पंजाब में किसान शहरों में नहीं अाएंगे, सब्जी खरीदने गांव पहुंचे कैबिनेट मंत्री सिद्धू

पंजाब में भी किसान शुक्रवार से 10 दिन की छुट्टी पर चले गए हैं। किसान आज से 10 जून तक शहरों में फल-सब्जियों और दूध की सप्लाई नहीं करेंगे। अधिकतर जगहों पर किसान शुक्रवार को शहरों में दूध और सब्जियां लेकर नहीं आए। किसानों ने ऐलान किया है कि शहर के लोग गांवों में आकर दूध और सब्जियां खरीद सकते हैं। इसी क्रम में किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए राज्‍य के स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजाेत सिंह सिद्धू एक गांव में पहुंचे और एक किसान से दूध आैर सब्जियां खरीदीं।हरियाणा में भी किसान छुट्टी पर चले गए है। वहां भी राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रतिनिधियों ने 1 से 10 जून तक शहरों में दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति नहीं होने देने की रणनीति बनाई है। राष्ट्रीय किसान महासंघ के वरिष्ठ सदस्य व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी और प्रदेश प्रवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करने व कर्ज माफी नहीं होने पर किसानों को यह कदम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि 62 किसान संगठनों ने इस दौरान गांवों से शहरों को खाद्य पदार्थों की सप्लाई नहीं होने देने की पूरी रणनीति बना ली है।

किसानों ने आज से 10 जून तक शहरों में दूध और सब्जियों की सप्‍लाई रोकने के संग शहर की दुकानों, शोरूम और सुपर बाजार का रुख नहीं करने का भी निर्णय किया है। अगर शहरी लोगों को फल-दूध या सब्जी चाहिए तो उन्हें गांवों का रुख करना पड़ेगा। नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को फतेहगढ़ साहिब जिले के गांव पत्तों पहुंचे। उन्‍होंने वहां किसान हरशरण सिंह के खेतों से सब्ज़ियां और दूध खरीदकर किसानों का समर्थन किया। सिद्धू गांव में किसान के फार्म हाउस में साहीवाल गायों की जानकारी ली।

पंजाब में अधिकतर शहराें में किसान शुक्रवार को दूध और सब्जियां लेकर नहीं आए। किसानों ने घोषणा की है कि अगर शहरी लोग गांव में आकर दूध, सब्जी खरीदने आते हैं तो उन्हें यह उपलब्ध करवा दिया जाएगा। कर्जमाफी और सभी फसलों की खरीद यकीनी बनाने व लागत पर 50 फीसद लाभ आदि की मांगों को लेकर किसानों ने दूध, सब्जी की सप्लाई बंद की है।

किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि इस दौरान वे कोई रोड जाम या प्रदर्शन नहीं करेंगे। किसान अपने घर और गांव में बैठकर शहर और सरकार को अपना दर्द समझाएंगे। आंदोलन के दौरान किसान आढ़तियों से भी पूरी तरह दूरी बनाकर रखेंगे।  किसानों द्वारा एक दूसरे से उधार लेकर 10 दिन तक आर्थिक लेन-देन किया जाएगा।

किसान संगठन इस आंदोलन के लिए पिछले काफी दिनों से सक्रिय थे। उन्‍होंने गांवों में मुनादी कराकर किसानों इसके लिए जागरूक किया और आंदोलन में शाामिल करने की अपील की। किसान नेताओं ने कहा है कि लोगों को तकलीफ न हो इसके लिए यह व्‍यवस्‍था की गई है कि अगर शहरों के लोग दूध और सब्‍जली लेने गांवों में किसानाें के पास आते हैं तो इसे उपलब्‍ध करा दिया जाएगा। भाकियू प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि हमारा मकसद लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि सोई हुई सरकार को जगाना है।

हरियाणा में भी किसान छुट्टी पर चले गए है। वहां भी राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रतिनिधियों ने 1 से 10 जून तक शहरों में दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति नहीं होने देने की रणनीति बनाई है। राष्ट्रीय किसान महासंघ के वरिष्ठ सदस्य व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी और प्रदेश प्रवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करने व कर्ज माफी नहीं होने पर किसानों को यह कदम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि 62 किसान संगठनों ने इस दौरान गांवों से शहरों को खाद्य पदार्थों की सप्लाई नहीं होने देने की पूरी रणनीति बना ली है।

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