फीफा: माँ के लिए 23 की उम्र में फुटबाल को अलविदा कहा ईरान के मेसी ने

ईरान का मेसी जी हा. इसी नाम से जाना जाता है ईरान के फुटबाल खिलाड़ी सरदार अज़मौन को और आंकड़े इसके गवाह भी है. अज़मौन ने फीफा वर्ल्ड कप से पहले ईरान के लिए 33 मैचों में 23 गोल और वर्ल्ड कप लिए हुए क्वालीफाइंग मुकाबलों में ईरान के लिए सबसे ज़्यादा गोल कर अपने आप को साबित भी किया है. उन्होंने 14 मैचों में 11 गोल किए. वे वर्ल्ड कप में अपने देश के लिए गोल करने में कामयाब नहीं हो पाए.ईरान का मेसी जी हा. इसी नाम से जाना जाता है ईरान के फुटबाल खिलाड़ी सरदार अज़मौन को और आंकड़े इसके गवाह भी है. अज़मौन ने फीफा वर्ल्ड कप से पहले ईरान के लिए 33 मैचों में 23 गोल और वर्ल्ड कप लिए हुए क्वालीफाइंग मुकाबलों में ईरान के लिए सबसे ज़्यादा गोल कर अपने आप को साबित भी किया है. उन्होंने 14 मैचों में 11 गोल किए. वे वर्ल्ड कप में अपने देश के लिए गोल करने में कामयाब नहीं हो पाए.    मगर अब ये खिलाड़ी सन्यास ले रहा है महज 23  साल की उम्र में. ईरान अपने ग्रुप में स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को के बाद चौथे स्थान पर रहा और वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है. सरदार अज़मौन ने महज़ 23 की उम्र में संन्यास लेने का फैसला इससे हताश कर नहीं लिया है. दरअसल उनकी माँ की तबियत इसका मुख्य कारण है.    अब वो अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहने का मन बना चुके है. अज़मौन ने अपने फैसले को दर्दनाक बताते हुए कहा, "मैंने राष्ट्रीय टीम के लिए खेलकर सम्मानित महसूस किया और अपने अंतिम दिनों में मुझे गर्व होगा." अज़मौन ने कहा, "23 वर्षीय युवा खिलाड़ी के लिए यह एक महत्वपूर्ण और दर्दनाक निर्णय है जिसने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है."

मगर अब ये खिलाड़ी सन्यास ले रहा है महज 23  साल की उम्र में. ईरान अपने ग्रुप में स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को के बाद चौथे स्थान पर रहा और वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है. सरदार अज़मौन ने महज़ 23 की उम्र में संन्यास लेने का फैसला इससे हताश कर नहीं लिया है. दरअसल उनकी माँ की तबियत इसका मुख्य कारण है.

अब वो अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहने का मन बना चुके है. अज़मौन ने अपने फैसले को दर्दनाक बताते हुए कहा, “मैंने राष्ट्रीय टीम के लिए खेलकर सम्मानित महसूस किया और अपने अंतिम दिनों में मुझे गर्व होगा.” अज़मौन ने कहा, “23 वर्षीय युवा खिलाड़ी के लिए यह एक महत्वपूर्ण और दर्दनाक निर्णय है जिसने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है.”

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