ये बड़ा नेता खत्म कर सकता है मोदी लहर, जानें फिर भी कोंग्रेसियों ने क्यों नहीं दी जगह…!!

आजादी के बाद से आज साल 2017 तक देश को 15 बेहतरीन प्रधानमंत्री मिल चुके हैं। आजादी के 70 साल बाद देश में बहुत कुछ बदल चुका है। लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चस्व और डंका जितना लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है।

ये बड़ा नेता खत्म कर सकता है मोदी लहर, जानें फिर भी कोंग्रेसियों ने क्यों नहीं दी जगह...!!

इससे पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया। वजह पीएम मोदी बहुत ही आक्रामकता के साथ अपनी बातों की प्रस्तुति करते हैं। यही कारण है कि देश की सबसे पहली और विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी आज भाजपा के सामने टिक नहीं पा रही है। पर क्या आप जानते हैं कि कांग्रेस के तरकश में एक बाण ऐसा भी रहा जो मोदी लहर को काटने का पूरा माद्दा रखता था। अफ़सोस की कांग्रेस ने उसे न तो कभी ख़ास तरजीह दी और न ही इतिहास के पन्नों में जगह।

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वह नाम है पी वी नरसिंहा राव का। 1991 में जब देश बदल रहा था तब सारा श्रेय मनमोहन सिंह को मिल गया था। पर कम लोगों को पता है कि मनमोहन तो प्यादे थे। राव थे असली मास्टर माइंड। राव को पता था कि क्या करना है। इसके लिए उन्होंने मोरारजी देसाई के सिपहसालार इकॉनमिस्ट आई जी पटेल को बुलाया फाइनेंस मिनिस्ट्री संभालने के लिए। पर पटेल ने मना कर दिया। बोले कि दीन-दुनिया घूमकर अब बड़ौदा में घर बना लिया है। आराम करना चाहता हूं। ये वो वक्त था जब मूडीज और स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने भारत की रेटिंग खराब कर दी थी।

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इसमें सबसे दिलचस्प ये था कि भारत के राष्ट्रपति वेंकटरमन खुद इकॉनमी के आदमी थे। उनको पता था कि देश में क्या चल रहा है। राजीव गांधी तो बहुमत के बावजूद कुछ कर नहीं पाये। वी पी सिंह ने भी हिम्मत नहीं की। चंद्रशेखर को राजीव ने करने नहीं दिया। फिर राजीव मारे ही गये। तो सारी जिम्मेदारी आ गई नरसिंहा राव पर।

2015 और 2016 में इन सारी बातों पर किताबें आई हैं। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, माखन लाल फोतेदार और जयराम रमेश ने किताबें लिखी हैं। इनमें 1991 का जिक्र है। जिक्र नहीं है तो नरसिंह राव का। वो जगह नहीं दी गई है, जो मिलनी चाहिए थी। पर एक किताब आई है, जो नरसिंहा राव के बारे में बात करती है। संजय बारू की।

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द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर लिखकर संजय बारू ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी थी। पहले तो मनमोहन सिंह को रोबोट कहा जाता था। किताब के बाद लोग कहने लगे कि देखो, अब तो किताबों में भी लिखा है। हालांकि इस किताब में संजय ने मनमोहन सिंह की पॉजिटिव चीजों के बारे में भी बात की थी।

बता दें संजय बारू साल 2004-08 तक मनमोहन सिंह के मीडिया ए़़डवाइजर रहे। संजय के अनुसार, “मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और कांग्रेस के बारे में मैं जितना जानता हूं, उसका 50 प्रतिशत ही बताया है मैंने इस किताब में।”

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संजय एक और किताब लेकर आये हैं। 1991 HOW P V NARASIMHA RAO MADE HISTORY। ALEPH पब्लिकेशन से आई यह किताब महज 499 रुपये की है। इसे डिस्काउंट ऑफर के साथ एमेजॉन से रूचि रखने वाले अपना बना सकते हैं।

अगर कांग्रेस राव की लीगेसी ले के चले तो साबित कर सकती है कि ये सौ साल पुरानी पार्टी नहीं, बल्कि भविष्य की पार्टी है। साथ ही एक और चीज दिखाई जा सकती है। मोदी ने अफसरों के साथ मिलकर डिमॉनिटाइजेशन का फैसला लिया। राव ने भी अफसर और अफसर-नेता के साथ मिलकर ही फैसला लिया था। पर दोनों में अंतर था।

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इस किताब में कुछ किस्से हैं जो नरसिंहा राव की काबिलियत के बारे में बताते हैं और उन्हें श्रेष्ठ साबित करते हैं। राव ने कभी खुद को सबसे अव्वल और श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश नहीं की। उनका मात्र एक लक्ष्य था भारत का सर्वांगीण विकास का। उनकी वाणी के बारे में बात की जाए तो उनके बोलने के लहजे में तेजी और आक्रामकता का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था।

उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि किसी भी लक्ष्य को साधने का वह ऐलान नहीं करते थे बल्कि उनका अटूट विश्वास उसे हासिल करने का था। जिसके बाद लोगों को खुद ही उसका फायदा मिलने के बाद पता चल जाता था। उन्होंने भारत के लिए किया उसका व्याख्यान शब्दों में तो कर पाना संभव नहीं है। पर जो युवा देश में बदलाव की सोंच रखते हैं उन्हें राव की लेगेसी को भी ध्यान रखना चाहिए इससे उनकी सोंच और विकास दोनों को बल मिलेगा।

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