ब्रिटेन में साले की हत्या के दोषी भारतीय को अदालत ने भेजा पांच साल के लिए जेल

ब्रिटेन में एक भारतीय को अपने साले की हत्या करने का दोषी पाए जाने के बाद अदालत ने पांच साल कैद की सजा सुनाई है। इस आदमी को ब्रिटेन में रहने की अनुमति दी गई थी। ब्रिटेन आने से पहले उसने पंजाब के जालंधर में एक छात्र नेता की हत्या की थी।ब्रिटेन में एक भारतीय को अपने साले की हत्या करने का दोषी पाए जाने के बाद अदालत ने पांच साल कैद की सजा सुनाई है। इस आदमी को ब्रिटेन में रहने की अनुमति दी गई थी। ब्रिटेन आने से पहले उसने पंजाब के जालंधर में एक छात्र नेता की हत्या की थी।  41 वर्षीय सुखविंदर सिंह मनोरोगी है। सुखविंदर ने पिछले साल अगस्त में पत्नी के साथ प्रेम संबंध के संदेह में अपने 39 वर्षीय साला हरीश कुमार की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव लेकर वह पश्चिम मिडलैंड्स में वेस्ट ब्रोमविच थाने पर पहुंचा और आत्मसमर्पण किया।  अपराध स्वीकार करने के बाद एक दिन पहले शुक्रवार को उसे जेल की सजा सुनाई गई। सजा शुरू होने से पहले उसकी चिकित्सा कराई जाएगी। सजा पूरी होने के बाद उसे भारत डिपोर्ट किया जाएगा।  पंजाब में सात साल जेल में बंद रह चुका है  सुखविंदर ने 1998 में पंजाब के जालंधर में छात्र संघ के अध्यक्ष की कृपाण से हत्या कर दी थी। इस मामले में सात साल जेल में रहने के बाद वह पंजाब जेल से रिहा हुआ। अपील लंबित रहने के कारण उसे जमानत पर छोड़ा गया था। 2007 में छह माह के वीजा पर वह ब्रिटेन भाग निकला। ब्रिटिश अधिकारियों की प्रशासनिक चूक के कारण उसे ब्रिटेन में अनिश्चितकाल तक रहने की अनुमति मिल गई और इसके बाद 2011 में उसने ब्रिटिश नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया था।

41 वर्षीय सुखविंदर सिंह मनोरोगी है। सुखविंदर ने पिछले साल अगस्त में पत्नी के साथ प्रेम संबंध के संदेह में अपने 39 वर्षीय साला हरीश कुमार की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव लेकर वह पश्चिम मिडलैंड्स में वेस्ट ब्रोमविच थाने पर पहुंचा और आत्मसमर्पण किया।

अपराध स्वीकार करने के बाद एक दिन पहले शुक्रवार को उसे जेल की सजा सुनाई गई। सजा शुरू होने से पहले उसकी चिकित्सा कराई जाएगी। सजा पूरी होने के बाद उसे भारत डिपोर्ट किया जाएगा।

पंजाब में सात साल जेल में बंद रह चुका है

सुखविंदर ने 1998 में पंजाब के जालंधर में छात्र संघ के अध्यक्ष की कृपाण से हत्या कर दी थी। इस मामले में सात साल जेल में रहने के बाद वह पंजाब जेल से रिहा हुआ। अपील लंबित रहने के कारण उसे जमानत पर छोड़ा गया था। 2007 में छह माह के वीजा पर वह ब्रिटेन भाग निकला। ब्रिटिश अधिकारियों की प्रशासनिक चूक के कारण उसे ब्रिटेन में अनिश्चितकाल तक रहने की अनुमति मिल गई और इसके बाद 2011 में उसने ब्रिटिश नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया था।

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