दस लाख रुपए का एक नारियल, जानिए क्या हैं इसकी खासियत

दस लाख रुपए का एक नारियल. जी हां पुणे के कोएली गांव (तहसील खेड) में एक किसान ने ये विशेष नारियल बोली लगाकर खरीदा है. महाराष्ट्र में जहां एक ओर कर्ज से परेशान किसान खुद्खुशी कर रहे है वहीं ऐसे भी अमीर किसान हैं जो भगवान को चढ़ाया हुआ नारियल बोली में खरीदते हैं. पुणे के पास ये गांव है. यहां पर भानोब भगवान उत्सव मनाया जाता है. उत्सव के आखिरी दिन भक्त भगवान को नारियल चढाते हैं और दिन के आखिर में मन्दिर के ट्रस्टी बोली लगाते हैं, पिछले 3 सालों से बोली लगाकर एक ही किसान चढ़ाया हुआ नारियल खरीद रहा है. किसांन का नाम है रेश्मा सुभाष बन्सोडे.दस लाख रुपए का एक नारियल, जानिए क्या हैं इसकी खासियतGift: देखिए पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी क्या गिफ्ट दिया!

इस इलाके में ऐसी धारणा है कि ये नारियल जो भी परिवार खरीदता है उसके परिवार में खुशियां आती हैं, बरकत होती है और शायद इसीलिए हर साल भानोब भगवान उत्सव में इस इलाके के सैकड़ों अमीर किसान इस शुभ कहे जाने वाले नारियल की बोली लगाते हैं. इस वर्ष बोली 50 हजार रुपयों से शुरु की गई. पांच मिनट के भीतर तीन किसानों में भाव बढ़ाने की शर्त शुरु हो गई.

50 हजार के बाद दो लाख की बोली लगी, कुछ समझने के पहले तीन लाख से चुनौती दी गई. कुछ लोग शांत हो गए मानो अब तीन लाख रूपये बोलने वाले बन्सोडे परिवार को ये नारियल मिल ही गया. तभी खण्डू सातव नाम के किसान ने साढ़े 6 लाख रुपये से बोली आगे बढ़ाई. लेकिन रेश्मा बन्सोडे परिवार ने मानो घर से मना ही लिया था कि ये नारियल उन्हें ही लेना है. वाघोली गांव के खण्डू सातव किसान ने भी पूरी तैयारी की थी घर से नौ लाख रुपये नगद लेकर चला था और उसे ये लग भी रहा था कि साढ़े 6 लाख रुपये के आगे कोई हिम्मत नहीं करने वाला क्योंकि पिछले साल पांच लाख रुपये की बोली से बन्सोडे परिवार ने ये नारियल हासिल किया था. रेश्मा बन्सोडे के साथ आए अन्ना बन्सोडे परिवार ने अब तक 5 दफे ये नारियल जीता है. वर्ष 2000 से ये बोली लगाने का सिलसिला शुरु हुआ है. 

बन्सोडे परिवार की माने तो उन्हे इस नारियाल से बरकत हासिल होती है. कुछ सालो पहले उनके पास सिर्फ 2 एकड़ खेती हुआ करती थी लेकिन जबसे उन्होंने ये भगवान का नारियल खरीदना शुरु किया है उनके घर मे खुशियाली आई है. बोली खत्म होने ही वाली थी कि रेश्मा के साथ आये अण्णा बन्सोडे ने दस लाख रुपये की बोली लगाई और लोगो मे आवाज गूंज उठी. दस लाख एक – दस लाख दो – दस लाख तीन. बोली पूरी हुई. रेश्मा सुभाष बन्सोडे के नाम नारियल हुआ. अण्णा बन्सोडे का बेटा गोपाल के मुताबिक ये विशेष नारियल अब एक साल उनके घर मे पूजा जायेगा और अगले साल इसी उत्सव में ये नारियल इन्द्रायनी नदी में विसर्जित किया जाएगा.

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