बजट को लेकर मोदी सरकार पर शिवसेना ने किया करारा वार…

केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुवार को अपने इस कार्यकाल का आखिरी पूर्णकालिक बजट पेश किया. बजट को लेकर मोदी सरकार पर विपक्ष के तंज के साथ सहयोगी दल शिवसेना ने भी करारा वार किया है. शिवसेना ने सपना बेचकर सत्ता में आए केंद्र सरकार ने फिर एक बार सपनो की भुल-भुलैया को देश की जनता के सामने रख दिया है. किसानों से इतना प्यार है तो स्वामीनाथम आयोग की रपट लागू क्यों नहीं करते हो?बजट को लेकर मोदी सरकार पर शिवसेना ने किया करारा वार...

शिवसेना ने सामना में कहा है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली का भाषण ऐसा लग रहा था कि तनाव और दबाव तले दबा हुआ महसूस हो रहा था. पिछले 4 सालो से यह सरकार सत्ता में है, तबसे देश की अर्थव्यवस्था बड़ी सुस्त है, मानों कछुआ छाप अगरबत्ती हो गई है. उसका दबाव, बजट के भाषण में दिखाई दे रहा था.  

गुजरात चुनाव से सबक

आम बजट में किसानों ग्रामीण को तवज्जों देने पर शिवसेना ने तंज कसते हुए कहा कि गुजरात के ग्रामीण इलाको ने बीजेपी का जो हाल हुआ है, वो खतरे की घंटी थी. इसीलिए मोदी सरकार ने सावधान होकर इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों पर जोर देनी की कोशिश की है.

‘कांग्रेस से ज्यादा किसानों में मोदी राज में आत्महत्या किया’

उन्होंने कहा कि मौजदा केंद्र सरकार ने अब तक के कार्यकाल में परिस्थिती बदली नहीं है. शिवसेना ने कहा, ‘कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आखिरी के 10 सालो मे जितने किसानों ने महाराष्ट्र समेत देशभर मे आत्महत्याए की थी, उससे अधिक आत्महत्याएं इस सरकार के सत्ता मे आने के बाद साढे 3 सालों मे हुई हैं.

शिवसेना ने कहा कि मोदी सरकार अगर वाकई किसानो के प्रति सचमुच स्नेह रखती है तो फिर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू क्यों नहीं करती है? सत्ता मे आने से पहले  घोषणा-पत्र मे दिए गए स्वामीनाथन आयोग को लागु करने का आश्वाशन आखिरी बजट में तो पुरा करने का मौका सरकार के पास था, पर ऐसा नहीं किया गया. शिवसेना ने कहा कि  कुल मिलाकर – केंद्रीय बजट का एक लाईन में विशलेषण कियाा जाए तो यह बजट – वही और फिर वही जैसा है. 

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