न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत का ‘सुपर-7’ हासिल करने के लिए उतरेगी ‘विराट सेना’

भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज 22 अक्टूबर को मुंबई में होने जा रहा है। इस सीरीज के दौरान विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम इंडिया के पास लगातार सातवीं द्विपक्षीय सीरीज जीतने का मौका भी है। इससे पहले टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को घेरलू सीरीज में 4-1 से मात देकर लगातार छठी सीरीज जीत दर्ज की थी। आईए नजर डालते हैं कब शुरू हुआ था टीम इंडिया की जीत का ये सिलसिला और विजयरथ पर सवार भारतीय टीम ने किस टीम को कब दी थी मात। न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत का 'सुपर-7' हासिल करने के लिए उतरेगी 'विराट सेना'
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द्विपक्षीय सीरीज में लगातार 6 सीरीज जीत की शुरुआत कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में साल 2016 में जिंबाब्वे में हुई थी। धोनी की कप्तानी में जिंबाब्वे दौरे पर पहुंची टीम इंडिया ने अफ्रीकी टीम को उनके ही घर में 3-0 मात दी थी। सीरीज के तीनों वनडे में भारतीय टीम ने क्रमशः 9, 8 और 10 विकेट से मात देकर सीरीज अपने नाम की थी। इन तीनों ही मैच में पहले बल्लेबाजी करने उतरी जिंबाब्वे दो सौ रन के आंकड़े को भी नहीं छू पाई थी। उसके द्वारा जीत के लिए दिए लक्ष्य को हासिल कर टीम इंडिया ने सीरीज अपने नाम कर ली। 
 

साल 2016 के दिसंबर में भारत दौरे पर आई कीवी टीम को 3-2 के अंतर से हर का सामना करना पड़ा था। न्यूजीलैंड के खिलाफ धर्मशाला में खेले गए सीरीज के पहले वनडे में हार्दिक पांड्या ने डेब्यू किया था। धर्मशाला वनडे में टीम इंडिया ने 6 विकेट से जीत हासिल की थी। इसके बाद दिल्ली में खेले गए दूसरे वनडे में कीवी टीम ने भारत को 6 रन से मात देकर सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली। इसके बाद मोहाली में खेले गए मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से शिकस्त देकर सीरीज में 2-1 की बढ़त हासिल की। इसके बाद कप्तान धोनी के गढ़ रांची में खेले गए चौथे वनडे में टीम इंडिया को 19 रन से हार का सामना करना पड़ा। सीरीज का पांचवां और निर्णायक मैच विशाखापट्टनम में खेला गया जहां अमित मिश्रा की फिरकी के आगे किसी कंगारू गेंदबाज की नहीं चली और टीम इंडिया ने सीरीज 3-2 से अपने नाम कर ली। यह बतौर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के करियर की आखिरी सीरीज साबित हुई। 
 

महेंद्र सिंह धोनी के टीम इंडिया के सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ने के बाद विराट कोहली को टीम का नया कप्तान घोषित किया गया। यह बतौर पूर्णकालिक कप्तान विराट की पहली वनडे सीरीज थी।  सीरीज के पहले और दूसरे वनडे में भारतीय टीम ने 3 विकेट और 15 रन से जीत हासिल कर सीरीज में 2-0 से विजयी बढ़त हासिल कर ली। आखिरी वनडे में इंग्लैंड 5 रन से विजय हासिल करने में सफल रही और सीरीज 2-1 से टीम इंडिया के नाम रही। 
 

चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के हाथों करारी शिकस्त का सामना करने के बाद टीम इंडिया वेस्ट इंडीज के दौरे पर पहुंची जहां उसने कैरेबियाई टीम वनडे सीरीज में 3-1 के अंतर से मात दी थी। सीरीज का पहला वनडे बारिश के कारण रद्द हो गया था। इसके बाद दूसरे और तीसरे वनडे में टीम इंडिया ने 105 और 93 रन से जीत हासिल कर 2-0 की बढ़त बना ली थी। लेकिन चौथे मैच में वेस्टइंडीज 11 रन से जीत दर्ज कर सीरीज में वापसी की। इसके बाद पांचवें और आखिरी वनडे में  8 विकेट से जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने 3-1 से पर कब्जा कर लिया।
 

विराट सेना ने श्रीलंका को उनकी ही सरजमीं पर वनडे सीरीज में 5-0 के अंतर से मात दी थी यह पहला मौका था जब टीम इंडिया ने मेजबान श्रीलंका का उनके ही घर में सूपड़ा साफ किया। विराट कोहली यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय कप्तान बने। किसी भी मैच में टीम इंडिया ने श्रीलंकाई टीम को जीत का मौका नहीं दिया। पल्लेकल में खेले गए सीरीज के दूसरे वनडे में अकिला धनंजय की शानदार गेंदबाजी के कारण टीम इंडिया परेशानी में आई थी लेकिन धोनी ने भुवनेश्वर कुमार के साथ आठवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर टीम को हार से बचा लिया था।   
 

भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को नागपुर में 7 विकेट से मात देकर 4-1 से सीरीज अपने नाम कर ली इसके साथ ही टीम इंडिया आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर वन टीम भी बन गई। टीम इंडिया की टीम इंडिया की यह लगातार छठवीं सीरीज जीत थी। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को सीरीज के शुरुआती तीन मैचों में मात देकर सीरीज अपने नाम कर ली। इसके बाद चौथे वनडे में भारत को हार का सामना करना पड़ा लेकिन पांचवें मैच में टीम इंडिया ने जीत दर्ज कर 4-1 के अंतर से अपने नाम की लेकिन उसका कंगारू टीम का सूपड़ा साफ करने का सपना अधूरा रह गया। 
 

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