दोस्त रूस से बढ़ी दूरी, US से दोस्ती: इसलिए महत्वपूर्ण है PM मोदी का सोचि दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह रूस के लिए रवाना होने के बाद वहां के शहर सोचि पहुंच गए हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर पीएम मोदी यहां एक अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लेंगे. पीएम मोदी आख‍ि‍र इस अनौपचारिक यात्रा पर क्यों गए, क्या है उनके इस दौरे का महत्व? इसे समझने के लिए दोनों देशों के रिश्तों और बदलते वैश्विक परिदृश्य पर गौर करना होगा.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह रूस के लिए रवाना होने के बाद वहां के शहर सोचि पहुंच गए हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर पीएम मोदी यहां एक अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लेंगे. पीएम मोदी आख‍ि‍र इस अनौपचारिक यात्रा पर क्यों गए, क्या है उनके इस दौरे का महत्व? इसे समझने के लिए दोनों देशों के रिश्तों और बदलते वैश्विक परिदृश्य पर गौर करना होगा.  बढ़ती वैश्विक चुनौतियां अब भारत को रूस और चीन जैसे देशों के करीब ले जा रही हैं. अमेरिका का ट्रंप प्रशासन वैश्विक व्यवस्था के नियम-कायदे को खत्म करता जा रहा है. इससे तीनों देशों को अब यह लगता है कि यदि वैश्विक व्यवस्था में अपना हक बनाए रखना है तो विदेश नीति में ज्यादा समन्वय की जरूरत है.  रूस का झुकाव, भारत की चिंता  भारत का रूस से रिश्ता काफी पुराना है, लेकिन अब तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हकीकत के बीच इसमें बदलाव आ रहा है. दोनों देशों के शीर्ष नेता एक-दूसरे से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं, लेकिन कई मसलों पर भिन्नता बढ़ी है.  भारत को चिंता इस बात की है कि रूस का झुकाव पाकिस्तान की तरफ भी बढ़ रहा है. ऐतिहासिक रूप से देखें तो रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का अक्सर साथ दिया है और कश्मीर मसले पर आने वाले प्रस्तावों पर लगातार वीटो करता रहा है. लेकिन आज दक्षिण एशिया को लेकर रूस की प्राथमिकता बदल रही है.  दिसंबर, 2017 में छह देशों के एक सम्मेलन में जो संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ उसमें कश्मीर पर पाकिस्तान के रवैए का समर्थन किया गया. इस घोषणापत्र पर अफगानिस्तान, चीन, ईरान, पाकिस्तान, रूस और टर्की ने दस्तखत किए थे.  भारत दौरे पर दिसंबर 2017 में आए रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने खुलेआम यह कहा कि भारत को चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल होना चाहिए. यही नहीं, लावरोव ने भारत के अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक क्वाड्रिलैटरल बनाने की कोशिश पर नाराजगी भी जाहिर की.  वैश्व‍िक राजनीति  भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में मतभेद बढ़ रहे हैं. इसकी वजह वैश्विक वातावरण में हो रहे संरचनात्मक बदलाव हैं. रूस के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह दक्ष‍िण एशिया में अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों को हावी न होने दे. दूसरी तरफ पश्च‍िमी जगत वैश्विक राजनीति में रूस को सबसे विनाशकारी ताकत मानता है.  सुरक्षा की जरूरतें  भारत के लिए तो यही महत्वपूर्ण है कि इस इलाके में चीन के उभार से जो नकारात्मक चीजें हो रही है उस पर अंकुश लगे. दक्ष‍िण एशिया और हिंद महासागर इलाके में अभी तक जो परंपरागत रूप से भारत का प्रभाव बना हुआ है, उसमें चीन दखल देने की कोशिश कर रहा है. यही नहीं, भारत-चीन के बीच बढ़ते सत्ता असंतुलन से सीमा के हालात ज्यादा अस्थ‍िर हो गए हैं. चीन-पाकिस्तान का गठजोड़ मजबूत हो रहा है और इसकी वजह से भारत को दोहरे मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.  इसलिए भारत समान विचार वाले देशों के साथ मिलकर ऐसे वैकल्पिक मंच बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे भारत-प्रशांत इलाके में चीनी चौधराहट पर अंकुश लगाया जा सके.  जाहिर है कि अतीत को याद करने वाली भावुकता से ही काम नहीं चल सकता, क्योंकि भारत और रूस के सामने अब नए तरह की चुनौतियां खड़ी हुई हैं.

