पुलवामा हमलाः पुलिसकर्मी का बेटा निकला, मारा गया फिदायीन आतंकी…

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के लेथपोरा इलाके में सीआरपीएफ कैंप पर हुए फिदायीन हमले में मारे गये तीनों आतंकियों में से एक की उम्र मात्र 16 साल बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक आतंकी पुलवामा जिले के त्राल का ही स्थानीय निवासी था और उसके पिता पेशे से पुलिसकर्मी हैं जो कि श्रीनगर में ही तैनात हैं। पुलवामा हमलाः पुलिसकर्मी का बेटा निकला, मारा गया फिदायीन आतंकी...

आतंकी तीन महीने पहले ही आतंकी संगठन से जुड़ा था। घाटी में पहली बार फिदायीन हमले में स्थानीय आतंकी शामिल रहे हैं। मारे गए दोनों आतंकियों में एक पुलवामा तथा दूसरा त्राल का था। इससे पहले के हमलों में पाक आतंकियों का हाथ रहा है।

अब तक के ट्रेंड में आतंकी घुसपैठ करने के बाद फिदायीन हमलों को अंजाम देते रहे हैं। गौरतलब है कि रविवार को पुलवामा के  सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर पर आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के फिदायीन हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए।

जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया। करीब 36 घंटे चली मुठभेड़ में तीन जवानों के भी घायल होने की खबर है। रविवार सुबह करीब 2 बजे आतंकियों का दल पुलवामा के लेथपोरा स्थित 185 सीआरपीएफ बटालियन के ट्रेनिंग सेंटर में घुस गया।

घुसते ही आतंकियों ने पहले ग्रेनेड फेंका और इसके बाद ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। इसमें तीन जवान घायल हो गए। बाद में इन जवानों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। गोलियां बरसाते हुए आतंकी सेंटर की एक इमारत में जाकर छुप गए और गोलीबारी करने लगे। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को ढेर करने में सफलता हासिल की। 

युवाओं के आतंकवाद में शामिल होने में आई कमी

डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने कहा कि इस वर्ष ऑपरेशन ऑल ऑउट शुरू किए जाने के बाद घाटी में युवाओं के आतंकवाद में शामिल होने में काफी कमी आई है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल आतंकियों का सफाया करना ही नहीं है, बल्कि उनका दिल जीतकर मुख्यधारा में शामिल करना है। 

पत्रकारों से बात करते हुए डीजीपी ने कहा कि ऑपरेशन ऑल ऑउट का एक उद्देश्य यह भी है जिन युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता छोड़ा है उनकी बेहतर काउंसिलिंग की जाए। उन्हें मुख्यधारा में लाकर पैरों पर खड़ा किया जाए। इसके लिए उन्हें बेहतर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

इसके साथ ही मुठभेड़ के दौरान स्थानीय युवाओं से समर्पण करने की अपील भी की जा रही है ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशहाली से रह सकें। इसके लिए उन्हें कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घाटी में युवाओं के आतंकी संगठनों का दामन थामने की घटना में कमी आई है।

उम्मीद है कि भविष्य में इसमें और अधिक सुधार होगा। सुरक्षा बल अपने में सुधार लाने वालों को मौका दे रही है क्योंकि वे अपने ही बच्चे हैं। उन्हें एक मौका दिए जाने में कोई हर्ज नहीं है। उम्मीद है कि घाटी में जल्द ही शांति बहाल होगी क्योंकि यहां के ज्यादातर लोग शांति चाहते हैं।

वर्ष 2016 की तुलना में स्थितियां काफी हद तक बेहतर हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 206 आतंकियों को मार गिराया गया। इसमें 85 स्थानीय और 121 विदेशी थे। आतंकवाद के दलदल से 75 युवाओं को निकाला गया। उन्होंने कहा कि शांति के दुश्मनों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। 

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