फूल सी बेटी पर कोई कैसे ढ़ा सकता है ऐसे कहर, जान कर दिल दहल जाएगा, पढ़ें खबर

कोई पिता अपनी फूल की बेटी की यह हालत कर सकता है और उसे दाने-दाने को तरसा स‍कता है, यकीन नहीं होता। पत्‍थर दिल पिता ने 12 साल की बेटी की यह हालत कर दी कि उसका वजन महज 15 किलाे रह गया और वह बोल तक नहीं पाती। उसके आंखों की रोशनी भी जा सकती है। मां घर छोड़कर गई तो पत्थर दिल पिता ने लड़की को कमरे में बंद कर दिया। उसने एक महीने से अधिक समय से उसे खाना नहीं दिया। बच्ची मौत के मुहाने तक पहुंच गई लेकिन फिर भी पिता का दिल नहीं पसीजा।कोई पिता अपनी फूल की बेटी की यह हालत कर सकता है और उसे दाने-दाने को तरसा स‍कता है, यकीन नहीं होता। पत्‍थर दिल पिता ने 12 साल की बेटी की यह हालत कर दी कि उसका वजन महज 15 किलाे रह गया और वह बोल तक नहीं पाती। उसके आंखों की रोशनी भी जा सकती है। मां घर छोड़कर गई तो पत्थर दिल पिता ने लड़की को कमरे में बंद कर दिया। उसने एक महीने से अधिक समय से उसे खाना नहीं दिया। बच्ची मौत के मुहाने तक पहुंच गई लेकिन फिर भी पिता का दिल नहीं पसीजा।    मां घर छोड़ कर गई तो पिता हुआ पत्थर दिल,एक महीने से अधिक समय से खाना नहीं दिया था  बच्ची कुपोषण का शिकार हो चुकी है। उसकी आंखों की रोशनी कभी भी जा सकती है। पिता के चंगुल से छुड़ाकर समाजसेवी संस्था ने जब बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया तो खाना देख वह उस पर टूट पड़ी। यह दिल दहला देने वाला वाक्‍या अबोहर शहर का है।  कमरे में बंद कर रखा था निर्दयी पिता ने, 12 साल की लड़की का वजन हुआ महज 15 किलो   जानें एक मां की मजबूरी, डेढ़ साल की बेटी को अपनाने से किया इन्‍कार यह भी पढ़ें अबोहर के नई आबादी क्षेत्र के बड़ी पौड़ी मोहल्ले की गली नंबर एक में चिमनलाल अपनी 12 साल की बेटी और 9 साल बेटे के साथ रहता है। बेटी हिना आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। पत्नी निशा के घर छोड़कर चले जाने के बाद चिमनलाल ने बेटी का स्कूल जाना बंद करवा दिया। बिना मां के पिता ने बच्चे राम भरोसे छोड़ दिए। चिमनलाल एक कॉलेज की कैंटीन में काम करता है। वह सुबह काम पर जाते समय बच्ची को कमरे में बंद कर जाता। रात तक वह कमरे में भूखे-प्‍यासे पड़ी रहती थी। लौटने पर वह थोड़ा पानी वगैरह दे देता था।  यह भी पढ़ें: अब 'शून्य' से बाहर निकलने की जंग लड़ रहा योद्धा, खामोशी में बयां हो रही वीरता की कहानी   कभी सीवर साफ किया, झाड़ू लगाया, 45 की उम्र में इस शख्स के डांस की दीवानी है दुनिया यह भी पढ़ें नहीं देता था कुछ भी खाने को, अस्‍पताल में खाना देखते ही टूट पड़ी  बेटा सोनू स्कूल जाता है। घर पर कुछ खाने को कुछ नहीं होता था इसलिए वह बाहर ही पड़ोसियों के पास कुछ खा लेता था। पिता के डर से बहन की हालत के बारे में वह किसी को कुछ नहीं बताता था। इसी बीच जब लोगों को लड़की के बारे में पता चला तो किसी ने समाजसेवी संस्था नरसेवा नारायण सेवा को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद संस्‍था के पदाधिकारियों ने बच्ची को पिता की कैद से छुड़ाकर सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया।   पिता की मौत से परेशान युवती ने जहर खाकर जान दी यह भी पढ़ें   लड़की को अस्‍पताल में ले जाते लोग।   मृतक फौजी भाई का बहन ने हड़पा फंड, पति के मिलकर की धोखाधड़ी यह भी पढ़ें लड़की को जब अस्पताल में हल्का खाना दिया गया तो वह उस पर ऐसे टूट कर पड़ी जैसे पहली बार खाना खा रही हो। बच्ची कुछ बोल भी नहीं पा रही है। डॉक्टर अब धीरे-धीरे उसकी डाइट बढ़ाएंगे। इस घटना का पता चलने पर जिला बाल विकास विभाग के अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे।  हाथ की नाड़ी से नहीं निकला खून तो पैरों से लिया सैंपल  एक महीने से अधिक समय से खाना न मिलने से हिना के शरीर में विटामिन और प्रोटीन की इतनी कमी आ गई है कि शरीर में खून की बहुत कमी हो गई है। जांच के लिए जब खून के सैंपल लेने की बात आई तो हाथ की नसों से खून नहीं निकला। डॉक्टरों को पैरों से खून के सैंपल लेने पड़े। खून की कमी से हिना का शरीर हल्दी जैसा पीला हो गया है।  मेरी बच्ची, जिंदा रखूं या मार दूं, मेरी मर्जी  मोहल्ले के लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार चिमनलाल को समझाया कि वह लड़की को खाने को दिया करे। वह लोगों को यही जवाब देता है 'मेरी बच्ची है, मैं खाना दूं या न दूं, मारूं या जिंदा रखूं, तुम कौन होते हो पूछने वाले।'  आंखों का कॉर्निया हो चुका है खराब : डॉक्टर  बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर साहब राम का कहना है कि उन्होंने पहली बार ऐसा केस देखा है। प्रोटीन की कमी से बच्ची की आंखों का कॉर्निया खराब हो चुका है। आंखों की रोशनी वापस आएगी या नहीं कहना मुश्किल है। कॉर्निया का ट्रांसप्लांट भी करनापड़ सकता है।  पिता की मानसिक स्थिति की भी होगी जांच : संस्था  लड़की को अस्पताल पहुंचाने वाली संस्था नरसेवा नारायण सेवा के प्रधान राजू चराया का कहना है कि संस्था पिता की भी मानसिक स्थिति की जांच करवा रही है। वह पूरे मामले में ठीक से कुछ नहीं बता रहा है।

