बाबा ने लालू यादव को दिया था श्राप, कहा- ‘तुझे घमंड है कि तू बहुत बड़ा पुरोधा है। तू मिट्टी में मिल जाएगा’

आरजेडी चीफ लालू यादव के तांत्रिक गुरु विभूति नारायण उर्फ पगला बाबा एकबार फिर मीडिया की सुर्खियों में हैं। कहा जा रहा है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को पगला बाबा ने एकबार उन्हें श्राप दिया था। उन्होंने अपने मिर्जापुर के आश्रम में लालू से कहा था कि लालू तुझे घमंड है कि तू बहुत बड़ा पुरोधा है। तू मिट्टी में मिल जाएगा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लालू यादव के गुरू पगला बाबा के बारे में बता रहा है इंडिया संवाद-अभी-अभी: बाबा ने लालू यादव को दिया था श्राप, कहा- 'तुझे घमंड है कि तू बहुत बड़ा पुरोधा है। तू मिट्टी में मिल जाएगा'

पगला बाबा और लालू का पुराना रिश्ता

बिहार विधानसभा से पहले 27 जुलाई 2013 को लालू यूपी के मिर्जापुर में एक बाबा के पास पहुंचे थे। ये बाबा उनके तांत्रिक गुरू थे। कहा जाता है कि पगला बाबा से लालू का रिश्ता बहुत पुराना है। ऐसे कई मौके आए जब पगला बाबा ने अनुष्ठान किया। जिसका फायाद लालू और उनके परिवार को मिला। चुनाव से पहले लालू ने सत्ता में वापसी के लिए गुप्त तंत्र अनुष्ठान ‘पगला बाबा’ से ही कराया था। पगला बाबा ने लालू को तंत्र पूजा के बाद आश्रम में बने कटघरे में भी परिक्रमा करवाया था और उन्हें तप करने को कहा था।

लालू के अच्छे दिन के लिए बाबा ने दिया था श्राप

औघड़ माने जाने वाले पगला बाबा के बारे मे कहा जाता है कि औघड़ बाबा का श्राप आशीर्वाद होता है। अनुष्ठान के दौरान ही बाबा ने लालू के बेहतर दिन की वापसी के लिए उन्हें श्राप दिया था। बाबा ने चीख-चीख कर श्राप दिया, ‘लालू तुझे घमंड है कि तू बहुत बड़ा पुरोधा है। तू मिट्टी में मिल जाएगा।’  इससे पहले भी लालू ने साल 2011 में भी पगला बाबा के यहां पहुंचकर अनुष्ठान कराया था।

डॉक्टरों ने कर दिए थे हाथ खड़े, तब बाबा ने बचाई थी लालू की जान

अनुष्ठान के बाद खुद लालू ने कहा था कि बाबाजी ने बचपन में मेरे जीवन की रक्षा तब की थी जब परिजनों और डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी।  बता दें कि पगला बाबा तंत्र साधक थे। वह अटपटे कार्यों के लिए जाने जाते थे। उनके बारे में कहा जाता था कि वह किसी की नहीं सुनते थे। भक्तों के दुःख गाली देकर और उनको डंडे से पीटकर भगाते थे। उनके शिष्यों की माने तो उनकी आयु लगभग साढ़े चार सौ साल की थी। उनके करीबी भक्त कहते हैं कि जैसे ही उनको याद करते थे भले ही हजार किलोमीटर दूर ही क्यों न हो, बाबा के प्रत्यक्ष दर्शन हो जाते थे। इसी साल 14 अप्रैल को पगला बाबा ने विंध्याचल के आश्रम में आखिरी सांस ली थी।

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