दो साल बाद रायबरेली पहुंची सोनिया गाँधी

 पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और स्थानीय सांसद सोनिया गांधी मंगलवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में दो दिवसीय यात्रा पर आई हैं, अमेठी जिले में फुरसतगंज में उतरने के बाद, सोनिया गांधी रायबरेली में एक अतिथि गृह पहुंचीं , जहां उन्होंने भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की इमारत का आधारशिला रखी और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. रायबरेली: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और स्थानीय सांसद सोनिया गांधी मंगलवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में दो दिवसीय यात्रा पर आई हैं, अमेठी जिले में फुरसतगंज में उतरने के बाद, सोनिया गांधी रायबरेली में एक अतिथि गृह पहुंचीं , जहां उन्होंने भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की इमारत का आधारशिला रखी और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.   कांग्रेसी नेता ने बताया कि अपनी यात्रा के दौरान, वे जिला सतर्कता और निगरानी समिति की बैठक में भाग लेंगी, इसके अलावा सोनिया गाँधी आगामी चुनावों से पहले अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की नब्ज़ टटोलने की भी कोशिश करेंगी. गौरतलब है कि जून 2016 के बाद सोनिया का अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में ना आना क्षेत्र के लोगों के लिए धीरे-धीरे चिंता का विषय बनता जा रहा था, सोनिया की दूरी उनका विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर रही थी.  आपको बता दें कि रायबरेली कांग्रेस का सबसे मजबूत किला है,  2014 में मोदी लहर के बीच भी सोनिया गाँधी अपना क़िला बचाने में कामयाब रही थीं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 2019 के लोक सभा चुनावों से पहले अपने गढ़ की जांच पड़ताल करना चाहती है, क्योंकि इन 2 सालों में भाजपा ने रायबरेली में अपने पाँव जमाना शुरू कर दिए हैं, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार रायबरेली का ऊंट किस करवट बैठेगा.

कांग्रेसी नेता ने बताया कि अपनी यात्रा के दौरान, वे जिला सतर्कता और निगरानी समिति की बैठक में भाग लेंगी, इसके अलावा सोनिया गाँधी आगामी चुनावों से पहले अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की नब्ज़ टटोलने की भी कोशिश करेंगी. गौरतलब है कि जून 2016 के बाद सोनिया का अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में ना आना क्षेत्र के लोगों के लिए धीरे-धीरे चिंता का विषय बनता जा रहा था, सोनिया की दूरी उनका विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर रही थी.

आपको बता दें कि रायबरेली कांग्रेस का सबसे मजबूत किला है,  2014 में मोदी लहर के बीच भी सोनिया गाँधी अपना क़िला बचाने में कामयाब रही थीं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 2019 के लोक सभा चुनावों से पहले अपने गढ़ की जांच पड़ताल करना चाहती है, क्योंकि इन 2 सालों में भाजपा ने रायबरेली में अपने पाँव जमाना शुरू कर दिए हैं, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार रायबरेली का ऊंट किस करवट बैठेगा. 

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