निकाय चुनाव में BJP विधायकों के रिश्तेदारों को नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं को‌ मिलेगा मौका

भाजपा निकाय चुनाव में सांसदों व विधायकों के परिवारीजनों तथा नाते-रिश्तेदारों को टिकट नहीं देगी। मौका कार्यकर्ताओं को दिया जाएगा।निकाय चुनाव में BJP विधायकों के रिश्तेदारों को नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं को‌ मिलेगा मौका

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पार्टी नेतृत्व ने विधायकों को टिकटों की पैरवी से दूर रहने की हिदायत दी है। साथ ही कहा कि विधायक अपना दिल बड़ा करें। परिवारीजनों के लिए टिकट न मांगें।

बताया गया कि विधायकों को उम्मीदवारों का पैनल तैयार करने वाली समितियों में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जहां वे अपनी राय दे सकते हैं। पर, किसी को टिकट दिला ही देने का वादा न करें।

इसके लिए पैरवी में भी न जुटें। इससे उनकी छवि ही खराब होगी। नेतृत्व ने पूर्व में किए गए फैसले में ढील देते हुए अब पार्टी के पदाधिकारियों को भी टिकट मांगने की छूट देने का फैसला किया है। साथ ही आश्वस्त किया कि आयातित लोगों को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा।

टिकट पार्टी के कार्यकर्ताओं को ही मिलेगा। रविवार को यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर सरकार के मंत्रियों, पार्टी के विधायकों, विधानसभा का चुनाव हारे हुए उम्मीदवारों, एमएलसी की बैठक में पार्टी नेतृत्व ने यह भी साफ कर दिया कि निकाय चुनाव विधायकों की संबंधित इलाके में काम और लोकप्रियता का पैमाना भी होगा।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों व हारे हुए उम्मीदवारों से निकाय चुनाव में पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया गया।

आगाह किया गया कि भले ही कांग्रेस, सपा और बसपा काफी कमजोर हैं। बावजूद इसके इन पार्टियों को हल्के में नहीं लेना है। भाजपा के लोगों को इन पर हमलावर रहना चाहिए।

जो टिकट मांग रहे थे, उनका विरोध न करिएगा
भाजपा के महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल ने विधायकों से कहा कि विधानसभा चुनाव के वक्त बहुत लोग टिकट मांग रहे थे, पर पार्टी ने आपको मौका दिया। आप जीतकर आए।

पार्टी अगर उन टिकट मांगने वालों में किसी को उम्मीदवार बनाती है तो वहां के विधायक को उसका विरोध नहीं करना है। ऐसा हुआ तो संगठन कठोर कदम उठाएगा। उस समय पार्टी ने आपको मौका दिया तो आप जीते। अब पार्टी जिसे मौका देगी आप सबको जुटकर उसे जिताना है। 

जिताऊ को टिकट
भाजपा नेतृत्व की तरफ से कहा गया कि वे जिताऊ उम्मीदवार के पक्ष में सुझाव दें। ऐसे कार्यकर्ता का समर्थन करें जो संगठन के प्रति निष्ठावान रहा हो। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा का विरोध करने वालों को उम्मीदवार न बनाया जाए। विधायकों को बूथ कमेटियों के पुनर्गठन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। विधायकों से सभी जगह चुनावी माहौल बनाने तथा केंद्र व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक ले जाने के लिए 18 अक्तूबर को विकास ज्योति उत्सव मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 
31 विधायकों को दूसरी जगह की जिम्मेदारी
बैठक में बताया गया कि पार्टी के 31 विधायक ऐसे हैं जिनके क्षेत्र में कोई नगर निकाय नहीं आता है। ऐसे विधायकों को उन स्थानों पर लगाने का फैसला किया गया है, जहां के चुनावी समीकरण भाजपा के ज्यादा प्रतिकूल हैं। अन्य सभी विधायकों, सांसदों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, हारे हुए प्रत्याशियों को उनके अपने ही क्षेत्र के निकाय के पार्टी उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सांसद अपने प्रतिनिधियों को दूर रखें
बैठक में यह भी साफ किया गया कि निकाय चुनाव से संबंधित तथा प्रत्याशियों के पैनल बनाने के लिए होने वाली बैठकों में सांसद को खुद रहना होगा। उनके प्रतिनिधि को बैठक में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है। सभी को कहीं भी समानांतर सत्ता न स्थापित करने की हिदायत भी दी गई। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र पांडेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महामंत्री सुनील बंसल तथा नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने बात रखी। उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा भी बैठक में मौजूद थे। इससे पहले इन सभी ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों के साथ निकाय चुनाव पर बातचीत की।

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