दिवाली पर दिल्ली-मुंबई के बीच चलेगी अब स्पेशल राजधानी एक्सप्रेस, 20 % ज्यादा होगा किराया

फ्लैक्सी फेयर को एक बारगी खत्म करने की जगह रेल मंत्रालय नयी रणनीति पर काम कर रहा है। मंत्रालय की योजना चरणबद्ध तरीके से इसे खत्म करने की है। इसकी शुरुआत 16 अक्तूबर से नई दिल्ली-मुंबई के बीच चलने जा रही विशेष राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से होगी। आम राजधानी से तेज चलने वाली इस ट्रेन में फ्लैक्सी फेयर नहीं लगेगा। हालांकि, इसका किराया आम राजधानी के बेस फेयर से बीस फीसदी ज्यादा रखा गया है। बावजूद इसके फ्लैक्सी फेयर की तुलना में मुसाफिर फायदे में रहेंगे।   दिवाली पर दिल्ली-मुंबई के बीच चलेगी अब स्पेशल राजधानी एक्सप्रेस, 20 % ज्यादा होगा किरायाअभी-अभी: पर्यटन मंत्री ने दिया बड़ा बयान, कहा- केंद्र सरकार तय नहीं करेगी लोग क्या खाएं

मंत्रालय सूत्र बताते हैं कि प्रयोगिक तौर पर अभी इस योजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके नफा-नुकसान के आकलन के बाद मंत्रालय इस मामले पर अंतिम फैसला करेगा। संभव है कि फ्लैक्सी फेयर को पूरी तरह खत्म कर दिया जायेगा। इसकी योजना पहले ही मंत्रालय ने तैयार कर रखी है।
  
अधिकारियों का कहना है कि विशेष राजधानी ट्रेन में फ्लेक्सी फेयर नहीं है। इसमें सामान्य राजधानी एक्सप्रेस के बेस फेयर से 20 प्रतिशत ज्यादा किराया रखा गया है। बावजूद इसके द्वितीय व तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित कोच में सफर करने वाले मुसाफिरों का सफर फ्लेक्सी फेयर के अंतिम किराये से 19 फीसदी सस्ता होगा। मसलन, इस ट्रेन के द्वितीय श्रेणी एसी में सफर करने वालों को सामान्य सामान्य राजधानी ट्रेन के अधिकतम फ्लेक्सी फेयर से 700-800 रुपये व तृतीय एसी में सफर करने वालों को 500-600 रुपये कम किराया देना पड़ेगा।      

दूसरी तरफ ट्रेन की रफ्तार आम राजधानी से तेज होगी। इससे दिल्ली-मुंबई के बीच का सफर दो घंटे कम समय में तय होगा। 09004/09003 नंबर की विशेष राजधानी ट्रेन 16 अक्टूबर से हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से चलेगी। इस रूट की राजधानी ट्रेन को अभी 15.50 घंटे का समय लगता है। जबकि विशेष ट्रेन 13.55 घंटे में पहुंच जायेगी। इसकी अधिकतम स्पीड 130 किमी प्रति घन्टे व औसतन स्पीड 98.1 किमी प्रति घन्टे की होगी।       

मंत्रालय अधिकारियों का कहना है कि प्रयोग के तौर पर तीन महीने (16 अक्टूबर 2017 से 16 जनवरी 2018) के लिए चलाई जा रही है। यात्रियों से मिलने वाली प्रतिक्रिया और नफे-नुकसान के आधार पर ट्रेन का भविष्य तय होगा।

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