प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश मामले में पांच और गिरफ्तार

पुणे पुलिस ने आज देश के विभिन्न हिस्सों में छापा मारकर पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां इसी वर्ष जून में गिरफ्तार किए जा चुके पांच माओवादियों से पूछताछ के आधार पर की गई हैं। पुणे पुलिस ने आज देश के विभिन्न हिस्सों में छापा मारकर पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां इसी वर्ष जून में गिरफ्तार किए जा चुके पांच माओवादियों से पूछताछ के आधार पर की गई हैं।    प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश का खुलासा पुणे पुलिस को इसी वर्ष पुणे के भीमा कोरेगांव में हुए दंगे की जांच के दौरान हुआ था। उसी जांच की अगली कड़ी में आज पुणे पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और ठाणे के साथ-साथ फरीदाबाद, रांची, गोवा और हैदराबाद में भी छापे मारे। इस छापेमारी में हैदराबाद से वामपंथी रुझान के कवि वारावरा राव, फरीदाबाद से एडवोकेट सुधा भारद्वाज, दिल्ली से गौतम नवलखा, मुंबई से वेरनन गोंसाल्विस एवं ठाणे से एडवोकेट अरुण परेरा को गिरफ्तार किया है। गोवा में लेखक एवं प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े के घर पर उनकी अनुपस्थिति में छापा मारकर उनके कंप्यूटर एवं पेन ड्राइव की छानबीन की गई। रांची में ८३ वर्षीय वामपंथी बुद्धिजीवी स्टैन स्वामी के घर की तलाशी ली गई। हैदराबाद में वारावरा राव सहित उनसे संबंधित करीब आधा दर्जन लोगों के घरों पर छापे मारे गए। आज ठाणे से गिरफ्तार किए गए अरुण परेरा को एक बार २०१४ में भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उसका कार्यक्षेत्र नासिक एवं नागपुर बताया जाता है। उसने अपनी गिरफ्तारी को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।      शिवसेना और भाजपा में तनातनी, उद्धव बोले सरकार के गलत कामों का करेंगे विरोध यह भी पढ़ें इसी वर्ष एक जनवरी को शुरू हुए भीमा कोरेगांव दंगे की पूर्व संध्या ३१ दिसंबर की शाम पुणे के शनिवारवाड़ा के बाहर दलित कार्यकर्ताओं द्वारा एलगार परिषद का आयोजन किया गया था। एलगार परिषद के बाद महाराष्ट्र में तीन दिनों तक दंगों एवं महाराष्ट्र बंद का सिलसिला चलता रहा था। इसी दौरान मुंबई और कल्याण से कई माओवादी कार्यकर्ता पकड़े गए थे। जिनसे पूछताछ में भीमा कोरेगांव दंगे में माओवादी साजिश का पता चला था। इसके बाद एलगार परिषद में भाग लेनेवाले कुछ माओवादी कार्यकर्ताओं की छानबीन में पुणे पुलिस को एक पत्र मिला था, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश की ओर इशारा किया गया था। पुणे पुलिस ने इसी कड़ी में जून में मुंबई, दिल्ली और नागपुर से पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पहले गिरफ्तार किए गए उन पांचों शहरी माओवादियों से पूछताछ के आधार पर ही अब नई गिरफ्तारियां की गई हैं। जून में गिरफ्तार किए गए माओवादी कार्यकर्ता थे झ्र सुधीर धवले, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन एवं शोमा सेन।     लेकिन आज हुई गिरफ्तारियों ने एक विशेष रुझान के लोगों में खलबली मचा दी है। 31 दिसंबर, 2017 की शाम पुणे में एलगार परिषद के आयोजकों में से एक भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने आज हुई गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए इसे कुछ दिनों पहले हुई दाभोलकर हत्याकांड की गिरफ्तारियों पर परदा डालने की कार्यवाही करार दिया है। बता दें कि प्रकाश आंबेडकर डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र हैं। वह प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े के रिश्तेदार भी हैं, जिनके घर पर आज गोवा में पुणे पुलिस ने छापा मारा है। आंबेडकर का कहना है कि जून में की गई गिरफ्तारियों से पुलिस को अब तक कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। लेकिन अब सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को संतुलित करने के लिए कुछ और लोगों की गिरफ्तारियां की जा रही हैं। बुकर सम्मान विजेता लेखिका अरुंधती रॉय ने भी इन गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए कहा है कि ये गिरफ्तारियां बताती हैं कि देश किस ओर जा रहा है। हत्यारों का सम्मान हो रहा है, और न्याय की मांग करनेवाले एवं हिंदू बहुलतावाद के खिलाफ आवाज उठानेवालों को अपराधी साबित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश का खुलासा पुणे पुलिस को इसी वर्ष पुणे के भीमा कोरेगांव में हुए दंगे की जांच के दौरान हुआ था। उसी जांच की अगली कड़ी में आज पुणे पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और ठाणे के साथ-साथ फरीदाबाद, रांची, गोवा और हैदराबाद में भी छापे मारे। इस छापेमारी में हैदराबाद से वामपंथी रुझान के कवि वारावरा राव, फरीदाबाद से एडवोकेट सुधा भारद्वाज, दिल्ली से गौतम नवलखा, मुंबई से वेरनन गोंसाल्विस एवं ठाणे से एडवोकेट अरुण परेरा को गिरफ्तार किया है। गोवा में लेखक एवं प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े के घर पर उनकी अनुपस्थिति में छापा मारकर उनके कंप्यूटर एवं पेन ड्राइव की छानबीन की गई। रांची में ८३ वर्षीय वामपंथी बुद्धिजीवी स्टैन स्वामी के घर की तलाशी ली गई। हैदराबाद में वारावरा राव सहित उनसे संबंधित करीब आधा दर्जन लोगों के घरों पर छापे मारे गए। आज ठाणे से गिरफ्तार किए गए अरुण परेरा को एक बार २०१४ में भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उसका कार्यक्षेत्र नासिक एवं नागपुर बताया जाता है। उसने अपनी गिरफ्तारी को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है। 

