बहुत जल्द मिलेगा जम्मू-कश्मीर को नया राज्यपाल

जम्मू, जागरण ब्यूरो। जम्मू-कश्मीर के लिए बहुत जल्द नए राज्यपाल की नियुक्ति हो सकती है। नए नामों पर मंथन तेज हो गया है और माना जा रहा है कि कमान किसी ऐसे नौकरशाह या फिर राजनीतिक व्यक्ति के हाथ होगी जो आंतरिक अशांति पर लगाम लगाने के साथ-साथ राजनीतिक हल ढूढने में भी सफल हो।जम्मू, जागरण ब्यूरो। जम्मू-कश्मीर के लिए बहुत जल्द नए राज्यपाल की नियुक्ति हो सकती है। नए नामों पर मंथन तेज हो गया है और माना जा रहा है कि कमान किसी ऐसे नौकरशाह या फिर राजनीतिक व्यक्ति के हाथ होगी जो आंतरिक अशांति पर लगाम लगाने के साथ-साथ राजनीतिक हल ढूढने में भी सफल हो।   फिलहाल इस दौड़ में प्रशाशक के साथ साथ एक दो उन नामों पर भी चर्चा हो रही है जो वर्तमान में किसी दूसरे राज्य के राज्यपाल हैं। संभव है इसकी घोषणा अगले एक दो दिनों में कर दी जाए।  अमरनाथ यात्रा खत्म हो चुकी है और शिद्दत से एक ऐसे राज्यपाल की जरूरत महसूस की जा रही है जो नई सोच के साथ राज्य के हर पहलू को देख सके। सवाल यह है कि जिस स्थिति में वहां सरकार भंग हुई है और जिस तरह राजनीतिक दल नए चुनाव की बात कर रहे है उसमें भरोसा किसी राजनीतिज्ञ पर जताया जाए या प्रशासक पर।  सूत्रों की मानी जाए तो राजनीतिज्ञ ज्यादा सटीक माने जा रहे है जो संवेदनशीलता के साथ फौज की जरूरत भी समझे और राजनीतिक वार्ता का माहौल भी बनाये। वैसे भी 1984 के बाद से वहां किसी राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नहीं बनाया गया है। लेकिन एक उलझन है।   जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल ने आज बुलाई सर्वदलीय बैठक, राज्य की स्थिति पर होगी चर्चा यह भी पढ़ें कोई भी राजनीतिक व्यक्ति भाजपा का प्रतिनिधि माना जायेगा और उसकी विफलता का पूरा ठीकरा सरकार और पार्टी पर फूटेगा। ध्यान रहे की कोई हल न निकलने की दशा में वहां भी लोकसभा के साथ चुनाव कराने से इनकार नही किया जा सकता है। ऐसे में प्रशासक भूमिका में आते है।  वार्ताकार के रूप में भी सरकार ने एक प्रशासक को ही नई नियुक्त किया था। बताते हैं कि पिछले दिनों सरकार में इस बाबत चर्चा हुई है। बहुत जल्द इसकी घोषणा हो सकती है।

फिलहाल इस दौड़ में प्रशाशक के साथ साथ एक दो उन नामों पर भी चर्चा हो रही है जो वर्तमान में किसी दूसरे राज्य के राज्यपाल हैं। संभव है इसकी घोषणा अगले एक दो दिनों में कर दी जाए।

अमरनाथ यात्रा खत्म हो चुकी है और शिद्दत से एक ऐसे राज्यपाल की जरूरत महसूस की जा रही है जो नई सोच के साथ राज्य के हर पहलू को देख सके। सवाल यह है कि जिस स्थिति में वहां सरकार भंग हुई है और जिस तरह राजनीतिक दल नए चुनाव की बात कर रहे है उसमें भरोसा किसी राजनीतिज्ञ पर जताया जाए या प्रशासक पर।

सूत्रों की मानी जाए तो राजनीतिज्ञ ज्यादा सटीक माने जा रहे है जो संवेदनशीलता के साथ फौज की जरूरत भी समझे और राजनीतिक वार्ता का माहौल भी बनाये। वैसे भी 1984 के बाद से वहां किसी राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नहीं बनाया गया है। लेकिन एक उलझन है।

कोई भी राजनीतिक व्यक्ति भाजपा का प्रतिनिधि माना जायेगा और उसकी विफलता का पूरा ठीकरा सरकार और पार्टी पर फूटेगा। ध्यान रहे की कोई हल न निकलने की दशा में वहां भी लोकसभा के साथ चुनाव कराने से इनकार नही किया जा सकता है। ऐसे में प्रशासक भूमिका में आते है।

वार्ताकार के रूप में भी सरकार ने एक प्रशासक को ही नई नियुक्त किया था। बताते हैं कि पिछले दिनों सरकार में इस बाबत चर्चा हुई है। बहुत जल्द इसकी घोषणा हो सकती है।

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