 मां घर छोड़ कर गई तो पिता हुआ पत्थर दिल,एक महीने से अधिक समय से खाना नहीं दिया था

बच्ची कुपोषण का शिकार हो चुकी है। उसकी आंखों की रोशनी कभी भी जा सकती है। पिता के चंगुल से छुड़ाकर समाजसेवी संस्था ने जब बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया तो खाना देख वह उस पर टूट पड़ी। यह दिल दहला देने वाला वाक्‍या अबोहर शहर का है।

कमरे में बंद कर रखा था निर्दयी पिता ने, 12 साल की लड़की का वजन हुआ महज 15 किलो

अबोहर के नई आबादी क्षेत्र के बड़ी पौड़ी मोहल्ले की गली नंबर एक में चिमनलाल अपनी 12 साल की बेटी और 9 साल बेटे के साथ रहता है। बेटी हिना आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। पत्नी निशा के घर छोड़कर चले जाने के बाद चिमनलाल ने बेटी का स्कूल जाना बंद करवा दिया। बिना मां के पिता ने बच्चे राम भरोसे छोड़ दिए। चिमनलाल एक कॉलेज की कैंटीन में काम करता है। वह सुबह काम पर जाते समय बच्ची को कमरे में बंद कर जाता। रात तक वह कमरे में भूखे-प्‍यासे पड़ी रहती थी। लौटने पर वह थोड़ा पानी वगैरह दे देता था।

नहीं देता था कुछ भी खाने को, अस्‍पताल में खाना देखते ही टूट पड़ी

बेटा सोनू स्कूल जाता है। घर पर कुछ खाने को कुछ नहीं होता था इसलिए वह बाहर ही पड़ोसियों के पास कुछ खा लेता था। पिता के डर से बहन की हालत के बारे में वह किसी को कुछ नहीं बताता था। इसी बीच जब लोगों को लड़की के बारे में पता चला तो किसी ने समाजसेवी संस्था नरसेवा नारायण सेवा को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद संस्‍था के पदाधिकारियों ने बच्ची को पिता की कैद से छुड़ाकर सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया।

लकी को जब अस्पताल में हल्का खाना दिया गया तो वह उस पर ऐसे टूट कर पड़ी जैसे पहली बार खाना खा रही हो। बच्ची कुछ बोल भी नहीं पा रही है। डॉक्टर अब धीरे-धीरे उसकी डाइट बढ़ाएंगे। इस घटना का पता चलने पर जिला बाल विकास विभाग के अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे।

हाथ की नाड़ी से नहीं निकला खून तो पैरों से लिया सैंपल

एक महीने से अधिक समय से खाना न मिलने से हिना के शरीर में विटामिन और प्रोटीन की इतनी कमी आ गई है कि शरीर में खून की बहुत कमी हो गई है। जांच के लिए जब खून के सैंपल लेने की बात आई तो हाथ की नसों से खून नहीं निकला। डॉक्टरों को पैरों से खून के सैंपल लेने पड़े। खून की कमी से हिना का शरीर हल्दी जैसा पीला हो गया है।

मेरी बच्ची, जिंदा रखूं या मार दूं, मेरी मर्जी

मोहल्ले के लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार चिमनलाल को समझाया कि वह लड़की को खाने को दिया करे। वह लोगों को यही जवाब देता है ‘मेरी बच्ची है, मैं खाना दूं या न दूं, मारूं या जिंदा रखूं, तुम कौन होते हो पूछने वाले।’

आंखों का कॉर्निया हो चुका है खराब : डॉक्टर

बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर साहब राम का कहना है कि उन्होंने पहली बार ऐसा केस देखा है। प्रोटीन की कमी से बच्ची की आंखों का कॉर्निया खराब हो चुका है। आंखों की रोशनी वापस आएगी या नहीं कहना मुश्किल है। कॉर्निया का ट्रांसप्लांट भी करनापड़ सकता है।

पिता की मानसिक स्थिति की भी होगी जांच : संस्था

लड़की को अस्पताल पहुंचाने वाली संस्था नरसेवा नारायण सेवा के प्रधान राजू चराया का कहना है कि संस्था पिता की भी मानसिक स्थिति की जांच करवा रही है। वह पूरे मामले में ठीक से कुछ नहीं बता रहा है।

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