पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी बिल पास, समझिए आपके लिए इसके मायने

निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों को फायदा देने के इरादे से संसद में पेश किए गए पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी (संशोधन) बिल, 2017 को आज राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस बिल के पास हो जाने के बाद अब सरकार अब टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख कर पाएगी जो कि मौजूदा समय में पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए 10 लाख निर्धारित है। साथ ही इस बिल की मदद से अब केंद्र सरकार मैटरनिटी लीव की अवधि तय करने के लिए कार्यकारी आदेश भी पारित कर पाएगी।पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी बिल पास, समझिए आपके लिए इसके मायने

राज्य सभा, जो कि विभिन्न दलों के विरोध प्रदर्शनों के कारण पिछले 15 दिनों के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात करने की दिशा में नाकाम रही है, उसने आज बिना चर्चा के ग्रेच्युटी (संशोधन) भुगतान बिल को मंजूरी दे दी। यह बिल श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार की ओर से पेश किया गया जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले पिछले हफ्ते इस बिल को लोकसभा में मंजूरी मिल चुकी है।

बिल से क्या होगा फायदा?

इस बिल की मदद से अब सरकार कर मुक्त ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर पाएगी। अभी तक यह सीमा मात्र 10 लाख रुपए की है। ऐसा पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत होगा। 7वें वेतन आयोग के कार्यान्वयन के बाद, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी राशि की अधिकतम सीमा दोगुनी होकर 20 लाख कर दी गई है। यह सरकार को महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि तय करने की अनुमति भी देता है। मौजूदा समय में यह अवधि सिर्फ 12 सप्ताह है। इस बिल की मदद से सरकार अब मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) की अवधि को बढ़ाकर 26 हफ्ते कर सकती है।

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