बड़ी खबर: पशुओं की बिक्री में बूचड़खाने से जुड़ी शर्त हटाएगी सरकार…

केंद्र सरकार एक और मामले में यू-टर्न लेने जा रही है. बाजार में बूचड़खानों को मवेशियों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की तैयार हो रही है. यूपी में योगी सरकार के बूचड़खानों पर सख्ती के बाद केंद्र सरकार एक अधिसूचना लेकर आई थी जिसमें यह शर्त लगा दी गई थी कि पशुओं की बिक्री बूचड़खानों के लिए नहीं हो सकती. हालांकि, बाद में इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया था.बड़ी खबर: पशुओं की बिक्री में बूचड़खाने से जुड़ी शर्त हटाएगी सरकार...पशुओं के लिए क्रूरता से बचाव (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017 के नए संस्करण में ‘स्लॉटर’ यानी बूचड़खाना शब्द को हटा दिया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा नए नोटिफिकेशन का जो प्रारूप तैयार किया गया है, उसे देखने से यह साफ संकेत मिलता है.

गौरतलब है कि 23, मई 2017 को पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के द्वारा पशु बाजार में पशुओं की बिक्री बूचड़खानों के लिए करने पर रोक लगा दी गई थी. यानी पशुओं की बाजार में खरीद-फरोख्त हो तो सकती है, लेकिन इन्हें बूचड़खाने को नहीं बेचा जा सकता. इसको लेकर देश भर में विरोध भी हुआ था, क्योंकि इससे अरबों रुपये के मांस निर्यात कारोबार पर असर पड़ने की आशंका थी. अब कानून मंत्रालय इस नियम को कुछ लचीला बनाने का काम कर रहा है.

नए प्रस्तावित नियम में कहा गया है, ‘किसी भी अयोग्य या युवा पशु को किसी पशु बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा. किसी भी ऐसे व्यक्ति को पशु बाजार में अपना मवेशी बेचने की इजाजत नहीं होगी, यदि मवेशी गर्भवती है या उसने हाल में बच्चा जना है.’   

इसके पहले 23, मई 2017 को जारी अधिसूचना में कहा गया था, ‘कोई भी व्यक्ति किसी मवेशी बाजार में अपना पशु नहीं बेच सकता, जब तक वह एक लिखित हलफनामा नहीं पेश करता कि वह पशु का मालिक या उसके मालिक का अधिकृत एजेंट हैऔर पशु को बाजार में बूचड़खाने के लिए नहीं बेचा जाएगा.’ इससे किसानों को भी दिक्कत हो रही थी, क्योंकि वे अपने ऐसे मवेशी बाजार में बेच देते थे जो खेती के काम के लायक नहीं रहते. इस निर्णय का केरल, पश्चिम बंगाल और मेघालय जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था, क्योंकि वहां लोग बड़े पैमाने पर मांस खाते हैं.

तमाम राज्यों से मिले फीडबैक के आधार पर ही वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने बूचड़खाने की शर्त को वापस लेने का मन बनाया. मंत्रालय ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं तथा कारोबारियों की भी राय ली. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया था. 

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