बिजली कंपनी की लापरवाही ने ली सब्जीवाले की जान

देश में गरीबी और बेरोजगारी के हालात यह है कि प्रशासन में बैठे लोगों की एक छोटी सी लापरवाही के चलते किसी गरीब को अपनी जान तक देनी पड़ जाती है, महाराष्ट्र में हुई यह घटना जरूर सुनने में एक खबर की तरह अगले ही दिन बासी हो जाएगी लेकिन इस खबर के पीछे छुपी लापरवाही से एक गरीब का घर पूरी तरह उजड़ गया, एक सब्जी वाले ने अपनी दुकान पर आए बिजली के बिल के चलते अपने घर में आत्महत्या कर ली.देश में गरीबी और बेरोजगारी के हालात यह है कि प्रशासन में बैठे लोगों की एक छोटी सी लापरवाही के चलते किसी गरीब को अपनी जान तक देनी पड़ जाती है, महाराष्ट्र में हुई यह घटना जरूर सुनने में एक खबर की तरह अगले ही दिन बासी हो जाएगी लेकिन इस खबर के पीछे छुपी लापरवाही से एक गरीब का घर पूरी तरह उजड़ गया, एक सब्जी वाले ने अपनी दुकान पर आए बिजली के बिल के चलते अपने घर में आत्महत्या कर ली.  घटना महाराष्ट्र के पुंडलिकनगर पुलिस थाना अंतर्गत भारतनगर इलाके की है, यहाँ पर एक सब्जी वाला जिसका नाम जगन्नाथ नेहाजी शेलके (36) है, ने 8 लाख 64 हजार का बिल देखकर आत्महत्या कर ली. दरअसल 1 हजार महीने का बिल आने वाली दुकान में अचानक मार्च महीने का बिल लाखों में आने पर जगन्नाथ नेहाजी इस गम को झेल नहीं पाए और बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने के बाद अंत में उन्होंने खुद के घर में आत्महत्या कर ली.  आत्महत्या करने के बाद सुसाइड नोट में जगन्नाथ नेहाजी ने बिजली के बिल की समस्या का ज़िक्र किया. घटना के बाद महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरक कंपनी ( एमएसईडीसीएल ) बिजली कंपनी के लेखा सहायक सुशील काशीनाथ को सस्पेंड कर दिया गया, साथ ही कम्पनी इस बात से मना करती रही कि आत्महत्या कि वजह बिजली का बिल है. जांच में पाया गया कि दुकान में आया 8 लाख 64 हजार का के बिल में गलती हुई थी असल में उनकी दुकान का बिल इतना हो नहीं सकता लेकिन बार-बार ऑफिस के चक्कर काटने के बाद जब इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं हुई, न प्रशासन ने सुनी और सरकार तो ऐसे छोटे मामलो के लिए जनता से अब काफी दूर हो चुकी है, ऐसे में बेचार गरीब आदमी और क्या कर सकता है. इसका परिणाम हमारे सामने है, जगन्नाथ नेहाजी शेलके जैसे दिन भर धुप में मजदूरी करता आदमी एक छोटी सी गलती की वजह इस दुनिया से चला गया.

घटना महाराष्ट्र के पुंडलिकनगर पुलिस थाना अंतर्गत भारतनगर इलाके की है, यहाँ पर एक सब्जी वाला जिसका नाम जगन्नाथ नेहाजी शेलके (36) है, ने 8 लाख 64 हजार का बिल देखकर आत्महत्या कर ली. दरअसल 1 हजार महीने का बिल आने वाली दुकान में अचानक मार्च महीने का बिल लाखों में आने पर जगन्नाथ नेहाजी इस गम को झेल नहीं पाए और बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने के बाद अंत में उन्होंने खुद के घर में आत्महत्या कर ली.

आत्महत्या करने के बाद सुसाइड नोट में जगन्नाथ नेहाजी ने बिजली के बिल की समस्या का ज़िक्र किया. घटना के बाद महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरक कंपनी ( एमएसईडीसीएल ) बिजली कंपनी के लेखा सहायक सुशील काशीनाथ को सस्पेंड कर दिया गया, साथ ही कम्पनी इस बात से मना करती रही कि आत्महत्या कि वजह बिजली का बिल है. जांच में पाया गया कि दुकान में आया 8 लाख 64 हजार का के बिल में गलती हुई थी असल में उनकी दुकान का बिल इतना हो नहीं सकता लेकिन बार-बार ऑफिस के चक्कर काटने के बाद जब इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं हुई, न प्रशासन ने सुनी और सरकार तो ऐसे छोटे मामलो के लिए जनता से अब काफी दूर हो चुकी है, ऐसे में बेचार गरीब आदमी और क्या कर सकता है. इसका परिणाम हमारे सामने है, जगन्नाथ नेहाजी शेलके जैसे दिन भर धुप में मजदूरी करता आदमी एक छोटी सी गलती की वजह इस दुनिया से चला गया. 

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