अभी-अभी: भारत का सबसे खतरनाक जंगी विमान ‘हरक्यूलिस’ बड़े हादसे का हुआ शिकार

चीन से सटे लद्दाख इलाके में भारतीय वायुसेना का मालवाहक विमान C-130J ‘सुपर हरक्यूलिस’ विमान हादसे का शिकार हो गया। विमान उस वक्त खंभे से टकराकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जब लैंडिंग के बाद इसे इसकी तयशुदा जगह पर पहुंचाया जा रहा था। भारतीय वायुसेना ने इस मामले में कोर्ट ऑफ इंक्वॉयरी के आदेश दे दिए हैं।

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खास बात यह है कि विमान को उड़ाने वाला पायलट एयरफोर्स की प्रतिष्ठित टुकड़ी वेल्ड वाइपर्स (Veiled Vipers) का कमांडिंग अफसर था। ग्रुप कैप्टन जसवीन सिंह अपने को-पायलट और वेपंस सिस्टम्स ऑपरेटर के साथ रात की उड़ान पर थे। सूत्रों के मुताबिक, हादसे के बाद पायलट को कार्यमुक्त कर दिया गया है। जसवीन नई दिल्ली के नजदीक स्थित हिंडन एयरबेस के 77 स्क्वाड्रन (वेल्ड वाइपर्स) से ताल्लुक रखते हैं।

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इस हादसे की वजह से वायुसेना को बड़ा नुकसान पहुंचा है। अमेरिका से 2.1 बिलियन डॉलर में खरीदे जाने के बाद सेना में फरवरी 2011 में शामिल किए 6 मालवाहक हरक्यूलिस विमानों में से अब चार ही बचे हैं। इससे पहले, मार्च 2014 में एक विमान ट्रेनिंग उड़ान के दौरान हादसे का शिकार हो गया था। हादसा मध्य प्रदेश के ग्वालियर के निकट हुआ, जिसमें पांच वायुसेना कर्मी शहीद हुए थे।

 
ताजा दुर्घटना को वायुसेना ने पर्दे में रखा है। उन्होंने इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, 10 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित इस एयरफील्ड पर लैंडिंग के बाद पायलट्स इस विमान को तयशुदा जगह (टैक्सीवे) पर पहुंचाने में असफल रहे। सूत्र ने बताया कि एयरक्राफ्ट का एक विंग और प्रोपेलर खंभे और दूसरी चीजों से बेहद रफ्तार से टकरा गया।
 
ग्रुप कैप्टन जसवीन सिंह चतरथ को वायुसेना में काफी शोहरत हासिल है। अपनी पेशेवर योग्यता की वजह से उन्हें कई अहम पोस्टिंग मिली हैं। इसमें यूक्रेन में एएन 32 विमानों का प्रॉजेक्ट मैनेजमेंट भी शामिल है। एक अफसर ने कहा कि यह एक अप्रत्याशित हादसा है, जिसका उनकी योग्यता से कोई लेनादेना नहीं है।
 
सुपर हरक्यूलिस की मदद से वासुसेना थलसेना को किसी भी बेहद ऊंचाई वाली पोस्ट पर जरूरी साजो-समान तुरंत मुहैया कराने में सक्षम है। यही नहीं, युद्ध के हालात में सैनिक टुकड़ी को पोस्ट तक मूव कराने में भी इस विमान की अहम भूमिका है।
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