पंजाब में अवैध निर्माण पर वोट की सियासत, सिद्धू के हल्‍ला बोल से गर्माया मुद्दा

पंजाब में अवैध निर्माणों पर वोट की सियासत हो रही है और पहले भी होती रही है। लेकिन, अब स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम से यह बड़ा मुद्दा बन गया है। पूरे राज्‍य में कोई शहर एेसा नहीं है जो अवैध निर्माण से अछूता हो। राज्‍य के जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, पटियाला व बठिंडा नगर निगमों की सीमा के अंदर एक लाख से ज्यादा अवैध निर्माण किए गए हैं। आधिकारिक तौर पर निकाय विभाग के पास अवैध निर्माण से संबंधित उपलब्ध जानकारी में निगमों से जो रिपोर्ट सौंपी गई है उसमें अवैध निर्माण की संख्या आठ हजार के करीब है। हकीकत इसके विपरीत है।अभी तक केवल उन्हीं को अवैध निर्माण माना जा रहा है, जिनका नक्शा निगमों से पास नहीं करवाया गया है। हकीकत में 80 फीसदी से ज्यादा निर्माण अवैध हैं, क्योंकि नक्शे के हिसाब से मौके पर निर्माण करवाया ही नहीं गया है। उसे नगर निगम प्रशासन नजर अंदाज करके चल रहा है।  खेमों में बंटी कांग्रेस  अवैध कॉलोनियां व अवैध निर्माण रोजाना लाखों लोगों के लिए परेशानी का सबब भी बन रहे हैं। इसके बाद भी वोट व नोट की राजनीति इस बार भी हावी पड़ती नजर आ रही है। फिलहाल तो मामले को लेकर कांग्रेस सीधे तौर पर दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। मामले का विरोध कर रहे कांग्रेसियों ने फिलहाल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह व नवजोत सिद्धू के बीच चल रहे शीत युद्ध की आड़ में मुद्दे को दबाने की कवायद शुरू कर दी है।  अभी तक सिद्धू के निशाने पर अवैध कमर्शियल निर्माण ही चल रहे हैं। इसके बाद बाकी का नंबर लगेगा। यह तय है कि अगर सिद्धू कारवाई से पीछे नहीं हटे तो दर्जनों निगम अफसरों का नपना व सरकार के खजाने का भरना तय है।  शहरों का नक्शा बिगड़ा  जालंधर, अमृतसर, पटियाला, लुधियाना व बठिंडा में बीते 20 सालों में हजारों की संख्या में बनी अवैध कॉलोनियों ने शहरों का नक्शा बिगाड़ कर रख दिया है। शहरों के इस अनियोजित विकास ने पेयजल की सप्लाई से लेकर सीवरेज, स्ट्रीट लाइट व सड़कों का बुरा हाल कर रखा है। चूंकि विधायक व मंत्री के कोटे से आने वाली धनराशि का इस्तेमाल लंबे समय से उक्त कॉलोनियों को सुविधाएं देने में खर्च हो रहा है। इसलिए नेता इसे अपने वोट बैंक के रूप में देखते हैं। कुछ जगहों पर नोट बैंक भी काम आ जाता है। नतीजतन जो धनराशि सरकारी खजाने में जानी चाहिए, वह अफसरों व चंद नेताओं की जेब में जा रही है।  सेटेलाइट मैपिंग से सामने आएगी हकीकत  सिद्धू ने हाल ही में महानगरों की सेटेलाइट मैपिंग के प्रोजेक्ट को क्लीनचिट दी है। प्रोजेक्ट पर अगले माह से काम शुरू होना है। तीन साल में महानगरों के एक-एक निर्माण के बारे में सारी जानकारी निकाय विभाग के पास होगी। कितने अवैध निर्माण हैं और कितने मंजूरशुदा, इसकी सारी जानकारी सेटेलाइट मैपिंग के बाद सामने आएगी। अभी तक इस बारे में निकाय विभाग के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।  सब कमेटी ने बैठक में दे दी थी क्लीनचिट  अवैध निर्माण को रेगुलर करने को मंत्रिमंडल की सब कमेटी की बैठक में अवैध निर्माण को तय फीस लेकर नियमित करने का फैसला किया गया था। सिद्धू भी कमेटी में हैं। बीते कुछ वर्षो में सैकड़ों ऐसे अवैध निर्माण हो गए हैं, जिनका नक्शा पास नहीं है। तय फीस लेकर उन्हें नियमित करने के फैसले की आड़ में बाकी के सभी प्रकार के अवैध निर्माण को लेकर कांग्रेसी ही सिद्धू पर दबाव बनाने पर जुटे हैं कि कार्रवाई न की जाए।  -------  सिद्धू बोले- पिक्‍चर अभी बाकि है, लोगों के हित के लिए हो रही कार्रवाई  अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के कारण अपनी ही पार्टी कांग्रेस के नेताओं और विधायकों के निशाने पर अाए नवजाेत सिंह सिद्धू इस हमले से अविचलित हैं। सिद्धू का कहना है कि यह शुरूआत हुई है, पिक्चर तो अभी बाकी है। यह कार्रवाई लाेगों के हित के लिए हो रही है।  एक बातचीत में सिद्धू ने कहा, अवैध निर्माण से पूरी कॉलोनी या मोहल्ले का नक्शा खराब हो जाता है। अवैध निर्माण एक नहीं कई समस्याओं को पैदा करता है, जिससे वहां रहने वाले लोग रोजाना परेशान होते हैं। यातायात समस्या, नालियों को जाम करने, रास्ताें को जाम करने, सड़क या गली के साथ-साथ शहर की नियोजित प्लानिंग को सीधी चुनौती देने वाले अवैध निर्माण हटाने से सरकार को नहीं बल्कि लोगों को ही फायदा है।  सिद्धू ने कहा, मैंने पहले ही निगम अफसरों को चेतावनी दी थी कि ऑनलाइन नक्शे पास करने की सुविधा दी जा रही है। किसी को नक्शे पास करवाने के लि किसी अधिकारी को पैसे देने की जरूरत नहीं है। लोग ऑनलाइन नक्शे का आवेदन करें और उसे पास करवा कर निर्माण करवाएं। अफसरों को पहले ही कहा गया था मौके का दौरा करके देखा जाए कि किस इलाके में कितने अवैध निर्माण हैं। अवैध निर्माणों के लिए अफसर सीधे दोषी होंगे और उन पर कार्रवाई की जाएगी।

