बदरीनाथ में अपवित्र हो रही पापों का नाश करने वाली पवित्र कुर्मधारा

बदरीनाथ धाम में प्रह्लाद धारा, कुर्मधारा, भृगुधारा, उर्वशी धारा व इंद्रधारा का विशेष महत्व है। पुराणों में इन धाराओं को पंचधारा नाम से पुकारा गया है। मान्यता है कि इन पंच धाराओं में स्नान करने से मनुष्य जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त हो जाता है। लेकिन, विडंबना देखिए कि पंच धारा में प्रमुख कुर्मधारा खुद अपनी मुक्ति तलाश रही है। बदरीनाथ। देश-दुनिया से चारधाम की यात्रा पर बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों में पंच धाराओं के पवित्र जल के प्रति बड़ी आस्था होती है। पंच धाराओं में अहम कुर्मधारा में इन दिनों सीवर की गंदगी निकल रही है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं बल्कि चारधाम यात्रा को लेकर सरकार की संजीदा सोच पर भी सवाल उठ रहे हैं।   पंचधारा का धार्मिक महत्व  मान्यता है कि इन पांचों धाराओं में स्नान करने से मनुष्य के जीवन में पुण्य का उदय तो होता ही है, उसके पितरों का भी उद्धार हो जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी पंचधारा के जल का विशेष महत्व माना गया है। यह भी मान्यता है कि बदरीनाथ धाम की स्थापना के दौरान आद्य गुरु शंकराचार्य ने इन धाराओं के जल से स्नान किया था।   क्या कह रहे हैं जिम्मेदार  नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद शर्मा कहते हैं कि जलधारा में सीवर की गंदगी मिलने का मामला संज्ञान में है। इसे तत्काल ठीक कराने को कहा गया है। कुर्मधारा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है, इसलिए इसकी पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।   बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह बताते हैं कि इस जलधारा में गंदगी का प्रवाहित होना गंभीर मामला है। नगर पंचायत बदरीनाथ व गंगा प्रदूषण इकाई को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।   वहीं गंगा प्रदूषण इकार्इ की एई बबीता सिंह का कहना है कि स्थानीय लोगों ने पानी के साथ सीवरेज आने की शिकायत की थी। मैंने स्वयं इस संबंध में जोशीमठ के एसडीएम से चर्चा की है। गंगा प्रदूषण इकाई के बदरीनाथ में कार्य कर रहे ठेकेदार से मामले को दिखवाया जा रहा है।

देश-दुनिया से चारधाम की यात्रा पर बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों में इन धाराओं के पवित्र जल के प्रति बड़ी आस्था होती है। ऐसे में कुर्मधारा के जल में सीवर की गंदगी मिलने से न केवल श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं बल्कि चारधाम यात्रा को लेकर सरकार की संजीदा सोच पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। 

अन्य जल धाराओं की तरह कुर्मधारा भी नारायण पर्वत से निकलती है और बदरीनाथ मंदिर से लगे पुराने बाजार से होते हुए दो किमी का सफर तय कर अलकनंदा नदी में गिरती है। शास्त्रीय मान्यता होने कारण बदरीनाथ धाम आने वाले अधिकतर श्रद्धालु इस जलधारा में अवश्य स्नान करते हैं। इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों सहित यात्री भी इस जलधारा का पानी पीते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इस जलधारा के साथ सीवर की गंदगी बह रही है।

प्रशासन का कहना है कि जलधारा के पास से होकर गुजरने वाली सीवर लाइन संभवत: किसी स्थान पर लीक हो गई है। बहरहाल, इसे अब तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। 

बदरीनाथ। देश-दुनिया से चारधाम की यात्रा पर बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों में पंच धाराओं के पवित्र जल के प्रति बड़ी आस्था होती है। पंच धाराओं में अहम कुर्मधारा में इन दिनों सीवर की गंदगी निकल रही है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं बल्कि चारधाम यात्रा को लेकर सरकार की संजीदा सोच पर भी सवाल उठ रहे हैं। 

पंचधारा का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि इन पांचों धाराओं में स्नान करने से मनुष्य के जीवन में पुण्य का उदय तो होता ही है, उसके पितरों का भी उद्धार हो जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी पंचधारा के जल का विशेष महत्व माना गया है। यह भी मान्यता है कि बदरीनाथ धाम की स्थापना के दौरान आद्य गुरु शंकराचार्य ने इन धाराओं के जल से स्नान किया था। 

क्या कह रहे हैं जिम्मेदार

नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद शर्मा कहते हैं कि जलधारा में सीवर की गंदगी मिलने का मामला संज्ञान में है। इसे तत्काल ठीक कराने को कहा गया है। कुर्मधारा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है, इसलिए इसकी पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। 

बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह बताते हैं कि इस जलधारा में गंदगी का प्रवाहित होना गंभीर मामला है। नगर पंचायत बदरीनाथ व गंगा प्रदूषण इकाई को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है। 

वहीं गंगा प्रदूषण इकार्इ की एई बबीता सिंह का कहना है कि स्थानीय लोगों ने पानी के साथ सीवरेज आने की शिकायत की थी। मैंने स्वयं इस संबंध में जोशीमठ के एसडीएम से चर्चा की है। गंगा प्रदूषण इकाई के बदरीनाथ में कार्य कर रहे ठेकेदार से मामले को दिखवाया जा रहा है। 

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