पाकिस्तान: मर्दों की भीड़ वाले चुनावी मैदान में हैं 31 साल की हिंदू महिला सुनीता परमार

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान चुनाव के रंग में पूरी तरह से रंग गया है. इस बार के चुनाव में दिग्गज क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान से लेकर 26/11 हमले का मस्टार माइंड हाफिज सईद तक लड़ रहे हैं. लेकिन मर्दों से लबरेज इस चुनाव में पड़ोसी मुल्क में एक हिंदू महिला ने दस्तक दी है. सुनीता परमार नाम की इस हिंदू महिला ने सिंध प्रांत से चुनाव लड़ने का फैसला लेकर इतिहास रच दिया है. 25 जुलाई को होने वाले प्रांतीय चुनाव में हिस्सा लेकर वो ऐसी पहली अल्पसंख्यक महिला बन जाएंगी जिसने ऐसे किसी भी चुनाव में हिस्सा लिया हो.पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान चुनाव के रंग में पूरी तरह से रंग गया है. इस बार के चुनाव में दिग्गज क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान से लेकर 26/11 हमले का मस्टार माइंड हाफिज सईद तक लड़ रहे हैं. लेकिन मर्दों से लबरेज इस चुनाव में पड़ोसी मुल्क में एक हिंदू महिला ने दस्तक दी है. सुनीता परमार नाम की इस हिंदू महिला ने सिंध प्रांत से चुनाव लड़ने का फैसला लेकर इतिहास रच दिया है. 25 जुलाई को होने वाले प्रांतीय चुनाव में हिस्सा लेकर वो ऐसी पहली अल्पसंख्यक महिला बन जाएंगी जिसने ऐसे किसी भी चुनाव में हिस्सा लिया हो.   हिंदू बहुल इलाके से लड़ रही हैं परमार मेघावर समुदाय से आन वाले 31 साल की परमार इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर ये चुनाव लड़ रही हैं. वो सिंध विधानसभा के PS-56 क्षेत्र से ये चुनाव लड़ने वाली हैं. ये थारपारकर ज़िले में है जहां हिंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परमार का कहना है कि उनके लिए ये चुनाव लड़ना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि पिछली सरकारें अपने वादे पर खरा नहीं उतर पाईं.   महिलाओं के शिक्षा सुधार पर काम करेंगी परमार परमार ने कहा, "हम 21 वीं सदी में हैं लेकिन पिछली सरकारों की वजह से हमारे पास मूलभूल स्वास्थ्य सुविधाएं और महिलाओं के लिए शैक्षणिक संस्थान नहीं हैं. वो दिन लद गए जब महिलाएं कमज़ोर और लाचार हुआ करती थीं. मुझे ये चुनाव जीतन का भरोसा है और इसके लिए मैं किसी शेर से भी लड़ने को तैयार हूं." सुनीता ने महिला शिक्षा का स्तर सुधारने का संकल्प लिया है और अपने क्षेत्र के हेल्थ सिस्टम को भी बेहतर बनाने का वादा किया है.   थारपारकर में हैं आठ लाख से ज्यादा हिंदू पाकिस्तान में 2017 में हुई जनगणना के मुताबिक थारपारकर की आबादी 1.6 मिलियन यानी 16 लाख की है जिसमें से लगभग आधे हिंदू हैं. आपको बता दें कि इसी साल मार्च महीने में एक दलित महिला ने तब इतिहास रच दिया जब उन्होंने इस मुस्लिम बहुल देश में सीनेटर का पद हासिल किया. उन्हें पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टी पीपीपी ने हिंदुओं के लिए रिज़र्व सीट से नॉमिनेट किया था.

हिंदू बहुल इलाके से लड़ रही हैं परमार
मेघावर समुदाय से आन वाले 31 साल की परमार इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर ये चुनाव लड़ रही हैं. वो सिंध विधानसभा के PS-56 क्षेत्र से ये चुनाव लड़ने वाली हैं. ये थारपारकर ज़िले में है जहां हिंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परमार का कहना है कि उनके लिए ये चुनाव लड़ना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि पिछली सरकारें अपने वादे पर खरा नहीं उतर पाईं.

महिलाओं के शिक्षा सुधार पर काम करेंगी परमार
परमार ने कहा, “हम 21 वीं सदी में हैं लेकिन पिछली सरकारों की वजह से हमारे पास मूलभूल स्वास्थ्य सुविधाएं और महिलाओं के लिए शैक्षणिक संस्थान नहीं हैं. वो दिन लद गए जब महिलाएं कमज़ोर और लाचार हुआ करती थीं. मुझे ये चुनाव जीतन का भरोसा है और इसके लिए मैं किसी शेर से भी लड़ने को तैयार हूं.” सुनीता ने महिला शिक्षा का स्तर सुधारने का संकल्प लिया है और अपने क्षेत्र के हेल्थ सिस्टम को भी बेहतर बनाने का वादा किया है.

थारपारकर में हैं आठ लाख से ज्यादा हिंदू
पाकिस्तान में 2017 में हुई जनगणना के मुताबिक थारपारकर की आबादी 1.6 मिलियन यानी 16 लाख की है जिसमें से लगभग आधे हिंदू हैं. आपको बता दें कि इसी साल मार्च महीने में एक दलित महिला ने तब इतिहास रच दिया जब उन्होंने इस मुस्लिम बहुल देश में सीनेटर का पद हासिल किया. उन्हें पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टी पीपीपी ने हिंदुओं के लिए रिज़र्व सीट से नॉमिनेट किया था.

 
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