प्रोटेम स्पीकर बोपैया से क्यों डरी हुई है कांग्रेस

प्रोटेम स्पीकर को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है.अब प्रोटेम स्पीकर भाजपा विधायक केजी बोपैया के द्वारा ही बहुमत परिक्षण कराया जाएगा. इस बात से कांग्रेस बेहद डरी हुई है .उसको आशंका है कि बोपैया अंतिम क्षणों में कोई खेल कर सकते हैं .पहले भी कई बार देश की राजनीति में स्पीकर की भूमिका बहुत अहम रही है.प्रोटेम स्पीकर को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है.अब प्रोटेम स्पीकर भाजपा विधायक केजी बोपैया के द्वारा ही बहुमत परिक्षण कराया जाएगा. इस बात से कांग्रेस बेहद डरी हुई है .उसको आशंका है कि बोपैया अंतिम क्षणों में कोई खेल कर सकते हैं .पहले भी कई बार देश की राजनीति में स्पीकर की भूमिका बहुत अहम रही है.    बता दें कि कर्नाटक विधान सभा में विधायकों को शपथ दिलाए जाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है. शाम 4 बजे बहुमत का परीक्षण किया जाएगा.लेकिन इसे लेकर कांग्रेस के मन में अतीत के कई निर्णयों से खौफ छाया हुआ है. पहले भी लोकसभा और विधानसभा के अंदर बहुमत का आंकड़ा स्पीकर के फैसलों के कारण बदल गया था.शिवराज पाटिल, केएच पांडियन, गोविंद सिंह कुंजवाल, धनीराम वर्मा या केसरीनाथ त्रिपाठी की स्पीकर के तौर पर भूमिका विवादों में रही थी.स्मरण रहे कि एक संसदीय समिति की 1970 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के आजाद होने के बाद 17 सालों में 542 बाद दलबदल हुआ है .इसलिए संसद ने दलबदल निरोधक कानून बनाया जिसमें अब दो तिहाई विधायकों के पाला बदलने को ही संवैधानिक माना गया है.    उल्लेखनीय है कि कांग्रेस को यह आशंका है कि येदियुरप्पा द्वारा शनिवार दोपहर को विधानसभा में पेश किए जाने वाले विश्वास प्रस्ताव को बोपैया ध्वनि मत से पारित करने के बाद बिना मतदान कराए विधानसभा को स्थगित कर सकते हैं.बाद में कोर्ट में इसे चुनौती देने और फैसला आने में लम्बा समय लगेगा. इस दौरान भाजपा को बहुमत जुटाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा. कांग्रेस को यही डर सता रहा है.

बता दें कि कर्नाटक विधान सभा में विधायकों को शपथ दिलाए जाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है. शाम 4 बजे बहुमत का परीक्षण किया जाएगा.लेकिन इसे लेकर कांग्रेस के मन में अतीत के कई निर्णयों से खौफ छाया हुआ है. पहले भी लोकसभा और विधानसभा के अंदर बहुमत का आंकड़ा स्पीकर के फैसलों के कारण बदल गया था.शिवराज पाटिल, केएच पांडियन, गोविंद सिंह कुंजवाल, धनीराम वर्मा या केसरीनाथ त्रिपाठी की स्पीकर के तौर पर भूमिका विवादों में रही थी.स्मरण रहे कि एक संसदीय समिति की 1970 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के आजाद होने के बाद 17 सालों में 542 बाद दलबदल हुआ है .इसलिए संसद ने दलबदल निरोधक कानून बनाया जिसमें अब दो तिहाई विधायकों के पाला बदलने को ही संवैधानिक माना गया है.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस को यह आशंका है कि येदियुरप्पा द्वारा शनिवार दोपहर को विधानसभा में पेश किए जाने वाले विश्वास प्रस्ताव को बोपैया ध्वनि मत से पारित करने के बाद बिना मतदान कराए विधानसभा को स्थगित कर सकते हैं.बाद में कोर्ट में इसे चुनौती देने और फैसला आने में लम्बा समय लगेगा. इस दौरान भाजपा को बहुमत जुटाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा. कांग्रेस को यही डर सता रहा है.

You May Also Like

English News