अवैध निर्माण व उनके लिए जिम्मेवार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू अपनी ही पार्टी के विधायकों के निशाने पर आ गए हैं। महानगरों का नक्शा बिगाड़ने में अवैध निर्माण व अवैध कॉलोनियां जितनी जिम्मेदार हैं, उससे ज्यादा जिम्मेदार अधिकारियों, विधायकों व स्थानीय नेताओं का आपसी गठजोड़ भी है।

यह पहला मौका नहीं है, जब किसी मंत्री ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की हो, लेकिन हर सरकार के निकाय मंत्रियों का अभी तक का इतिहास यही कहता है कि हमेशा ही मंत्री को वोट व नोट के दबाव में अपना अभियान बीच में ही छोड़ना पड़ता है। इस बार सिद्धू के साथ क्या होगा, अभी कहना जल्दबाजी होगी। इतना तय है कि सिद्धू ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। हजार से ज्यादा अवैध कॉलोनियां और एक लाख 17 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण ने महानगरों का नक्शा बिगाड़ कर रख दिया है।

अभी तक केवल उन्हीं को अवैध निर्माण माना जा रहा है, जिनका नक्शा निगमों से पास नहीं करवाया गया है। हकीकत में 80 फीसदी से ज्यादा निर्माण अवैध हैं, क्योंकि नक्शे के हिसाब से मौके पर निर्माण करवाया ही नहीं गया है। उसे नगर निगम प्रशासन नजर अंदाज करके चल रहा है।

खेमों में बंटी कांग्रेस

अवैध कॉलोनियां व अवैध निर्माण रोजाना लाखों लोगों के लिए परेशानी का सबब भी बन रहे हैं। इसके बाद भी वोट व नोट की राजनीति इस बार भी हावी पड़ती नजर आ रही है। फिलहाल तो मामले को लेकर कांग्रेस सीधे तौर पर दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। मामले का विरोध कर रहे कांग्रेसियों ने फिलहाल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह व नवजोत सिद्धू के बीच चल रहे शीत युद्ध की आड़ में मुद्दे को दबाने की कवायद शुरू कर दी है।

