बुंदेलखंड: पेयजल व्यवस्था में लापरवाही, मुख्य अभियंता सहित चार निलंबित

लखनऊ। गर्मी में हर साल पानी के बड़े संकट का सामना करने वाले बुंदेलखंड को इस बार भी इसी कठिनाई से जूझना होगा, क्योंकि जल निगम ने गर्मी से पहले जिन्हें हैैंडपंप लगाने का जिम्मा सौंपा था, वे अधिकारी दायित्व नहीं निभा सके। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 व 13 अप्रैल को प्रस्तावित बुंदेलखंड दौरे से पहले जल निगम के सामने यह तस्वीर आई तो आनन-फानन में झांसी के मुख्य अभियंता व बुंदेलखंड के चार अधिशासी अभियंताओं को निलंबित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैैं।

जल निगम के प्रबंध निदेशक राजेश मित्तल ने बताया कि वर्ष 2017-18 के लिए निर्धारित हैैंडपंप न लगाने के लिए झांसी में मुख्य अभियंता पद पर कार्यरत इंदुकांत श्रीवास्तव, उरई के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, महोबा में जल निगम के निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता जेपी सिंह, चित्रकूट में जल निगम के यूनीसेफ प्रोजेक्ट यूनिट के अधिशासी अभियंता यशवीर सिंह और हमीरपुर में जल निगम के निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता कमलेश सिंह को निलंबित किया गया है। प्रबंध निदेशक ने बताया कि निलंबित अभियंताओं को खास तौर पर बुंदेलखंड के प्रमुख जिलों में हैैंडपंप न लगाने का जिम्मेदार माना गया हैै। झांसी के मुख्य अभियंता के खिलाफ विभागीय जांच भी प्रस्तावित की गई है।

मुख्य अभियंता को हैैंडपंप लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही न करने के साथ ही अधीनस्थों पर शिथिल नियंत्रण, कार्यों के प्रति लापरवाही व उदासीनता बरतने, नियमविरुद्ध कार्य करने, शासन की नीतियों व भावनाओं के अनुसार आचरण न करने, विभाग की छवि धूमिल करने सहित अन्य मामलों का दोषी पाया गया है। निलंबित अधिशासी अभियंताओं को निर्देशों का पालन न करने, हैैंडपंप लगाने का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में शिथिलता बरतने और शासन-प्रशासन के समक्ष विभाग की छवि धूमिल करने का दोषी पाया गया है। 

बांदा को लेकर भी उठे सवाल

झांसी, उरई, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर के साथ बांदा में भी हैैंडपंप लगाने को लेकर सवाल उठने लगे हैैं। यहां के जल निगम के अधीक्षण अभियंता इसे लेकर जिलाधिकारी से अधिशासी अभियंता की शिकायत कर चुके हैैं, जबकि चित्रकूटधाम के मंडलायुक्त भी जल निगम के प्रबंध निदेशक को हैैंडपंप लगाने व रिबोर कराने की धीमी गति से अवगत करा चुके हैैं। इसे लेकर बांदा के अधिशासी अभियंता को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया, लेकिन काम में तेजी नहीं आई। 

मुख्य अभियंता को हैैंडपंप लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही न करने के साथ ही अधीनस्थों पर शिथिल नियंत्रण, कार्यों के प्रति लापरवाही व उदासीनता बरतने, नियमविरुद्ध कार्य करने, शासन की नीतियों व भावनाओं के अनुसार आचरण न करने, विभाग की छवि धूमिल करने सहित अन्य मामलों का दोषी पाया गया है। निलंबित अधिशासी अभियंताओं को निर्देशों का पालन न करने, हैैंडपंप लगाने का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में शिथिलता बरतने और शासन-प्रशासन के समक्ष विभाग की छवि धूमिल करने का दोषी पाया गया है। 

बांदा को लेकर भी उठे सवाल

झांसी, उरई, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर के साथ बांदा में भी हैैंडपंप लगाने को लेकर सवाल उठने लगे हैैं। यहां के जल निगम के अधीक्षण अभियंता इसे लेकर जिलाधिकारी से अधिशासी अभियंता की शिकायत कर चुके हैैं, जबकि चित्रकूटधाम के मंडलायुक्त भी जल निगम के प्रबंध निदेशक को हैैंडपंप लगाने व रिबोर कराने की धीमी गति से अवगत करा चुके हैैं। इसे लेकर बांदा के अधिशासी अभियंता को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया, लेकिन काम में तेजी नहीं आई। 

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