बिहार: बैंकों ने दिखाई सुस्ती तो निगम ने बांट दिया अरबों का एजुकेशन लोन, जानिए

बैंकों के असहयोग से निराश बिहारी छात्रों को शिक्षा वित्त निगम ने संजीवनी दी है। राज्य सरकार की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है।

बैंकों की नाकामी और असहयोगात्मक रवैये के बाद शुरू किए गए शिक्षा वित्त निगम ने 50 दिन में वह काम कर दिखाया जो बैंक 17 महीने में नहीं कर पाए। निगम ने 50 दिन की छोटी सी अवधि में नौ हजार से अधिक विद्यार्थियों को 2.60 अरब रुपये का शिक्षा ऋण स्वीकृत कर दिया।

दो दर्जन बैंकों ने दिखाई थी उदासीनता 

राज्य सरकार ने दो अक्टूबर 2016 को सात निश्चय के तहत आर्थिक रूप से कमजोर तबके के विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की। योजना प्रारंभ होने के पूर्व शिक्षा ऋण स्वीकृति के लिए सरकार ने 23 राष्ट्रीयकृत बैंकों से करार किया। व्यवस्था बनी कि जिला निबंधन केंद्र के जरिए लोन के लिए मिले आवेदन बैंकों को भेजे जाएंगे और बैंक 15 दिन की मियाद लेकर चार लाख रुपये तक का ऋण स्वीकृत कर देंगे।

बैंकों का रवैया सरकार को पसंद नहीं 

शिक्षा ऋण के लिए सरकार की शत प्रतिशत गारंटी के बाद भी बैंकों का रवैया शुरू से सहयोग का नहीं रहा। सचाई यह है कि 17 महीने की अवधि में बैंकों को तकरीबन 35 हजार ऋण आवेदन भेजे गए जिसमें से दो हजार आवेदन पर भी बैंक ने स्वीकृति नहीं दी। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यसचिव अंजनी कुमार सिंह के स्तर पर बैंकों से वार्ता की गई, बैंकर्स कमेटी में शिकायत तक गई लेकिन, स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ।

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