पूर्व डिप्लोमैट माधुरी गुप्ता को 3 साल की जेल, PAK को दी थीं खुफिया सूचनाएं

दिल्ली की पटिलाया हाउस कोर्ट ने पूर्व डिप्लोमैट माधुरी गुप्ता को पाकिस्तान में नियुक्ति के दौरान ISI को भारत की खुफिया जानकारियां देने के जुर्म में 3 साल की सजा सुनाई है. माधुरी गुप्ता को कोर्ट ने इस केस में अधिकतम सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने सजा सुनाते हुए माना कि वह पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में अति संवदेनशील पद पर पदस्थापित थीं.दिल्ली की पटिलाया हाउस कोर्ट ने पूर्व डिप्लोमैट माधुरी गुप्ता को पाकिस्तान में नियुक्ति के दौरान ISI को भारत की खुफिया जानकारियां देने के जुर्म में 3 साल की सजा सुनाई है. माधुरी गुप्ता को कोर्ट ने इस केस में अधिकतम सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने सजा सुनाते हुए माना कि वह पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में अति संवदेनशील पद पर पदस्थापित थीं.  माधुरी गुप्ता को शुक्रवार को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 और 5 तथा भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया था. हालांकि उन्हें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की सख्त धारा 3(1)(भाग-1) से दोषमुक्त करार दिया गया है. इस धारा के तहत अधिकतम 14 साल की सजा का प्रावधान है.  अदालत ने माधुरी गुप्ता के खिलाफ सजा सुनाते हुए कहा कि निस्संदेह, उनकी कद के व्यक्ति से यह उम्मीद थी कि वह किसी साधारण नागरिक से अधिक जिम्मेदारी से काम करें, क्योंकि वह अत्यंत भरोसे के पद पर थीं, लेकिन उनके कार्य से देश की छवि खराब हुई है और देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ.  अदालत ने हालांकि इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए उन्हें 25,000 रुपये का बांड और इतने ही रुपये की जमानत राशि पर जमानत दे दी है. माधुरी गुप्ता पहले ही 21 महीने की सजा काट चुकी हैं.  माधुरी इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव (प्रेस और सूचना) के पद पर नियुक्त थीं, जब उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को भारत की गुप्त जानकारियां देने के आरोप में 22 अप्रैल 2010 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था. इसके तत्काल बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था.  माधुरी गुप्ता पर पाकिस्तानी अधिकारियों को गुप्त सूचना मुहैया कराने और आईएसआई के दो अधिकारियों मुबशर राजा राणा और जमशेद के संपर्क में रहने का आरोप था. जनवरी 2012 में दिल्ली की अदालत ने उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया था.  इस महिला राजनयिक पर विश्वास को ठेस पहुंचाने, आपराधिक साजिश और इस अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आरोप तय किए गए हैं. माधुरी पर मुकदमा 22 मार्च, 2012 से शुरू हुआ था. उन पर आरोप लगा था कि माधुरी ने कई गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान के अधिकारियों को दीं और वह आईएसआई के दो अधिकारियों , मुबशार रजा राणा और जमशेद के संपर्क में थीं.  जुलाई, 2010 में माधुरी के खिलाफ दायर आरोपपत्र में कहा गया था कि माधुरी के जमशेद के साथ संबंध थे और माधुरी ने उससे शादी करने की योजना बनाई थी.

माधुरी गुप्ता को शुक्रवार को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 और 5 तथा भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया था. हालांकि उन्हें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की सख्त धारा 3(1)(भाग-1) से दोषमुक्त करार दिया गया है. इस धारा के तहत अधिकतम 14 साल की सजा का प्रावधान है.

अदालत ने माधुरी गुप्ता के खिलाफ सजा सुनाते हुए कहा कि निस्संदेह, उनकी कद के व्यक्ति से यह उम्मीद थी कि वह किसी साधारण नागरिक से अधिक जिम्मेदारी से काम करें, क्योंकि वह अत्यंत भरोसे के पद पर थीं, लेकिन उनके कार्य से देश की छवि खराब हुई है और देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ.

अदालत ने हालांकि इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए उन्हें 25,000 रुपये का बांड और इतने ही रुपये की जमानत राशि पर जमानत दे दी है. माधुरी गुप्ता पहले ही 21 महीने की सजा काट चुकी हैं.

माधुरी इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव (प्रेस और सूचना) के पद पर नियुक्त थीं, जब उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को भारत की गुप्त जानकारियां देने के आरोप में 22 अप्रैल 2010 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था. इसके तत्काल बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था.

माधुरी गुप्ता पर पाकिस्तानी अधिकारियों को गुप्त सूचना मुहैया कराने और आईएसआई के दो अधिकारियों मुबशर राजा राणा और जमशेद के संपर्क में रहने का आरोप था. जनवरी 2012 में दिल्ली की अदालत ने उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया था.

इस महिला राजनयिक पर विश्वास को ठेस पहुंचाने, आपराधिक साजिश और इस अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आरोप तय किए गए हैं. माधुरी पर मुकदमा 22 मार्च, 2012 से शुरू हुआ था. उन पर आरोप लगा था कि माधुरी ने कई गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान के अधिकारियों को दीं और वह आईएसआई के दो अधिकारियों , मुबशार रजा राणा और जमशेद के संपर्क में थीं.

जुलाई, 2010 में माधुरी के खिलाफ दायर आरोपपत्र में कहा गया था कि माधुरी के जमशेद के साथ संबंध थे और माधुरी ने उससे शादी करने की योजना बनाई थी

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