दारुल उलूम ने 12 साल में जारी किए एक लाख फतवे

इस्लामी तालीम के बाद फतवों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध दारुल उलूम से 12 साल में ऑनलाइन करीब एक लाख से अधिक फतवे जारी किए गए हैं। जबकि एक वर्ष में देश विदेश से करीब 10 हजार से ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं।  दारुल उलूम में वर्ष 2005 में फतवा ऑनलाइन विभाग स्थापित किया गया था। जिसके बाद देश विदेश में बैठे लाखों लोगों ने दारुल उलूम के मुफ्तियों से ऑनलाइन सवाल करना शुरु कर दिया था। हालांकि शुरू में सवाल पूछने वालों की संख्या कम थी, लेकिन समय गुजरने के साथ ही यह संख्या भी बढ़ती चली गई।

दारुल उलूम ने 12 साल में जारी किए एक लाख फतवेपहले डाक द्वारा दारुल उलूम के इफ्ता विभाग में पत्र लिखकर सवाल किया जाता था या फिर सवालों के जवाब लेने के लिए लोगों को खुद यहां पहुंचना होता था। जिसमें समय अधिक लगता था, लेकिन ऑनलाइन सुविधा आरंभ होने के बाद इससे लोगों को आसानी हो गई और उनका समय भी बचने लगा।

यही वजह है कि 12 साल के अंदर ऑनलाइन फतवा की तादाद एक लाख से अधिक पहुंच चुकी है। तमाम फतवों की कॉपी ऑनलाइन फतवा विभाग में बेहद संभालकर रखी गई है, जबकि महत्वपूर्ण फतवों को वेबसाइट पर डाला गया है।

फतवा विभाग के प्रभारी मुफ्ती मोहम्मद उल्लाह ने बताया कि 35 हजार फतवे उर्दू और करीब 9 हजार फतवे अंग्रेजी भाषा में वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं। जिन्हें प्रतिदिन देश विदेश में बैठे लाखों लोग देखते हैं और शरीयत की रोशनी में अपने कामों को अंजाम दे रहे हैं।

इसके अलावा संस्था के इफ्ता विभाग से हजारों फतवे लिखित में जारी होते हैं। मुफ्ती मोहम्मद उल्लाह का कहना है कि दारुल उलूम से जो व्यक्ति सवाल पूछता है वो जवाब केवल उसके लिए होता है।

इस पर अगर कोई दूसरा व्यक्ति अमल करना चाहे तो कर सकता है। हॉल ही में कुछ फतवे मीडिया की सुर्खियां भी बने। जिनमें दिखाने की कोशिश की गई है कि दारुल उलूम ने तमाम मुसलमानों के लिए कोई फरमान जारी किया है। जो सरासर गलत है। फतवा केवल लेने वाले के लिए ही होता है।

दारुल उलूम से जारी यह फतवे रहे चर्चित

वर्ष 1989 में राजीव गांधी सरकार में शाहबानो के केस को लेकर दारुल उलूम से फतवा जारी हुआ
वर्ष 1998 में गोवंश कटान को लेकर दारुल उलूम ने फतवा जारी कर मुस्लिमों से गाय न काटने की अपील की
वर्ष 2005 में मुजफ्फरनगर में हुए गुड़िया प्रकरण में दारुल उलूम से जारी फतवा चर्चा का विषय बना
वर्ष 2008 में आतंकवाद के खिलाफ दारुल उलूम से फतवा जारी हुआ। जिस पर पूरी दुनिया में बहस छिड़ी
वर्ष 2016 में राष्ट्रगीत वंदेमातरम पर जारी हुआ फतवा
वर्ष 2016 में मुस्लिम महिलाओं के घर से बाहर जाकर नौकरी करने पर फतवा जारी हुआ
वर्ष 2017 में तंग व चुस्त बुर्का और कपड़े पहनने को लेकर फतवा दिया गया
वर्ष 2018 में बैंकिंग सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों के यहां शादी न करने की सलाह देने वाला फतवा जारी हुआ

कुरआन हदीस को मानने वाला फतवे को भी मानता है : मेहरबान
हाफिज मेहरबान कासमी का कहना है कि दारुल उलूम या दूसरी संस्थाओं से जो कोई भी फतवा लेता है वे उस पर अमल भी जरूर करता है। कुरआन और हदीस को मानना वाला फतवे को मानता है। मुफ्ती किसी भी सवाल का जवाब शरीयत की रोशनी में देते हैं जो उनकी निजी राय नहीं होती।

अधिकांश लोग फतवों को मानते व अमल करते हैं: असदुल्लाह
कारी असदुल्लाह कासमी का कहना है कि शरीयत की रोशनी में किसी भी सवाल का जवाब मुफ्तियों द्वारा दिया जाता है। फतवा वो ही व्यक्ति लेता है जिसे इसकी जरूरत होती है। अब वे इस पर अमल कर रहा है या नहीं इससे मुफ्तियों का कोई मतलब नहीं होता। अधिकांश लोग फतवों को मानते हैं और उन पर अमल भी करते हैं।

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