ये है पीएम मोदी के अफसरों के लिए बुरी खबर, कुछ भी करने से पहले 100 बार सोचेंगे क्योकि…

# सीबीआई की स्पेशल अदालत ने 22 मई को पूर्व कोयला सेक्रेटरी एच सी गुप्ता और दो अन्य सीनियर अफसरों के एस क्रोफा और के सी सामरिया को दो साल कैद की सजा सुना दी.ये है पीएम मोदी के अफसरों के लिए बुरी खबर, कुछ भी करने से पहले 100 बार सोचेंगे क्योकि...# गुप्ता नवंबर 2005 से दिसंबर 2008 तक अपने पद पर थे. इसी बीच इस कंपनी ने अपनी क्षमता के बारे में झूठ बोला था. तो गुप्ता सहित बाकी दोनों अफसरों को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया. सीबीआई के मुताबिक गुप्ता ने पीएम मनमोहन सिंह को अंधेरे में रखा.

# तीनों अफसरों को 2008 में मध्य प्रदेश के एक कोल ब्लॉक गलत ढंग से कमल स्पंज स्टील ऐंड पावर लिमिटेड को आवंटित करने का आरोप था. कंपनी पर भी जुर्माना लगा है और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर को जेल भेज दिया गया.

# कोलगेट 2012 में सीएजी की रिपोर्ट के बाद पता चला कि कोल ब्लॉक के मनमाने आवंटन के बाद कंपनियों को 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपये का फायदा हुआ, जो सरकार के लिए घाटा था. ऐसे कुल 53 मामले दर्ज हुए हैं. इसमें कई और लोगों की गिरफ्तारी की आशंका है. 2 जी स्पेक्ट्रम का घोटाला भी ऐसे ही अंजाम तक पहुंच सकता है.

मोदी के नजदीकी अफसर भी इस फैसले से घबराये हुए हैं

पहली नजर में ये एक आम फैसला था. पर पूरी अफसरशाही जमात इसके बाद सकते में आ गई. गुप्ता 1971 बैच के यूपी काडर के आईएएस अफसर हैं जिनको ईमानदारी की वजह से इज्जत की नजरों से देखा जाता है. उन्होंने पैसे भी ज्यादा नहीं कमाये हैं. वो अपने लिए कोई बड़ा वकील भी नहीं कर पाए.

गुप्ता के ही बैच के आईएएस पूर्व इलेक्शन कमिश्नर एस वाई कुरैशी कहते हैं कि ये सजा दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे फैसले अफसरों को डिसीजन मेकिंग में हतोत्साहित करेंगे.

बाकी अफसरों ने भी कहना शुरू किया कि 1988 में बने इस भ्रष्टाचार निरोधक कानून में बदलाव आना चाहिए. क्योंकि 1991 के आर्थिक सुधारों से पहले ही ये कानून बना था. ये कानून बहुत क्लियर नहीं है. इसमें धारा 13(1) डी बेहद विवादास्पद है, इसके मुताबिक:

1. एक पब्लिक सर्वेंट भ्रष्टाचार का दोषी है अगर वह भ्रष्ट या गैरकानूनी साधनों से खुद के लिए या किसी और के लिए कोई भी महंगी चीज या पैसा से जुड़ा फायदा हासिल करता है.

2. या वह पब्लिक सर्वेंट के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ऊपर लिखे काम करता है.

3. या फिर वह इस पद का इस्तेमाल करके सबके हित के बजाय किसी और के लिए फायदा हासिल करता है.

इससे पता नहीं चलता कि पब्लिक सर्वेंट को कहां-कहां धरा जा सकता है. पीएम मोदी के बनाये नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत कहते हैं कि गुप्ता का जेल जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. यह एक सच्चे और ईमानदार शख्स के फाइल संभालने की दुखद कहानी है. आप कोई भी काम करते हैं तो सैकड़ों लोगों को फायदा होता ही है. ऐसे फैसले तो लिए ही जाते हैं. कानून में बदलाव जरूरी है.

पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी नरेश चंद्रा कहते हैं कि गुप्ता को एक घातक सिद्धांत के आधार पर दोषी ठहराया गया हो सकता है. मुमकिन है कि गुप्ता ने हर दस्तावेज नहीं देखा होगा. क्या जज इस बात की जांच कर सकता है कि कोर्ट में आए तमाम एफिडेविट सही हैं? अगर बदलाव नहीं हुआ तो कई और सचिव जेल जाएंगे.

अफसरों के सामने ऐसी मुश्किल कि वो कुछ करने से पहले सौ बार सोचेंगे

ये तय नहीं हो पा रहा है कि ये गुप्ता का प्रशासनिक फैसला था या जान-बूझकर की गई गलती. क्योंकि ये रोजमर्रा के फैसले हैं. अगर फैसला माना जाए तो इसे कोर्ट की बजाय विभागीय कार्रवाई के अंतर्गत लाया जा सकता है. अफसरों के मुताबिक इसे आपराधिकता से जोड़ने से अफसरों में डर आ जाएगा. कानून का मतलब ये नहीं होता कि जेल भेजना है. बल्कि ये सिस्टम को सही बनाने के लिए होता है. कई अफसर ये भी कहते हैं कि फायदा लेने वाले फ्री हैं और ईमानदार अफसर जेल जा रहे हैं.

पीएम मोदी भ्रष्टाचार को लेकर काफी बातें कह चुके हैं. ऐसे में इस कानून में सुधार करना या ईमानदार अफसरों को देखते हुए कानून बदलना उनके लिए तलवार पर चलने जैसा है. पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी टीएसआर सुब्रमनियम बताते हैं कि गुप्ता ईमानदार थे, लेकिन निश्चित रूप से उन्होंने लापरवाही की है. लूट हो रही थी तो उनकी आंखें बंद थीं. सिर्फ आर्थिक रूप से ईमानदार होना काफी नहीं, बल्कि बौद्धिक रूप से भी ईमानदार होना पड़ेगा.

पीएम मोदी के लिए ये मुश्किल समय होनेवाला है. क्योंकि वो अफसरों से डायरेक्ट बात करते हैं. उनसे फीडबैक लेते हैं. काम जल्दी करवाते हैं. पर इस सजा के बाद अफसर हिचक भी सकते हैं. वो मामला डिले कर सकते हैं.

इंडिया टुडे के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने बताया है कि जल्द ही कैबिनेट सेक्रेटरी पी के सिन्हा पीएमओ के अधिकारियों के साथ मिलकर कानून में सुधार पर बात करने वाले हैं.

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