इसी वर्ष एक जनवरी को शुरू हुए भीमा कोरेगांव दंगे की पूर्व संध्या ३१ दिसंबर की शाम पुणे के शनिवारवाड़ा के बाहर दलित कार्यकर्ताओं द्वारा एलगार परिषद का आयोजन किया गया था। एलगार परिषद के बाद महाराष्ट्र में तीन दिनों तक दंगों एवं महाराष्ट्र बंद का सिलसिला चलता रहा था। इसी दौरान मुंबई और कल्याण से कई माओवादी कार्यकर्ता पकड़े गए थे। जिनसे पूछताछ में भीमा कोरेगांव दंगे में माओवादी साजिश का पता चला था। इसके बाद एलगार परिषद में भाग लेनेवाले कुछ माओवादी कार्यकर्ताओं की छानबीन में पुणे पुलिस को एक पत्र मिला था, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश की ओर इशारा किया गया था। पुणे पुलिस ने इसी कड़ी में जून में मुंबई, दिल्ली और नागपुर से पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पहले गिरफ्तार किए गए उन पांचों शहरी माओवादियों से पूछताछ के आधार पर ही अब नई गिरफ्तारियां की गई हैं। जून में गिरफ्तार किए गए माओवादी कार्यकर्ता थे झ्र सुधीर धवले, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन एवं शोमा सेन।   

लेकिन आज हुई गिरफ्तारियों ने एक विशेष रुझान के लोगों में खलबली मचा दी है। 31 दिसंबर, 2017 की शाम पुणे में एलगार परिषद के आयोजकों में से एक भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने आज हुई गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए इसे कुछ दिनों पहले हुई दाभोलकर हत्याकांड की गिरफ्तारियों पर परदा डालने की कार्यवाही करार दिया है। बता दें कि प्रकाश आंबेडकर डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र हैं। वह प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े के रिश्तेदार भी हैं, जिनके घर पर आज गोवा में पुणे पुलिस ने छापा मारा है। आंबेडकर का कहना है कि जून में की गई गिरफ्तारियों से पुलिस को अब तक कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। लेकिन अब सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को संतुलित करने के लिए कुछ और लोगों की गिरफ्तारियां की जा रही हैं। बुकर सम्मान विजेता लेखिका अरुंधती रॉय ने भी इन गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए कहा है कि ये गिरफ्तारियां बताती हैं कि देश किस ओर जा रहा है। हत्यारों का सम्मान हो रहा है, और न्याय की मांग करनेवाले एवं हिंदू बहुलतावाद के खिलाफ आवाज उठानेवालों को अपराधी साबित किया जा रहा है।

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