बड़ा खुलासा: प्रधानमंत्री की रैली स्थल पर खुरासान ग्रुप ने रखा था बम, आतंकी आतिफ हुआ गिरफ्तार

कानपुर से मंगलवार को गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस के कानपुर खुरासान ग्रुप के संदिग्ध आतंकी आतिफ और आसिफ को बुधवार को एनआईए ने न्यायालय में पेश किया। एनआईए के सूत्रों ने दावा किया है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी आतिफ ने ही लखनऊ में पिछले साल अक्टूबर में दशहरे के मौके पर प्रधानमंत्री की रैली स्थल के पास बम रखा था। कम इंटेनसिटी का बम होने के कारण और दशहरे के त्यौहार में इसका पता नहीं चला था। सात मार्च को लखनऊ में हुए सैफुल्लाह के इंकाउंटर के बाद इस मामले की जांच में आतिफ और आसिफ का नाम सामने आया था। आतिफ सैफुल्लाह का चचेरा भाई है।प्रधानमंत्री की रैली स्थल पर खुरासान ग्रुप ने रखा था बम, कम इंटेनसिटी के कारण पता नहीं चला...गुजरात से राज्यसभा के उम्मीदवार होंगे BJP अध्यक्ष अमित शाह

आतंकी सैफुल्ला के तीन रिश्तेदारों को एनआईए ने उठाया था

मंगलवार को कानपुर में गिरफ्तार करने के बाद बुधवार को लखनऊ में एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से दोनों अभियुक्तों को 30 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एनआईए गुरुवार को दोनों ही आरोपियों की रिमांड के लिए आवेदन करेगी। एनआईए के सूत्रों का कहना है कि पिछले काफी समय से दोनों पर निगाह रखी जा रही थी और पिछले कुछ समय में कई बार आतिफ और आसिफ से पूछताछ कर चुकी थी।
तीन और संदिग्ध एनआईए के रडार पर
सूत्रों की मानें तो इन दो युवकों की गिरफ्तारी के बाद तीन और संदिग्ध एनआईए के रडार पर हैं। एनआईए इन तीनों युवकों पर भी निगाह रख रही है। आतिफ और आसिफ को रिमांड पर लेने के बाद इन युवकों के बारे में एनआईए सुबूत जुटाने के बाद कार्रवाई करेगी। मालूम हो कि पूर्व में एटीएस ने आतिफ को हिरासत में लिया था और लंबी पूछताछ की थी। लेकिन पुख्ता सुबूत न मिलने के कारण आतिफ को इस शर्त के साथ छोड़ दिया गया था कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर एटीएस या कोई अन्य जांच एजेंसी बुलाएगी तो वह हाजिर होगा।
आतिफ लगा चुका है एटीएस और एनआईए पर आरोप

सात मार्च को सैफुल्लाह के इंकाउंटर के बाद एटीएस और एनआईए ने बारी बारी से कई बार आतिफ से पूछताछ की थी। तीन मई को आतिफ ने लखनऊ में प्रेस क्लब में रिहाई मंच के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर एनआईए और एटीएस पर आरोप लगाए थे कि वह उन्हें सरकारी गवाह बनाना चाहती है। आतिफ और रिहाई मंच के लोगों ने एटीएस द्वारा चलाए गए डी रिडक्लाइजेशन पर भी सवाल उठाए थे। इस अभियान में एटीएस ऐसे भटक रहे युवकों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम कर रहे थे।

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