पिछले साल किए रेल बजट के कई वादे रह गए अधूरे

93 सालों में पहली बार ऐसा होगा जब इस बार रेल बजट पेश नहीं होगा। दरअसल सरकार ने इस बार रेल बजट को आम बजट में विलय कर दिया है। इसमें रेलवे को अन्य क्षेत्रों की तरह ही बजट का प्रावधान होगा। जिससे यात्री सुविधा व योजनाओं को पूरा करने के लिए धन तो मिलेगा, लेकिन पिछले बजट के कई वादे आज भी अधूरे हैं। 
पिछले साल किए रेल बजट के कई वादे रह गए अधूरे

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इसी तरह डबल डेकर उदय ट्रेन के डिजाइन को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। आम लोगों के लिए अनारक्षित श्रेणी वाले अंत्योदय ट्रेन भी अभी तक ट्रैक पर नहीं उतर पाई है। हालांकि इस ट्रेन का एक सेट बनकर तैयार है और इसे अगले सप्ताह चलाने की तैयारी है।

वादे जो नहीं हुए पूरे

स्टेशन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत सौ स्टेशन को आधुनिक बनाने का निर्णय लिया गया था। इसमें मध्य प्रदेश के हबीबगंज रेलवे स्टेशन को छोड़कर अन्य किसी भी स्टेशन का टेंडर तक नहीं हुआ है। इसमें दिल्ली के बिजवासन व आनंद विहार स्टेशनों को भी विश्वस्तरीय स्टेशन बनाना है।

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इसी तरह सेटेलाइट टर्मिनल के निर्माण की बात की गई थी। इस प्रोजेक्ट की रफ्तार भी समय से काफी पीछे है। मिशन रफ्तार के तहत ट्रेनों व मालगाड़ी की रफ्तार बढ़ाने की बातें खूब हुईं, लेकिन रफ्तार बढ़ने के बजाए घट ही रहे है।  रेलवे की अपनी यूनिवर्सिटी की योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी।

प्रभु ने वादा किया था कि कुलियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें सहायक का नाम दिया गया। उन्हें आतिथ्य की जानकारी दी जाएगी, लेकिन आज भी सहायकों से रेलवे स्टेशन पर यात्री परेशान हैं। दिल्ली-कानपुर, दिल्ली-चंडीगढ़ समेत अन्य रूट पर सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने की बात की गई थी, लेकिन सिर्फ दिल्ली-आगरा रूट पर इस तरह की ट्रेन चल पाई।

वादे जो नहीं हुए पूरे
चार तरह की नई ट्रेन में महज हमसफर ही ट्रैक पर उतर पाई
बेहतर खान-पान के लिए 10 बेस किचन बनने थे, अधूरा रह गया प्लान
स्टेशन डेवलपमेंट अथॉरिटी के बावजूद स्टेशनों का विकास नहीं हुआ
मिशन रफ्तार के पैमाने पर भी नहीं खरा उतर सका रेलवे
 रेलवे की अपनी यूनिवर्सिटी की योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी

 
 

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