पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र 24 से, दो दिन ही होगा विधायी कामकाज

जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र 24 से 28 अगस्त तक होगा। पांच दिन के इस सत्र में मूलरूप से दो दिन ही सरकारी कामकाज होगा, क्योंकि 24 को दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद शनिवार और रविवार का अवकाश होगा। सरकारी कामकाज के लिए मात्र सोमवार और मंगलवार का दिन शेष रह जाता है।जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र 24 से 28 अगस्त तक होगा। पांच दिन के इस सत्र में मूलरूप से दो दिन ही सरकारी कामकाज होगा, क्योंकि 24 को दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद शनिवार और रविवार का अवकाश होगा। सरकारी कामकाज के लिए मात्र सोमवार और मंगलवार का दिन शेष रह जाता है।   मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विधानसभा सत्र के तारीखों पर मोहर लगा दी गई है। मंत्रिमंडल के फ़ैसले के अनुसार पंजाब के राज्यपाल को भारतीय संविधान की धारा 174 की उप-धारा (1) के अनुसार 15वीं पंजाब विधानसभा का 5वांं सेशन बुलाने के लिए अधिकृत किया गया है।  महत्वपूर्ण यह है कि सत्र के दौरान बेअदबी कांड की जांच करने वाले रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इसकी पहले ही घोषणा कर चुके हैं, जबकि सेवानिवृत्त रणजीत सिंह ने वीरवार सुबह ही अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार रिपोर्ट के ऊपर बहस करवाएंगी या नहीं। क्योंकि, रिपोर्ट में जिस प्रकार से पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व डीजीपी समेत कई बड़े अधिकारियों की तरफ उंगली उठी है। उसे देखते हुए इस बात के संकेत मिल रहे है कि सरकार रिपोर्ट के ऊपर बहस करवा सकती है।   कैप्टन बोले, कभी नहीं दी मजीठिया को क्लीन चिट, केंद्रीय एजेंसियां कर रही जांच यह भी पढ़ें रणजीत सिंह की पहली रिपोर्ट पहले ही लीक हो चुकी है। ऐसे में विपक्ष सरकार के ऊपर बहस करवाने की पुरजोर मांग रख सकता है। चूंकि मुख्यमंत्री पहले ही यह कह चुके है कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद बेअदबी के सारे मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी जाएगी, क्योंकि इस रिपोर्ट में कई बड़े पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। ऐसे में इसकी जांच सीबीआइ ही कर सकती है।  अत: मुख्यमंत्री के पूर्व में लिए गए इस फैसले से यह संकेत मिलते हैं कि सरकार इस पर बगैर बहस करवाए हुए मामले को सीबीआइ को सुपुर्द कर दे। यह देखना रोचक होगा कि सरकार इस मामले में क्या फैसला लेती है। क्योंकि कांग्रेस सरकार पर अकाली दल के प्रति हमदर्दी का रुख रखने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विधानसभा सत्र के तारीखों पर मोहर लगा दी गई है। मंत्रिमंडल के फ़ैसले के अनुसार पंजाब के राज्यपाल को भारतीय संविधान की धारा 174 की उप-धारा (1) के अनुसार 15वीं पंजाब विधानसभा का 5वांं सेशन बुलाने के लिए अधिकृत किया गया है।

महत्वपूर्ण यह है कि सत्र के दौरान बेअदबी कांड की जांच करने वाले रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इसकी पहले ही घोषणा कर चुके हैं, जबकि सेवानिवृत्त रणजीत सिंह ने वीरवार सुबह ही अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार रिपोर्ट के ऊपर बहस करवाएंगी या नहीं। क्योंकि, रिपोर्ट में जिस प्रकार से पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व डीजीपी समेत कई बड़े अधिकारियों की तरफ उंगली उठी है। उसे देखते हुए इस बात के संकेत मिल रहे है कि सरकार रिपोर्ट के ऊपर बहस करवा सकती है।

रणजीत सिंह की पहली रिपोर्ट पहले ही लीक हो चुकी है। ऐसे में विपक्ष सरकार के ऊपर बहस करवाने की पुरजोर मांग रख सकता है। चूंकि मुख्यमंत्री पहले ही यह कह चुके है कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद बेअदबी के सारे मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी जाएगी, क्योंकि इस रिपोर्ट में कई बड़े पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। ऐसे में इसकी जांच सीबीआइ ही कर सकती है।

अत: मुख्यमंत्री के पूर्व में लिए गए इस फैसले से यह संकेत मिलते हैं कि सरकार इस पर बगैर बहस करवाए हुए मामले को सीबीआइ को सुपुर्द कर दे। यह देखना रोचक होगा कि सरकार इस मामले में क्या फैसला लेती है। क्योंकि कांग्रेस सरकार पर अकाली दल के प्रति हमदर्दी का रुख रखने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।  

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