न्यूजीलैंड ने प्रशांत क्षेत्र को लेकर चीन को चेतावनी दी

भारत का पडोसी मुल्क चीन नवंबर में प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के साथ सम्मलेन की योजना बना रहा है. लेकिन इस बीच न्यूजीलैंड ने आज चीन को चेतावनी दी है कि बीजिंग लंबे समय से उपेक्षित इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने कि कोशिश कर रहा है. चीन के इस कदम को लेकर कई देश उसे चेतवानी दे चुके है. भारत का पडोसी मुल्क चीन नवंबर में प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के साथ सम्मलेन की योजना बना रहा है. लेकिन इस बीच न्यूजीलैंड ने आज चीन को चेतावनी दी है कि बीजिंग लंबे समय से उपेक्षित इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने कि कोशिश कर रहा है. चीन के इस कदम को लेकर कई देश उसे चेतवानी दे चुके है.   इस मामले में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 से 18 नवंबर के बीच पोर्ट मोरेसबाय में होने वाली एशिया - पेसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन फोरम से पहले यह बैठक करना चाहते हैं. साथ ही बता दें कि पीएनजी के प्रधानमंत्री पीटर ओ ' नील ने फिजी संसद को कल संबोधित किया और कहा , ‘‘ मैं आपको चीन के राष्ट्रपति माननीय शी चिनफिंग के साथ प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्योता देता हूं. ज्ञात हो कि एपीईसी नेताओं की बैठक से कुछ दिन पहले वह पापुआ न्यू गिनी के दौरे पर आएंगे , उसी दौरान यह बैठक होगी. ’’   गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड लंबे समय से क्षेत्र को अपना इलाका मानते रहे हैं लेकिन चीन बीते एक दशक से लगातार यहां अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. ओ ' नील ने यह नहीं बताया कि बैठक का एजेंडा क्या होगा.  उधर डोकलाम क्षेत्र को लेकर भारत और चीन में जारी तनातनी के बीच अमरीका के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने भारत को इस क्षेत्र की मजबूत शक्ति बताया है.

इस मामले में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 से 18 नवंबर के बीच पोर्ट मोरेसबाय में होने वाली एशिया – पेसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन फोरम से पहले यह बैठक करना चाहते हैं. साथ ही बता दें कि पीएनजी के प्रधानमंत्री पीटर ओ ‘ नील ने फिजी संसद को कल संबोधित किया और कहा , ‘‘ मैं आपको चीन के राष्ट्रपति माननीय शी चिनफिंग के साथ प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्योता देता हूं. ज्ञात हो कि एपीईसी नेताओं की बैठक से कुछ दिन पहले वह पापुआ न्यू गिनी के दौरे पर आएंगे , उसी दौरान यह बैठक होगी. ’’ 

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड लंबे समय से क्षेत्र को अपना इलाका मानते रहे हैं लेकिन चीन बीते एक दशक से लगातार यहां अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. ओ ‘ नील ने यह नहीं बताया कि बैठक का एजेंडा क्या होगा.  उधर डोकलाम क्षेत्र को लेकर भारत और चीन में जारी तनातनी के बीच अमरीका के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने भारत को इस क्षेत्र की मजबूत शक्ति बताया है.

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