पिता चलाते थे एक दुकान, बेटी ने संभाली देश की कमान

New Delhi आयरन लेडी के नाम से मशहूर मार्गरेट थैचर उस वक्त ब्रिटिश पार्लियामेंट में चुनकर गईं, जब महिलाओं के लिए ऐसा करना असंभव था। साल 1959 में जब पहली बार पार्लियामेंट के लिए चुनी गईं तो 605 सदस्यों के हाउस में अकेली महिला थीं।पिता चलाते थे एक दुकान, बेटी ने संभाली देश की कमानयह भी पढ़े:> IPL: 2017 RCB के सेलिब्रेशन में विराट अनुष्का के साथ पहुंचे फोटो हुई वायरल

4 मई, 1979 यूके के इतिहास में बदलाव का दिन था। बदलाव था एक आयरन लेडी के आने का। पहली बार ब्रिटेन ने एक महिला प्रधानमंत्री को अपनी प्रशासनिक बागडोर सौंपी। यूके पार्लियामेंट में पहली महिला सदस्य और विपक्ष की पहली महिला नेता थीं मार्गरेट हिल्डा थैचर।

थैचर अपने प्रधानमंत्री काल में साहसिक फैसले लेने के लिए मशहूर थीं। मारग्रेट ने जितनी भी पॉलिसीज लागू करवाईं। वे सब थैचेरिज्म के नाम से जाने जाते हैं। थैचर यूनाइटेड किंगडम में आयरन लेडी के नाम से मशहूर हुईं।

 

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शुरू में जब वह पार्लियामेंट में आईं तो उन्हें कोई बोलने नहीं देता था। फिर भी वह अपनी बात कहकर ही दम लेती थीं। महिला सदस्य होने के कारण कोई उनके वक्तव्यों, सुझावों को महत्व नहीं देता था, पर वह अपनी बात पर डटी रहती थीं। 1970 में वह कंजरवेटिव पार्टी की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री और कंजरवेटिव पार्टी के लीडर एडवर्ड हीथ के कैबिनेट में एजुकेशन सेक्रेटरी रहीं।

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लेकिन वही कंजरवेटिव पार्टी जब 1974 के चुनाव में हारी, तो मिसेस थैचर एडवर्ड हीथ की लीडरशिप को चुनौती देने में ज़रा भी नहीं हिचकीं। वह हीथ के खिलाफ पार्टी की लीडरशिप के लिए लड़ीं और जीतीं।

उनकी भाषण शैली कमाल की थी। जल्द ही वो बोलते और निर्णय लेने वाली महिला के तौर पर जानी जाने लगी। साल 1982 के फाकलैंड युद्ध के लिए विपक्ष और कैबिनेट के कई सदस्य भी युद्ध के लिए राजी नहीं थे। जीत की संभावनाएं नहीं के बराबर बताई जा रही थीं पर मारग्रेट थैचर ने फिर भी युद्ध के लिए सेना भेजी और ब्रिटेन आश्चर्यजनक रूप से यह युद्ध जीत गया।

 

ब्रिटेन में कभी महिलाओं को राजनीति में आने से बाहर रखा जाता था। पुरुष राजनीतिज्ञों का महिलाओं के लिए ऐसा ही मत था। उनका मानना था कि महिलाएं कमोज और भावुक होती हैं। जब थैचर पार्लियामेंट में बोलती थीं तो लोग उन पर हंसते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 1966 में कंजर्वेटिव पार्टी के लीडर को हराकर वह पहली महिला विपक्ष नेता बनीं। यूनाइटेड किंगडम में तब प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं की इतनी सशक्त भागीदारी नहीं होती थी। मारग्रेट थैचर ने महिलाओं के लिए कमजोर प्रशासनिक क्षमताओं की धारणाओं को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।

 

 ब्रिटेन की संसद से लेकर, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक हर जगह मारग्रेट थैचर अपने दबंग निर्णयों के लिए जानी गईं। उनके प्रधानमंत्री बनने के समय ब्रिटेन इंफ्लेशन से जूझ रहा था। मारग्रेट ने इसके लिए कई काम किए, दशा सुधरी पर बेरोजगारी बढ़ने लगी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आखिरकार इसे सुधार सकने में भी सफल रहीं।

मारग्रेट थैचर एक साधारण परिवार से सम्बन्ध रखती थीं। उनके पिता एक ग्रॉसरी शॉप चलाते थे पर स्थानीय राजनीति में भी उनकी कुछ भागीदारी थी। पिता के लिए मेयर पद के लिए प्रचार का काम करते हुए राजनीति में दिलचस्पी पैदा हुई। राजनीति में अगर कोई उनका पहला गुरु था तो वह उनके पिता ही थे जिनसे इस विषय पर वह अक्सर चर्चा करती थीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप पर केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन करने से पहले वह इसके लिए ठुकरा दी गयी थीं। आखिरकार वेटिंग लिस्ट में नाम क्लीयर होने के बाद मारग्रेट ने वहीं से ग्रेजुएशन किया। बाद में लॉ की पढाई की और बिजनेसमैन पति डेनिस थैचर से शादी के बाद पॉलिटिक्स में आने का सपना पूरा किया।
मारग्रेट थैचर जब पार्लियामेंट में आईं तो सदन में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 4 फीसदी थी। 1987 के जनरल इलेक्शन में पहली बार महिलाओं की यह भागीदारी बढ़नी शुरू हुई। तीसरी बार सत्ता में आने के बाद मारग्रेट ने इस पर भी काम किया और 1992 तक यह 9 फीसदी और 1997 तक इससे दोगुना होकर 18 प्रतिशत हो गई।

अपने प्रधानमंत्री काल में वह अकेली साइंस ग्रैजुएट प्रधानमंत्री थीं। थैचर अपने स्कूल में पढाई के साथ एक्स्ट्रा एक्टिविटीज में अव्वल मानी जाती थीं। पियानो बजाना, हॉकी खेलना, स्वीमिंग, घूमना, कविताएँ पढ़ना जिसका पहला शौक हो वह देश की राजनीति में इतना बड़ा बदलाव ला सकती है, ऐसा किसी ने सोचा भी न होगा पर मारग्रेट ने कर दिखाया। जो कहते हैं विपरीत परिस्थितियों से ही कोई आगे बढ़ता है मारग्रेट ने उसे सही साबित कर दिखाया।

 

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