बजट 2017: 9 उम्मीदें जिन पर हो सकती हैं वित्त मंत्री के नजरें इनायत

आम बजट को पेश होने में कुछ ही दिन बचे हैं। नोटबंदी के बाद देश की आर्थिक वृद्धि पर असर, जीएसटी, नौकरी समेत कई ऐसे बिंदू हैं जो इस बार के बजट में खास होने वाले हैं।

बजट 2017: 9 उम्मीदें जिन पर हो सकती हैं वित्त मंत्री के नजरें इनायत

इस बार रेल बजट भी आम बजट के साथ ही पेश किया जाना है। 2017 बजट में कई तरह के बदलाव किए गए हैं। साथ ही कई नए एक्ट भी जोड़े जाने है, जिनका फायदा आम लोगों को मिल सके। जानते हैं उन प्रमुख बिंदुओं के बारे में जो इस बार के बजट में आम आदमी को प्रभावित कर सकते हैं। 

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8 नवंबर 2015 को सरकार ने अचानक से फैसला लेकर के पूरे देश में 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया था। सरकार के इस फैसले का विपक्षी दलों ने काफी विरोध किया था।

अब नोटबंदी के बाद, सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने और कैश ट्रांजेक्शन को कम करने के लिए बजट में घोषणा कर सकती है। ऐसा अनुमान है कि वित्त मंत्री कार्ड और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शन पर टैक्स छूट और इंसेंटिव का ऐलान कर सकते हैं।  कुछ एक्सपर्टस का मानना है कि वित्त मंत्री बैंकों से पैसे निकालने पर भी टैक्स लगा सकते हैं। 

 केंद्र सरकार की महत्तवाकांक्षी योजाना जीएसटी की अप्रैल 2017 में लागू होने की उम्मीदें कम दिख रही हैं। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली 2017 के बजट में जीएसटी लागू करने की अगली तिथि की  घोषणा कर सकते हैं। जीएसटी, जिसको देश के टैक्स स्ट्रक्चर में एक अहम बदलाव के रुप में माना जा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद देश भर में वस्तुओं पर एक टैक्स का लागू हो जाएगा जिससे देश में एक कॉमन नेशनल मार्केट का निर्माण होगा।
 जीएसटी के बाद, डायरेक्ट टैक्स बजट का मुख्य बिंदु होगा। उम्मीद है कि इन्कम टैक्स स्लैब और रेट को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली फिक्सड डिपॉजिट, इन्शयोरेंस प्रीमियम और 1.5 लाख से 2 लाख के म्युचुअल फंड में टैक्स ब्रेक को बढ़ा सकते हैं। सरकार लोगों को बढ़ावा दे रही है कि वे घर में कैश का स्टॉक करने के बजाए उसे बैंकिंग सिस्टम में लेकर आएं।  

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सरकार कॉर्पोरेट टैक्स रेट में 1.25-1.5 फीसदी की कटौती करके उसे  28.75-28.5 फीसदी के बीच में करने की घोषणा कर सकती है। 2015 के बजट में सरकार ने पहली बार इसके बारे में घोषणा की थी। सरकार ने अपने इस कदम से टैक्स नियमों में बदलाव का संकेत दे दिया था।

 इस बार के बजट में रेल बजट को भी समाहित किया गया है। सरकार पहली बार रेल बजट को आम बजट के साथ पेश कर रही है। इससे पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था। केंद्र सरकार ने इस प्रथा को तोड़ते हुए रेल बजट को आम बजट के साथ जोड़ दिया। संयुक्त बजट का मतलब है कि रेलवे को हर साल 10,000 करोड़ का बजट अलग से पेश नहीं करना पड़ेगा। लेकिन रेल यात्रियों को अब अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते है। रेल मंत्री रेल टिकट पर और सेस लगा सकते है जिससे राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के लिए फंड इक्कठा किया जा सके। 

 उम्मीद है कि बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली किसानों पर हुए नोटबंदी के दर्द को कम करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं। 8 नवंबर को लिए गए सरकार के नोटबंदी के फैसले के कारण, किसानों को फसल बोते समय बीज आदि खरीदने में काफी कठनाई का सामना करना पड़ा था। हालांकि सरकारी आकड़ों की माने तो, 2016 में पिछले सालों की मुकाबले ज्यादा फसल की बुआई हुई है। सरकार ने पहले से ही खरीफ और रबी की नई फसल पर मौजूदा कृषि ऋृण पर 60 दिनों की छूट दे रखी है।

 सरकार प्रधानमंत्री की योजना “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं लागू कर सकती है। सरकार चमड़ा, जेवर और ज्वैलरी जैसे श्रम प्रधान कामों को बढ़ाने के लिए टैक्स छूट की घोषणा कर सकती है। चीन की तरह ही देश में देशज वस्तुओं को ज्यादा महत्व देने के लिए सरकार, मेगा इंडस्ट्रियल सिटी की घोषणा कर सकती है। 

 विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए नई घोषणाएं की जा सकती है। इनमें एफडीआई, वेंचर कैपिटलिस्ट, प्राइवेट इक्विटी फर्म और ऐंजल इन्वेस्टर के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए घोषणा कर सकती है जिससे स्टार्ट अप और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। 

 2017 के आम बजट में स्टार्ट-अप के लिए भी अच्छी घोषणा होने का अनुमान है। वित्त मंत्री अरुण जेटली देश में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं का ऐलान कर सकते है जिनमें टैक्स छूट को तीन वर्ष से पांच साल तक बढ़ाना और इनको खोलने के लिए नियमों को सरल किया जाना शामिल है।   

 

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