बढ़ती वैश्विक चुनौतियां अब भारत को रूस और चीन जैसे देशों के करीब ले जा रही हैं. अमेरिका का ट्रंप प्रशासन वैश्विक व्यवस्था के नियम-कायदे को खत्म करता जा रहा है. इससे तीनों देशों को अब यह लगता है कि यदि वैश्विक व्यवस्था में अपना हक बनाए रखना है तो विदेश नीति में ज्यादा समन्वय की जरूरत है.

रूस का झुकाव, भारत की चिंता

भारत का रूस से रिश्ता काफी पुराना है, लेकिन अब तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हकीकत के बीच इसमें बदलाव आ रहा है. दोनों देशों के शीर्ष नेता एक-दूसरे से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं, लेकिन कई मसलों पर भिन्नता बढ़ी है.

भारत को चिंता इस बात की है कि रूस का झुकाव पाकिस्तान की तरफ भी बढ़ रहा है. ऐतिहासिक रूप से देखें तो रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का अक्सर साथ दिया है और कश्मीर मसले पर आने वाले प्रस्तावों पर लगातार वीटो करता रहा है. लेकिन आज दक्षिण एशिया को लेकर रूस की प्राथमिकता बदल रही है.

दिसंबर, 2017 में छह देशों के एक सम्मेलन में जो संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ उसमें कश्मीर पर पाकिस्तान के रवैए का समर्थन किया गया. इस घोषणापत्र पर अफगानिस्तान, चीन, ईरान, पाकिस्तान, रूस और टर्की ने दस्तखत किए थे.

भारत दौरे पर दिसंबर 2017 में आए रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने खुलेआम यह कहा कि भारत को चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल होना चाहिए. यही नहीं, लावरोव ने भारत के अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक क्वाड्रिलैटरल बनाने की कोशिश पर नाराजगी भी जाहिर की.

वैश्व‍िक राजनीति

भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में मतभेद बढ़ रहे हैं. इसकी वजह वैश्विक वातावरण में हो रहे संरचनात्मक बदलाव हैं. रूस के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह दक्ष‍िण एशिया में अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों को हावी न होने दे. दूसरी तरफ पश्च‍िमी जगत वैश्विक राजनीति में रूस को सबसे विनाशकारी ताकत मानता है.

सुरक्षा की जरूरतें

भारत के लिए तो यही महत्वपूर्ण है कि इस इलाके में चीन के उभार से जो नकारात्मक चीजें हो रही है उस पर अंकुश लगे. दक्ष‍िण एशिया और हिंद महासागर इलाके में अभी तक जो परंपरागत रूप से भारत का प्रभाव बना हुआ है, उसमें चीन दखल देने की कोशिश कर रहा है. यही नहीं, भारत-चीन के बीच बढ़ते सत्ता असंतुलन से सीमा के हालात ज्यादा अस्थ‍िर हो गए हैं. चीन-पाकिस्तान का गठजोड़ मजबूत हो रहा है और इसकी वजह से भारत को दोहरे मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

इसलिए भारत समान विचार वाले देशों के साथ मिलकर ऐसे वैकल्पिक मंच बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे भारत-प्रशांतइलाके में चीनी चौधराहट पर अंकुश लगाया जा सके.

जाहिर है कि अतीत को याद करने वाली भावुकता से ही काम नहीं चल सकता, क्योंकि भारत और रूस के सामने अब नए तरह की चुनौतियां खड़ी हुई हैं.  

You May Also Like

English News