नक्सलियों ने हमले के लिए बनाए ‘रेम्बो तीर’

सुरक्षाबलों द्वारा नक्सलियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है, महाराष्ट्र और झारखण्ड में भारतीय जवानों ने भारी संख्या में नक्सलियों को ढेर किया है. जिससे नक्सली बौखला गए हैं और पलटवार करने की योजना बना रहे हैं. बताया जा रहा है कि इसके लिए नक्सलियों ने नए हथियार भी इकट्ठे किया हैं, जिसमे एक खतरनाक हथियार है ‘रेम्बो तीर’ . यह तीर हॉलीवुड सुपरस्टार सिल्वेस्टर स्टेलोन की फिल्म रेम्बो की तर्ज पर बनाया गया है, रेम्बो में सिल्वेस्टर इसी तरह के हथियार का इस्तेमाल करते हैं.सुरक्षाबलों द्वारा नक्सलियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है, महाराष्ट्र और झारखण्ड में भारतीय जवानों ने भारी संख्या में नक्सलियों को ढेर किया है. जिससे नक्सली बौखला गए हैं और पलटवार करने की योजना बना रहे हैं. बताया जा रहा है कि इसके लिए नक्सलियों ने नए हथियार भी इकट्ठे किया हैं, जिसमे एक खतरनाक हथियार है 'रेम्बो तीर' . यह तीर हॉलीवुड सुपरस्टार सिल्वेस्टर स्टेलोन की फिल्म रेम्बो की तर्ज पर बनाया गया है, रेम्बो में सिल्वेस्टर इसी तरह के हथियार का इस्तेमाल करते हैं.  पहले भी नक्सली तीर-धनुष का इस्तेमाल किया करते थे, लेकिन वे पारम्परिक होते थे, किन्तु अब नक्सलियों ने इस तीर के अगले हिस्से पर एक तरह का विस्फोटक जोड़ दिया है, जो लक्ष्य से टकराते ही काफी मात्रा में आग और धुआं पैदा कर देगा. गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'इन तीरों में लो ग्रेड गनपाउडर या पटाखों के पाउडर होते हैं, जो लक्ष्य से टकराने के बाद फट जाते हैं. इससे बहुत ज्यादा नुकसान तो नहीं होता, लेकिन इससे सुरक्षाबलों को रोका जरूर जा सकता है.     पिछले साल 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में घातक हमले में नक्सलियों ने इस तकनीक का व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया था, इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे और उनके हथियार लूट लिए गए थे. रॉकेट की तरह इस्तेमाल होने वाले इन तीरों के नोक में विस्फोटक बंधे होते हैं.

पहले भी नक्सली तीर-धनुष का इस्तेमाल किया करते थे, लेकिन वे पारम्परिक होते थे, किन्तु अब नक्सलियों ने इस तीर के अगले हिस्से पर एक तरह का विस्फोटक जोड़ दिया है, जो लक्ष्य से टकराते ही काफी मात्रा में आग और धुआं पैदा कर देगा. गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘इन तीरों में लो ग्रेड गनपाउडर या पटाखों के पाउडर होते हैं, जो लक्ष्य से टकराने के बाद फट जाते हैं. इससे बहुत ज्यादा नुकसान तो नहीं होता, लेकिन इससे सुरक्षाबलों को रोका जरूर जा सकता है.

पिछले साल 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में घातक हमले में नक्सलियों ने इस तकनीक का व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया था, इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे और उनके हथियार लूट लिए गए थे. रॉकेट की तरह इस्तेमाल होने वाले इन तीरों के नोक में विस्फोटक बंधे होते हैं.

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