फिर हुआ बड़ा हादसा: एशिया की सबसे बड़ी ओपन सेंक्चयूरी में 3 मादा हिरणों की हुई मौत

एशिया की सबसे बड़ी ओपन सेंक्चयूरी में एक बार फिर बड़ा हादसा हुआ। तीन मादा हिरणों की मौत हो गई, जिस वजह से लोगों में भी काफी रोष है। सेंक्चयूरी के अंतर्गत आते गांव मेहराणा में खूंखार कुत्तों का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।फिर हुआ बड़ा हादसा: एशिया की सबसे बड़ी ओपन सेंक्चयूरी में 3 मादा हिरणों की हुई मौत
इन शिकारी कुत्तों के झुंड ने रविवार सुबह 3 मादा हिरणों को नोंच कर मार डाला। हमले में दो नीलगाय घायल हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे बिश्नोई समाज के लोगों ने मृत हिरणों को दफनाते हुए सरकार के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन शिकारी कुत्तों की समस्या को लेकर बिश्नोई समाज का एक शिष्टमंडल सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिलेगा।

अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के प्रांतीय अध्यक्ष आरडी बिश्नोई ने बताया कि उन्हें गांव मेहराना के पास कुत्तों के झुंड की ओर से कुछ हिरणों को मार गिराने की सूचना मिली। वह जब मौके पर पहुंचे तो 3 मादा हिरण कुत्तों की ओर से नोचे हुए पाए गए।

वहीं शनिवार रात में ही गांव रामपुरा और बिश्नपुरा में भी कुत्तों ने दो नीलगायों को घायल कर दिया है। उनका वन्य जीव चिकित्सक की ओर से इलाज किया जा रहा है।

लोगों की मदद से गांव के पास ही दफना दिया

घटना की सूचना मिलते ही जीव रक्षा विभाग के रेंज अधिकारी अशोक बिश्नोई, रुपांश कुमार, कुलवंत सिंह, मलकीत सिंह, विपन, महल सिंह, महीपाल और राजिन्द्र कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृत हिरणों को बिश्नोई समाज के लोगों की मदद से गांव के पास ही दफना दिया।

आरडी बिश्नोई ने प्रशासन से मांग की है कि सेंचुरी में बढ़ रहे खूंखार कुत्तों के आतंक का शीघ्र ही हल निकाला जाए। इस दौरान मौजूद वन्य जीव प्रेमियों ने बताया उनके गांव के पास ही सेमनाले की बीते काफी समय से सफाई न होने से वह जलकुंभी से भरा हुआ है।  इसमें अक्सर हिरन और नीलगाय गिरकर मर जाते हैं। इसलिए प्रशासन शीघ्र इस सेमनाले की सफाई करवाए।

इसके अलावा क्षेत्र में लगी कोबरा तारों की चपेट में भी आने से आए दिन जीवों की मौत हो रही है। विभाग के अधिकारी अशोक बिश्नोई ने बताया कि हर माह इस क्षेत्र में खूंखार कुत्तों की ओर से घायल किए और मारे गए दुर्लभ वन्य जीवों की रिपोर्ट सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाती है। वहीं सरकार की ओर से इसका कोई हल नहीं निकाला जा रहा।

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