनी प्रयास पर लचर नीति अपनाने के आरोप का बचाव भी किया। चीन ने हाल में विवादित दक्षिण चीन सागर के कृत्रिम द्वीप पर पहली बार अपने बमवर्षक विमान उतारे। इसकी वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इस पर अमेरिका ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। फिलीपींस के विदेश मंत्री ने कहा, “हमने अपने विभाग को दक्षिण चीन सागर में चीन के कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए कहा है। हम सभी तरह के कूटनीतिक कदम उठा रहे हैं। चीन को लाल निशान के बारे में अवगत करा दिया गया है।” उल्लेखनीय है कि चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम और ताइवान समेत कई अन्य देश इसका विरोध करते हैं।

इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने चीन के दावे को ठहराया था अवैध

साल 2016 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने फिलीपींस की ओर से दायर एक मामले में दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को अंतराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अवैध करार दिया था। चीन ने हालांकि इस फैसले को मानने से इन्कार कर दिया था।

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