पोस्टमार्टम में हत्या, फोरेंसिक जांच में निकला हादसा

किसी भी हादसे या हत्या होने पर उसकी हकीकत पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आती है पर इसमें जरा सी चूक पूरे केस को उलझा देती है। फोरेंसिक जांच में एक बार फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। फीलखाना में बंद फ्लैट में मिले कारोबारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट जिसमें हत्या की बात थी, फोरेंसिक रिपोर्ट में हादसा माना गया है। इसके आधार पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। बता दें, चार माह पहले संवासिनी गृह में संवासिनी की मौत और कचहरी के चैंबर में मिले अधिवक्ता के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की आशंका जताई गई थी लेकिन दोनों ही मौतें हादसा साबित हुईं।किसी भी हादसे या हत्या होने पर उसकी हकीकत पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आती है पर इसमें जरा सी चूक पूरे केस को उलझा देती है। फोरेंसिक जांच में एक बार फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। फीलखाना में बंद फ्लैट में मिले कारोबारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट जिसमें हत्या की बात थी, फोरेंसिक रिपोर्ट में हादसा माना गया है। इसके आधार पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। बता दें, चार माह पहले संवासिनी गृह में संवासिनी की मौत और कचहरी के चैंबर में मिले अधिवक्ता के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की आशंका जताई गई थी लेकिन दोनों ही मौतें हादसा साबित हुईं।    सिख दंगा पीड़ितों की स्टेटस रिपोर्ट पेश करे सरकार यह भी पढ़ें - - - - - - - - -  –– ADVERTISEMENT ––    ये था मामला  घटना फीलखाना के सवाई सिंह हाता की है। 17 जून को व्यापारी ज्ञान अग्रवाल का शव उनके बंद फ्लैट में फर्श पर पड़ा मिला था। रिश्तेदारों ने पड़ोसियों की मदद से रोशनदान का शीशा तोड़कर दरवाजा खोला था। फोरेंसिक जांच कराई तो फ्लैट में हत्या किए जाने के सबूत नहीं मिले। कमरे में आने जाने का कोई सबूत और व्यापारी के साथ कोई दुश्मनी सामने न आने पर पुलिस हादसा मान रही थी। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोटने की बात सामने आने पर हत्या का मामला दर्ज किया था। दोबारा जांच शुरू हुई लेकिन हत्या का सबूत नहीं मिला। पुलिस अधिकारियों ने स्वरूप नगर में संवासिनी व कचहरी में अधिवक्ता की मौत को लेकर पोस्टमार्टम की नजीर देते हुए रिपोर्ट पर एक्सपर्ट की राय मांगी। लखनऊ से स्टेट मेडिकोलीगल एक्सपर्ट विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. गयासुद्दीन खान टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने दोबारा पड़ताल कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच की तो घटना हादसा निकली। इंस्पेक्टर आशीष शुक्ला ने बताया कि फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट के अनुसार व्यापारी की मौत गिरने से हुई थी। मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है।   अखिलेश ने नहीं की सेक्युलर मोर्चा पर कोई टिप्पणी यह भी पढ़ें - - - - - - - - -  कहां हुई पोस्टमार्टम में चूक  रिपोर्ट के अनुसार व्यापारी को हाई ब्लडप्रेशर की बीमारी थी। अचानक चक्कर आने से वह जमीन पर मुंह के बल गिरे और हायड बोन (गले की हड्डी) टूट गई। सांस की नली चोक होने से उनकी मौत हुई। वहीं हड्डी नली में घुसने से खून भी निकला। गले पर कोई निशान नहीं थे। जानकारों के मुताबिक पोस्टमार्टम में डॉक्टर ने पुलिस के पंचनामा रिपोर्ट और घटना की परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम करने वालों के भरोसे पूरी रिपोर्ट तैयार होती है। डॉक्टर शव को हाथ तक नहीं लगाते और दूर खड़े होकर दिशा निर्देश देते रहते हैं।

ये था मामला

घटना फीलखाना के सवाई सिंह हाता की है। 17 जून को व्यापारी ज्ञान अग्रवाल का शव उनके बंद फ्लैट में फर्श पर पड़ा मिला था। रिश्तेदारों ने पड़ोसियों की मदद से रोशनदान का शीशा तोड़कर दरवाजा खोला था। फोरेंसिक जांच कराई तो फ्लैट में हत्या किए जाने के सबूत नहीं मिले। कमरे में आने जाने का कोई सबूत और व्यापारी के साथ कोई दुश्मनी सामने न आने पर पुलिस हादसा मान रही थी। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोटने की बात सामने आने पर हत्या का मामला दर्ज किया था। दोबारा जांच शुरू हुई लेकिन हत्या का सबूत नहीं मिला। पुलिस अधिकारियों ने स्वरूप नगर में संवासिनी व कचहरी में अधिवक्ता की मौत को लेकर पोस्टमार्टम की नजीर देते हुए रिपोर्ट पर एक्सपर्ट की राय मांगी। लखनऊ से स्टेट मेडिकोलीगल एक्सपर्ट विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. गयासुद्दीन खान टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने दोबारा पड़ताल कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच की तो घटना हादसा निकली। इंस्पेक्टर आशीष शुक्ला ने बताया कि फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट के अनुसार व्यापारी की मौत गिरने से हुई थी। मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है।

कहां हुई पोस्टमार्टम में चूक

रिपोर्ट के अनुसार व्यापारी को हाई ब्लडप्रेशर की बीमारी थी। अचानक चक्कर आने से वह जमीन पर मुंह के बल गिरे और हायड बोन (गले की हड्डी) टूट गई। सांस की नली चोक होने से उनकी मौत हुई। वहीं हड्डी नली में घुसने से खून भी निकला। गले पर कोई निशान नहीं थे। जानकारों के मुताबिक पोस्टमार्टम में डॉक्टर ने पुलिस के पंचनामा रिपोर्ट और घटना की परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम करने वालों के भरोसे पूरी रिपोर्ट तैयार होती है। डॉक्टर शव को हाथ तक नहीं लगाते और दूर खड़े होकर दिशा निर्देश देते रहते हैं।

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