बहन मायावती का साथ अभी भी निभा रहा काडर, निकाय चुनाव में BSP की जोरदार वापसी

बसपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में लगातार निराशाजनक प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए निकाय चुनाव में जोरदार वापसी की है। पार्टी ने अलीगढ़ के साथ मेरठ जैसे शहर के महापौर की कुर्सी पर कब्जा करने के साथ ही पार्षद की करीब 147 सीटों पर कब्जा जमाया है।बहन मायावती का साथ अभी भी निभा रहा काडर, निकाय चुनाव में BSP की जोरदार वापसीफिर एक पाकिस्तानी सरकार ने दिया बड़ा बयान, कहा- लानत है पाकिस्तानी आर्मी पर….

इसके अलावा नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी पार्टी ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे यह भी साफ हो गया है कि बसपा का काडर अभी भी पार्टी सुप्रीमो मायावती के साथ खड़ा है। 

2012 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2015-16 के पंचायत चुनाव में बसपा ने जरूर बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में इसका फायदा नहीं उठा पाई और तीसरे नंबर पर सिमट गई। नगर निकाय चुनाव अर्से बाद बसपा के लिए सुखद अहसास लेकर आए हैं।

पार्टी निकाय चुनाव में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए सत्ताधारी दल भाजपा के बाद नंबर दो की हैसियत में उभरी है। अलीगढ़ व मेरठ के महापौर पद जीतने के साथ ही पार्टी आगरा, झांसी व सहारनपुर में नंबर दो पर रही। सहारनपुर सीट काफी कम वोट केअंतर से जीतने से रह गई। फैजाबाद, गोरखपुर, गाजियाबाद व मथुरा में तीसरे नंबर पर रही। इस चुनाव में बसपा अपने कॉडर को संगठित करने में सफल रही है।

पार्टी ने नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है। पहली बार मैदान में उतरी बसपा के सिंबल पर 29 नगर पालिका परिषदों के अध्यक्ष, 262 नगर पालिका परिषदों के सदस्य, 45 नगर पंचायत अध्यक्ष और 217 नगर पंचायत सदस्य चुनाव जीतने में सफल हुए हैं।

सिंबल पर चुनाव लड़ना, प्रचार में न उतरना टर्निंग पॉइंट

बसपा सुप्रीमो मायावती का निकाय चुनाव सिंबल पर लड़ने का फैसला टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जानकार बताते हैं कि निकाय चुनाव की तैयारी पर अपना फोकस बढ़ाने और देश भर में चर्चा में बने रहने के लिहाज से मायावती का राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा बेहतर रणनीति साबित हुई।

उन्होंने निकाय चुनाव के पहले ही प्रमुख शहरों में रैलियां कर अपनी बात पहुंचा दी और जातीय-सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर प्रत्याशियों के चयन में पूरा ध्यान लगाया। निकाय चुनाव को लेकर पार्टी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि नगर क्षेत्रों में शून्य के स्तर पर खड़े संगठन को चुनाव से पहले हर स्तर पर गठित कराया।

रणनीति के तहत न तो मायावती खुद कहीं प्रचार के लिए र्गईं और न ही सेकेंड लाइन का कोई प्रमुख नेता निकाय चुनाव में नजर आया। दूसरी ओर सपा के बड़े नेता भी मैदान में नहीं उतरे। इसका असर ये हुआ कि भाजपा विरोधी मतदाता को जहां बसपा प्रत्याशी मुफीद नजर आए, साथ खड़े होने में कोई मुश्किल नहीं हुई। बसपा पिछले चुनाव भले हारी लेकिन वोट प्रतिशत में कभी कमी नहीं आई।

बसपा का प्रदर्शन
महापौर जीते-2, पार्षद-147
मेरठ – सुनीता वर्मा और अलीगढ़- मुहम्मद फुरकान
नगर पालिका अध्यक्ष : 29, नगर पालिका परिषद सदस्य-262
नगर  पंचायत अध्यक्ष : 45, नगर पंचायत सदस्य- 217

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