पेट के सभी रोगों को दूर करते हैं ये आयुर्वेदिक नुस्खे

पेट की समस्‍या और औषधियां

पेट में गड़बड़ी होना आम बात है, इसके उपचार के लिए अच्‍छा ये है कि आप औषधियों का प्रयोग करें। कई औषधियां ऐसी हैं जिनका प्रयोग करके आप पेट की बीमारी को आसानी से दूर कर सकते हैं। आगे के स्‍लाइडशों में पेट के लिए प्रमुख औषधियों के बारे में जानिए। पेट के सभी रोगों को दूर करते हैं ये आयुर्वेदिक नुस्खे

तुलसी

तुलसी बहुत आसानी से उपलबध होने वाली औषधि है। 10 ग्राम तुलसी का रस पीने से पेट का दर्द और पेट में मरोड़ ठीक हो जाता है। तुलसी के पत्‍तों का काढ़ा बनाकर पीने से दस्‍त ठीक हो जाता है। तुलसी के नियमित सेवन करने से कब्‍ज की शिकायत नहीं होती है। तुलसी के 4 पत्‍तों का नियमित सेवन करने से पेट की बीमारियां दूर होती हैं।

त्रिफला

त्रिफला आयुर्वेद का अनमोल उपहार है। यह एक आयुर्वेदिक पारंपरिक दवा है जो रसायन या कायाकल्‍प के नाम से भी प्रसिद्ध है। त्रिफला तीन जड़ी – बूटियों का मिश्रण है – अमलकी (एमबलिका ऑफीसीनालिस), हरीतकी (टरमिनालिया छेबुला) और विभीतकी (टरमिनालिया बेलीरिका)। त्रिफला का 100 ग्राम चूर्ण और 60 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से पेट की सभी बीमारियां दूर होती हैं।

ग्‍वारपाठा

ग्‍वारपाठा के गूदे को पेट पर लेप करने से पेट नर्म होकर आंतों में जमा मल ढीला होकर निकल जाता है। इसके नियमित सेवन से पेट की गांठें गल जाती हैं। 5 चम्‍मच ग्‍वारपाठे का ताजा रस, 2 चम्‍मच शहद और आधे नींबू का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से सभी प्रकार के पेट के रोग ठीक हो जाते हैं।

बथुआ

बथुआ आमाशय को ताकत देता है, कब्ज की शिकायत को दूर करता है। बथुए की सब्जी दस्तावर होती है, कब्ज वालों को बथुए की सब्जी प्रतिदिन खाना चाहिए। इससे कब्‍ज दूर होती है और शरीर में ताकत आती है और स्फूर्ति बनी रहती है। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी पीएं, इससे पेट के हर प्रकार के रोग यकृत, तिल्ली, अजीर्ण, गैस, कृमि, दर्द आदि ठीक हो जाते हैं।

सोंठ

सूखी अदरक को सोंठ कहते हैं, पेट के रोग के लिए यह बहुत ही गुणकारी होता है। एक ग्राम पिसी हुई सोंठ, थोड़ी सी हींग और सेंधानमक पीसककर इसके चूर्ण को गरम पानी के साथ पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। सोंठ, हरीतकी, बहेड़ा और आमला बराबर मात्रा में लेकर पेस्‍ट बना लीजिए, इसे गाय के घी के साथ प्रयोग सुबह करने से पेट के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।

गिलोय

गिलोय (टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) की एक लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते के जैसे होते हैं। गैस, वात आदि में यह बहुत लाभकारी है। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है। गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है। गिलोय, पीपल, नीम 2-2 ग्राम मिलाकर पीस लीजिए, 250 मिली पानी में इसे डालकर इसे रात में रखिये, एक महीने तक सुबह इसके नियमित सेवन से पेट के सभी रोग दूर होते हैं।

अमरबेल

अमरबेल की पत्तियां और जड़ दोनों पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। अमर बेल और मुनक्कों को समान मात्रा में लेकर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। इस काढ़े को छानकर 3 चम्मच रोजाना सोते समय देने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं। अमरबेल को उबालकर पेट पर बांधने से डकार आना बंद हो जाता है। आकाश बेल का रस 500 मिलीलीटर या चूर्ण 1 ग्राम को मिश्री 1 किलोग्राम में मिलाकर धीमी आंच पर गर्म करके शर्बत तैयार कर लें। इसे सुबह-शाम करीब 2 ग्राम की मात्रा में उतना ही पानी मिलाकर सेवन करने से पेट में गैस और पेट दर्द की समस्‍या का निवारण होता है।

सौंफ

सौंफ हर घर में प्रयोग किया जाने वाला मसाला है। दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है। पेट में दर्द हो तो भुनी हुई सौंफ चबाकर खाएं, दर्द ठीक हो जाएगा। जो लोग कब्ज से परेशान हैं, उनको आधा ग्राम गुलकन्द और सौंफ मिलाकर दूध के साथ रात में सोते समय लेना चाहिए, इससे कब्ज दूर हो जाएगा। सौंफ खाने से लीवर ठीक रहता है, लिहाजा, पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है। यदि आपको खट्टी डकारें आ रही हों तो थोड़ी सी सौंफ पानी में उबालकर मिश्री डालकर पीजिए। दो-तीन बार प्रयोग करने से आराम मिल जाएगा।

अनन्नास

अनन्नास का पेड़ सड़कों के किनारे-किनारे पाए जाते हैं। अनन्नास का फल इसके बीच के हिस्से में लगता है। अनन्नास का ऊपरी भाग कांटेदार व कठोर होता है। अनन्नास का रस पेट के रोगों में लाभकारी है। अनन्नास की फांकें काटकर कालीमिर्च और सेंधा नमक के साथ भूनकर खाने से अजीर्ण में लाभ होता है। 6 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर अनन्नास के रस के साथ सुबह-शाम पिलाने से 3 दिनों में बच्चों के पेट के सभी कीड़े खत्म हो जायेंगे।

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