बड़ी खबर: नोटबंदी की शिकायत करने पहुंची कांग्रेस, प्रणब मुखर्जी ने भगाया

नोटबंदी पर मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट दिखते विपक्ष में दरार पैदा होती दिख रही है। शुक्रवार को भी संसद में गतिरोध के बाद विपक्ष ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। खबर है कि राष्ट्रपति के सामने विपक्ष अपनी बात मजबूती से नहीं रख पाया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विपक्ष से कहा है कि वो पहले अन्य दलों को नोटबंदी पर विश्वास में ले। क्योंकि इस मुलाकात में 4 प्रमुख पार्टियां शामिल ही नहीं हुईं। बीएसपी, एनसीपी, एसपी और वामदल के नेता राष्ट्रपति से मिलने नहीं पहुंचे। राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने किया।

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विपक्ष ने शुक्रवार को नोटबंदी की लड़ाई को राष्ट्रपति के सामने पहुंचाने का मन बनाया। दोपहर को विपक्षी दलों ने नोटबंदी और इसकी समस्याओं पर बहस नहीं कराने के मामले को राष्ट्रपति के सामने रखा। हालांकि विपक्षी दलों में उस समय दरार देखने को मिली जब बीएसपी, एसपी, एनसीपी और वाम दल ने उनका साथ छोड़ दिया। हालांकि वामदलों का कहना है कि सही संवाद न होने के चलते भ्रम की स्थिति पैदा हुई और वे नहीं पहुंच सके। ये 4 पार्टियां विपक्ष के साथ राष्ट्रपति से मिलने नहीं पहुंचीं। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नोटबंदी की वजह से कितने लोग लाइन में लग कर मर गए हैं। कितने लोगों को तकलीफ हुई है। लोग बेरोजगार हुए हैं। मजदूर को मजदूरी भी नहीं मिल रही। किसानों को कठिनाई हुई है।

उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराना चाहते थे, पर सरकार ने सत्र चलने ही नहीं दिया। खड़गे ने कहा, ‘हम इसपर चर्चा चाहते थे, पर सरकार ने इन्हें रोक दिया। सरकार ने सहयोग नहीं किया। सरकार ने लोकतंत्र के हर वसूलों को तोड़ा। सरकार ने सदन को ठीक ढंग से नहीं चलने दिया। हम बिना शर्त चर्चा के लिए तैयार थे।’  जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने कहा, ‘सरकार ने नोटबंदी, कालेधन के खिलाफ कदम उठाया है तो हम साथ खड़े हैं। लेकिन देशभर में किसानों, गरीबों, मजदूरों का जो हाल हुआ है, सब्जीवालों की सब्जियां खेत में ही सड़ गईं। सरकार ने इसके लिए कुछ नहीं किया। सदन चलता तो बहुत सारे लोगों की दिक्कतों को उठाए होते। पर सरकार ने ऐसा करने ही नहीं दिया। इसी वजह से हम आज राष्ट्रपति के पास आए।’
 

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