दुनिया का सबसे बड़ा साफ पानी का मोती भारी भरकम कीमत में हुआ नीलाम

दुनिया का सबसे बड़ा साफ पानी का मोती नीदरलैंड में ढाई करोड़ रुपए (374,000 डॉलर या 320,000 यूरो) में नीलाम हुआ।दुनिया का सबसे बड़ा साफ पानी का मोती नीदरलैंड में ढाई करोड़ रुपए (374,000 डॉलर या 320,000 यूरो) में नीलाम हुआ।  नीलामी घर ‘वेंदुएहुईस’ ने बताया कि इस मोती का संबंध 18वीं सदी की रूस की साम्राज्ञी ‘कैथरीन द ग्रेट’ से था। अपने खास आकार के कारण यह मोती ‘स्लीपिंग लॉयन’ के नाम से मशहूर है। ऐसी संभावना है कि 18वीं सदी के शुरुआती काल में संभवत: पर्ल नदी में यह मूर्त रूप में आया।  नीलामी करने वालों ने बताया कि 120 ग्राम (4.2 औंस) का यह बेशकीमती मोती करीब सात सेंटीमीटर (2.7 इंच) लंबा है। इसकी यही खासियत, इसे दुनिया के तीन सबसे बड़े मोतियों में से एक बनाती है। इस मोती को एक जापानी कारोबारी ने ढाई करोड़ में खरीदा।  ऐसा माना जाता है कि ये बेशकीमती आभूषण 1700 से 1760 के बीच आकार मे आया, उस वक्त कियांगलॉन्ग राजा का शासन था। उस वक्त चाइनीज कानून के तहत जो समुद्र में मिलने वाले बड़े मोती राजा की संपत्ति माने जाते थे। हालांकि एक दशक के बाद रूस की रानी कैथरीन के पास ये बेशकीमती मोती चला गया। 1778 में इसे रूस की रानी कैथरीन ने खरीद लिया था।  इसके दो सौ साल बाद तक ये बेशकीमती मोती अलग-अलग शाही परिवारों और ज्वैलर्स के पास रहा। एम्सटर्डम पर्ल एकेडमी ने 1979 में इसे हासिल किया

नीलामी घर ‘वेंदुएहुईस’ ने बताया कि इस मोती का संबंध 18वीं सदी की रूस की साम्राज्ञी ‘कैथरीन द ग्रेट’ से था। अपने खास आकार के कारण यह मोती ‘स्लीपिंग लॉयन’ के नाम से मशहूर है। ऐसी संभावना है कि 18वीं सदी के शुरुआती काल में संभवत: पर्ल नदी में यह मूर्त रूप में आया।

नीलामी करने वालों ने बताया कि 120 ग्राम (4.2 औंस) का यह बेशकीमती मोती करीब सात सेंटीमीटर (2.7 इंच) लंबा है। इसकी यही खासियत, इसे दुनिया के तीन सबसे बड़े मोतियों में से एक बनाती है। इस मोती को एक जापानी कारोबारी ने ढाई करोड़ में खरीदा।

ऐसा माना जाता है कि ये बेशकीमती आभूषण 1700 से 1760 के बीच आकार मे आया, उस वक्त कियांगलॉन्ग राजा का शासन था। उस वक्त चाइनीज कानून के तहत जो समुद्र में मिलने वाले बड़े मोती राजा की संपत्ति माने जाते थे। हालांकि एक दशक के बाद रूस की रानी कैथरीन के पास ये बेशकीमती मोती चला गया। 1778 में इसे रूस की रानी कैथरीन ने खरीद लिया था।

इसके दो सौ साल बाद तक ये बेशकीमती मोती अलग-अलग शाही परिवारों और ज्वैलर्स के पास रहा। एम्सटर्डम पर्ल एकेडमी ने 1979 में इसे हासिल किया

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