बिहार के दलितों की आवाज बनेंगे शरद यादव, 31 को जाएंगे नंदनगांव

देश में चल रही दलित राजनीति के उभार के बीच शरद यादव अब बिहार के दलितों की आवाज बनेंगे। शरद ने 31 जनवरी को बक्सर के नंदनगांव जाने का निर्णय लिया है। यहां से वे दलित समाज के उत्पीड़न  की घटना को लेकर सूबे की नीतीश-भाजपा सरकार पर हमला बोलेंगे।बिहार के दलितों की आवाज बनेंगे शरद यादव, 31 को जाएंगे नंदनगांवदलित समाज की ओर से यहां नंदनगांव में दलित स्वाभिमान सम्मेलन का 31 जनवरी को आयोजन रखा गया है। शरद यादव इस आयोजन में भाग लेंगे। दलित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए यादव के साथ जयंत चौधरी भी इस आयोजन में शिरकत करेंगे। दलित स्वाभिमान सम्मेलन की जानकारी देते हुए पूर्व जदयू नेता अली अनवर ने बताया कि पुलिस-प्रशासन की दमनकारी नीति की वजह से नंदनगांव के लोगों का जीवन बेहाल है।

स्थानीय पुलिस-प्रशासन के गलत रवैये से न सिर्फ गांव के निर्दोष दलित जेल में हैं बल्कि कई अब भी भागे फिर रहे हैं। इस गांव के लोगों में पूरी तरह से दहशत का माहौल है। बेकसूर लोगों को परेशान किया जा रहा है। पुलिस रात-बेरात दबिश देकर गांववालों को परेशान कर रही है।

कोरेगांव और ऊना सरीखे हैं नंदनगांव के हालात

अली अनवर के अनुसार नंदनगांव के हालात महाराष्ट्र के कोरेगांव और गुजरात के ऊना सरीखे हैं। अन्य भाजपाशासित राज्यों की तरह बिहार में भी दलितों पर अत्याचार हो रहा है। बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर हुई जानलेवा पत्थरबाजी की घटना को पूर्व जदयू नेता ने पुलिस की गलत कार्रवाई का नतीजा करार दिया है। 

नंदनगांव में सीएम के आने से एक घंटे पहले पुलिस ने गांव के दलित लोगों पर लाठी बरसाते हुए उन्हें दूर खदेड़ दिया था, जिसकी वजह से दलितों में रोष था। वह रोष नीतीश के काफिले पर पथराव के रूप में प्रकट हुआ।

नीतीश को ज्ञापन देना चाहते थे दलित, आज हैं जेल में

अली अनवर के अनुसार नंदनगांव के दलित और पिछड़े समाज के लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराना चाहते थे। कार्यक्रम से एक घंटे पहले उक्त समाज के लोगों ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी, तो उन्हें मना कर दिया गया। इस पर लोगों ने प्रशासन से अपनी मांग शांतिपूर्वक रखी, तभी उन्हें पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ा। पुलिस ने दलित और पिछड़े समाज के इन लोगों पर डंडे बरसाते हुए इन्हें आयोजन स्थल से दूर खदेड़ दिया। 

पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों को गंभीर चोटें भी आई, जिसे लेकर पूरे समाज में रोष फैल गया। समाज ने अपनी बात रखने के लिए नीतीश की गाड़ी रोकनी चाही, मगर सीएम का काफिला जब नहीं रुका तब उन्होंने उस पर पथराव किया। इसके बाद से उन दलित और पिछड़े समाज के लोगों पर बिहार पुलिस की बर्बरता बदस्तूर जारी है। निर्दोष लोगों को जेल में डाल दिया गया है, तो पुलिस कार्रवाई की दहशत से लोग गांव छोड़ कर भागे हुए हैं। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए ही शरद यादव ने नंदनगांव जाने का निर्णय लिया है।

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