प्यूर्टोरिको में मारिया तूफान से गई थी 4600 की जान

पिछले साल सितंबर में अमेरिका के नियंत्रण वाले कैरेबियाई द्वीप प्यूर्टोरिको में आए मारिया तूफान के कारण 64 नहीं बल्कि 4,600 लोगों की जान गई थी। अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने शोध के बाद दावा किया है कि चक्रवाती तूफान से मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों से करीब 70 गुना अधिक थी।पिछले साल सितंबर में अमेरिका के नियंत्रण वाले कैरेबियाई द्वीप प्यूर्टोरिको में आए मारिया तूफान के कारण 64 नहीं बल्कि 4,600 लोगों की जान गई थी। अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने शोध के बाद दावा किया है कि चक्रवाती तूफान से मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों से करीब 70 गुना अधिक थी।  मारिया तूफान के दौरान 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं। इसे 90 सालों में अमेरिका का सबसे बड़ा तूफान बताया गया था। हार्वर्ड के शोधकर्ताओं का कहना है कि तूफान में बिजली आपूर्ति और यातायात व्यवस्था ठप होने से लोगों को सही समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं पहुंचाई जा सकी। एक तिहाई लोगों को इसी कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। इस शोध के लिए इस साल जनवरी से मार्च तक 3,000 घरों का सर्वे किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि तूफान का प्रभाव लंबे समय तक रहा इसलिए मरने वालों की संख्या का सटीक अनुमान लगाना कठिन है।  प्यूर्टोरिको प्रशासन ने भी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध के निष्कर्ष पर सहमति जताई है। प्रशासन का कहना है कि जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी को भी जान के नुकसान का पता लगाने के लिए अधिकृत किया गया है। दोनों शोधों के परिणाम से हमें भविष्य में आने वाली आपदा के लिए तैयारी करने और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी।

मारिया तूफान के दौरान 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं। इसे 90 सालों में अमेरिका का सबसे बड़ा तूफान बताया गया था। हार्वर्ड के शोधकर्ताओं का कहना है कि तूफान में बिजली आपूर्ति और यातायात व्यवस्था ठप होने से लोगों को सही समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं पहुंचाई जा सकी। एक तिहाई लोगों को इसी कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। इस शोध के लिए इस साल जनवरी से मार्च तक 3,000 घरों का सर्वे किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि तूफान का प्रभाव लंबे समय तक रहा इसलिए मरने वालों की संख्या का सटीक अनुमान लगाना कठिन है।

प्यूर्टोरिको प्रशासन ने भी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध के निष्कर्ष पर सहमति जताई है। प्रशासन का कहना है कि जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी को भी जान के नुकसान का पता लगाने के लिए अधिकृत किया गया है। दोनों शोधों के परिणाम से हमें भविष्य में आने वाली आपदा के लिए तैयारी करने और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी।

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