पंजाब बोर्ड रिजल्ट: मामूली किसान की बेटी ने हासिल किया राज्य में दूसरा स्थान

”हौसलों में हो उड़ान तो नामुकिन नहीं आसमान को पाना”. कुछ ऐसा ही साबित करके दिखाया है 10वीं के बोर्ड एग्जाम में दूसरा स्थान हासिल करने वाली पंजाब की बेटी जासमीन कौर ने. 10वीं क्लास में दूसरा स्थान हासिल करने वाली जासमीन के पिता बेहद मामूली किसान हैं और वह एक महीने में 10 हजार रुपये भी नहीं कमा पाते हैं. लेकिन घर के इतने खराब हालात होने के बावजूद जासमीन ने अपने सपनों को उड़ान देने में कोई कसर नहीं रहने दी और यह बड़ा मुकाम हासिल किया.

 

कपूरथला जिले के शिशु मॉडल स्कूल में पढ़ने वाली जासमीन कौर ने 10वीं क्लास में 650 में से 636 (97.85%) मार्क्स हासिल किए हैं. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्प्रेस ने जब जासमीन के पिता सुखबीर सिंह से बात करने की तो उन्होंने कहा, ”हमारी बेटी ने पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया है, मुझे इस बात की जानकारी तक नहीं थी.”''हौसलों में हो उड़ान तो नामुकिन नहीं आसमान को पाना''. कुछ ऐसा ही साबित करके दिखाया है 10वीं के बोर्ड एग्जाम में दूसरा स्थान हासिल करने वाली पंजाब की बेटी जासमीन कौर ने. 10वीं क्लास में दूसरा स्थान हासिल करने वाली जासमीन के पिता बेहद मामूली किसान हैं और वह एक महीने में 10 हजार रुपये भी नहीं कमा पाते हैं. लेकिन घर के इतने खराब हालात होने के बावजूद जासमीन ने अपने सपनों को उड़ान देने में कोई कसर नहीं रहने दी और यह बड़ा मुकाम हासिल किया.   कपूरथला जिले के शिशु मॉडल स्कूल में पढ़ने वाली जासमीन कौर ने 10वीं क्लास में 650 में से 636 (97.85%) मार्क्स हासिल किए हैं. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्प्रेस ने जब जासमीन के पिता सुखबीर सिंह से बात करने की तो उन्होंने कहा, ''हमारी बेटी ने पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया है, मुझे इस बात की जानकारी तक नहीं थी.''   जासमीन ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल और साइंस स्कूल टीचर का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, ''मेरे पेरेंट्स और टीचर्स की वजह से मुझे यह कामयाबी हासिल हुई है. मेरे टीचर रविवार को स्पेशल क्लास लेकर मेरी मदद करते थे. इसलिए मुझे कभी कोई ट्यूशन लेने की जरूरत भी महसूस नहीं हुई.''   जासमीन के पिता ने कहा, ''मेरे पास सिर्फ 1.5 एकड़ जमीन है और उससे मैं परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी जितना ही पैसा कमा पाता हूं.'' बता दें कि सुखबीर ने खुद किसान बनने से पहले 12वीं क्लास तक पढ़ाई की है.

जासमीन ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल और साइंस स्कूल टीचर का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, ”मेरे पेरेंट्स और टीचर्स की वजह से मुझे यह कामयाबी हासिल हुई है. मेरे टीचर रविवार को स्पेशल क्लास लेकर मेरी मदद करते थे. इसलिए मुझे कभी कोई ट्यूशन लेने की जरूरत भी महसूस नहीं हुई.”

जासमीन के पिता ने कहा, ”मेरे पास सिर्फ 1.5 एकड़ जमीन है और उससे मैं परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी जितना ही पैसा कमा पाता हूं.” बता दें कि सुखबीर ने खुद किसान बनने से पहले 12वीं क्लास तक पढ़ाई की है.

 

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