दुष्कर्म के मामलों पर मोदी विश्वमंच पर शर्मसार

देश में बढ़ते दुष्कर्म के मामले विश्व समुदाय के सामने भी देश को शर्मसार कर रहे है. इसी क्रम में आईएमएफ चीफ क्रिस्टीन लेगार्ड ने गुरुवार को भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रही यौन हिंसा की घटनाओं पर चिंता जाहिर की. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार इस मामले पर ज्यादा ध्यान देगी. बता दें कि जम्मू के कठुआ में आठ साल की बच्ची से रेप की घटना को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है.देश में बढ़ते दुष्कर्म के मामले विश्व समुदाय के सामने भी देश को शर्मसार कर रहे है. इसी क्रम में आईएमएफ चीफ क्रिस्टीन लेगार्ड ने गुरुवार को भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रही यौन हिंसा की घटनाओं पर चिंता जाहिर की. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार इस मामले पर ज्यादा ध्यान देगी. बता दें कि जम्मू के कठुआ में आठ साल की बच्ची से रेप की घटना को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है.  अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा, "भारत में जो हुआ, वो घिनौना है. मैं उम्मीद करती हूं कि नरेंद्र मोदी की सरकार इसपर ज्यादा ध्यान देगी क्योंकि ये भारत की महिलाओं के लिए काफी जरूरी है.' उन्होंने कहा, "पिछली बार जब मैं दावोस में थी तो मैंने उनसे कहा कि उन्होंने अपनी स्पीच में भारतीय महिलाओं के बारे में ज्यादा नहीं कहा. यह सवाल सिर्फ उनके बारे में चर्चा करने तक सीमित नहीं था."  हालांकि, क्रिस्टीन लेगार्ड ने इस टिप्पणी को निजी विचार बताया है. उन्होंने कहा कि इस बयान को बतौर अंतरराष्ट्रीय मुद्र कोष अध्यक्ष न देखा जाए. दुष्कर्म के मामलों पर ठोस कानून बनाने की मांग को लेकर आवाजें लगातार बुलंद हो रही है. वही सरकार इस पर कदम उठाना तो दूर फ़िलहाल चुप्पी साधे मौन है.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा, “भारत में जो हुआ, वो घिनौना है. मैं उम्मीद करती हूं कि नरेंद्र मोदी की सरकार इसपर ज्यादा ध्यान देगी क्योंकि ये भारत की महिलाओं के लिए काफी जरूरी है.’ उन्होंने कहा, “पिछली बार जब मैं दावोस में थी तो मैंने उनसे कहा कि उन्होंने अपनी स्पीच में भारतीय महिलाओं के बारे में ज्यादा नहीं कहा. यह सवाल सिर्फ उनके बारे में चर्चा करने तक सीमित नहीं था.”

हालांकि, क्रिस्टीन लेगार्ड ने इस टिप्पणी को निजी विचार बताया है. उन्होंने कहा कि इस बयान को बतौर अंतरराष्ट्रीय मुद्र कोष अध्यक्ष न देखा जाए. दुष्कर्म के मामलों पर ठोस कानून बनाने की मांग को लेकर आवाजें लगातार बुलंद हो रही है. वही सरकार इस पर कदम उठाना तो दूर फ़िलहाल चुप्पी साधे मौन है.

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