अभी तक सिद्धू के निशाने पर अवैध कमर्शियल निर्माण ही चल रहे हैं। इसके बाद बाकी का नंबर लगेगा। यह तय है कि अगर सिद्धू कारवाई से पीछे नहीं हटे तो दर्जनों निगम अफसरों का नपना व सरकार के खजाने का भरना तय है।

शहरों का नक्शा बिगड़ा

जालंधर, अमृतसर, पटियाला, लुधियाना व बठिंडा में बीते 20 सालों में हजारों की संख्या में बनी अवैध कॉलोनियों ने शहरों का नक्शा बिगाड़ कर रख दिया है। शहरों के इस अनियोजित विकास ने पेयजल की सप्लाई से लेकर सीवरेज, स्ट्रीट लाइट व सड़कों का बुरा हाल कर रखा है। चूंकि विधायक व मंत्री के कोटे से आने वाली धनराशि का इस्तेमाल लंबे समय से उक्त कॉलोनियों को सुविधाएं देने में खर्च हो रहा है। इसलिए नेता इसे अपने वोट बैंक के रूप में देखते हैं। कुछ जगहों पर नोट बैंक भी काम आ जाता है। नतीजतन जो धनराशि सरकारी खजाने में जानी चाहिए, वह अफसरों व चंद नेताओं की जेब में जा रही है।

सेटेलाइट मैपिंग से सामने आएगी हकीकत

सिद्धू ने हाल ही में महानगरों की सेटेलाइट मैपिंग के प्रोजेक्ट को क्लीनचिट दी है। प्रोजेक्ट पर अगले माह से काम शुरू होना है। तीन साल में महानगरों के एक-एक निर्माण के बारे में सारी जानकारी निकाय विभाग के पास होगी। कितने अवैध निर्माण हैं और कितने मंजूरशुदा, इसकी सारी जानकारी सेटेलाइट मैपिंग के बाद सामने आएगी। अभी तक इस बारे में निकाय विभाग के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

सब कमेटी ने बैठक में दे दी थी क्लीनचिट

अवैध निर्माण को रेगुलर करने को मंत्रिमंडल की सब कमेटी की बैठक में अवैध निर्माण को तय फीस लेकर नियमित करने का फैसला किया गया था। सिद्धू भी कमेटी में हैं। बीते कुछ वर्षो में सैकड़ों ऐसे अवैध निर्माण हो गए हैं, जिनका नक्शा पास नहीं है। तय फीस लेकर उन्हें नियमित करने के फैसले की आड़ में बाकी के सभी प्रकार के अवैध निर्माण को लेकर कांग्रेसी ही सिद्धू पर दबाव बनाने पर जुटे हैं कि कार्रवाई न की जाए।

सिद्धू बोले- पिक्‍चर अभी बाकि है, लोगों के हित के लिए हो रही कार्रवाई

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के कारण अपनी ही पार्टी कांग्रेस के नेताओं और विधायकों के निशाने पर अाए नवजाेत सिंह सिद्धू इस हमले से अविचलित हैं। सिद्धू का कहना है कि यह शुरूआत हुई है, पिक्चर तो अभी बाकी है। यह कार्रवाई लाेगों के हित के लिए हो रही है।

एक बातचीत में सिद्धू ने कहा, अवैध निर्माण से पूरी कॉलोनी या मोहल्ले का नक्शा खराब हो जाता है। अवैध निर्माण एक नहीं कई समस्याओं को पैदा करता है, जिससे वहां रहने वाले लोग रोजाना परेशान होते हैं। यातायात समस्या, नालियों को जाम करने, रास्ताें को जाम करने, सड़क या गली के साथ-साथ शहर की नियोजित प्लानिंग को सीधी चुनौती देने वाले अवैध निर्माण हटाने से सरकार को नहीं बल्कि लोगों को ही फायदा है।

सिद्धू ने कहा, मैंने पहले ही निगम अफसरों को चेतावनी दी थी कि ऑनलाइन नक्शे पास करने की सुविधा दी जा रही है। किसी को नक्शे पास करवाने के लि किसी अधिकारी को पैसे देने की जरूरत नहीं है। लोग ऑनलाइन नक्शे का आवेदन करें और उसे पास करवा कर निर्माण करवाएं। अफसरों को पहले ही कहा गया था मौके का दौरा करके देखा जाए कि किस इलाके में कितने अवैध निर्माण हैं। अवैध निर्माणों के लिए अफसर सीधे दोषी होंगे और उन पर कार्रवाई की जाएगी।

 

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