भागवत को चार साल बाद राममंदिर याद आया- अंसारी

चुनाव करीब आते ही आरएसएस को राम मंदिर की याद आने पर बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत को घेरा है . अयोध्या में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर को लेकर दिए एक बयान में कहा कि यदि राममंदिर का निर्माण उसी जगह नहीं हुआ तो भारतीय संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी. इसका जवाब देते हुए बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा कि अब राममंदिर की याद आ रही है, चार साल बीत गए तब राम मंदिर की याद नहीं आई?दिल्ली : चुनाव करीब आते ही आरएसएस को राम मंदिर की याद आने पर बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत को घेरा है . अयोध्या में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर को लेकर दिए एक बयान में कहा कि यदि राममंदिर का निर्माण उसी जगह नहीं हुआ तो भारतीय संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी. इसका जवाब देते हुए बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा कि अब राममंदिर की याद आ रही है, चार साल बीत गए तब राम मंदिर की याद नहीं आई?  बकौल इकबाल अंसारी, ‘हम लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चले गए. हम लोग कोई प्रोग्राम नहीं करते हैं, हम केवल कोर्ट का सहारा ले रहे हैं. चार साल में सरकार ने कोई काम नहीं किया है, जनता को रोजगार चाहिए, लेकिन नेता बौखलाए हुए हैं और राम मंदिर की धमकी दे रहे हैं. हम धमकी से डरने वाले नहीं है, सरकार को कोर्ट का सहारा लेना चाहिए’.  वहीं, भागवत के बयान पर रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने कहा कि वहां पर अस्थायी मंदिर बना हुआ है, जिसकी विधि-विधान से पूजा होती है. सत्येन्द्र दास ने आगे कहा, ‘हमारी भारतीय संस्कृति का विनाश करने के लिए बहुत से विदेशी आए, लेकिन इसका विनाश नहीं हो पाया क्योंकि हमारी संस्कृति इतनी मजबूत है कि इसको जड़ से नहीं उखाड़ा जा सकता.सत्येंद्र ने कहा कि मंदिर बनना चाहिए, वह अस्थायी रूप में है, बस उसे भव्य रूप देना है, लेकिन यह सोच कि मंदिर नहीं बना तो भारतीय संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी यह सही नहीं है. हमारी संस्कृति की जड़ें बहुत मजबूत है. समय आने पर भव्य राममंदिर का निर्माण हो जाएगा. गौतरतलब है कि राम मंदिर मुद्दे को लेकर विपक्ष भी आरएसएस और सरकार पर हमलावर रुख अख्तियार किये हुए है.

बकौल इकबाल अंसारी, ‘हम लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चले गए. हम लोग कोई प्रोग्राम नहीं करते हैं, हम केवल कोर्ट का सहारा ले रहे हैं. चार साल में सरकार ने कोई काम नहीं किया है, जनता को रोजगार चाहिए, लेकिन नेता बौखलाए हुए हैं और राम मंदिर की धमकी दे रहे हैं. हम धमकी से डरने वाले नहीं है, सरकार को कोर्ट का सहारा लेना चाहिए’.

वहीं, भागवत के बयान पर रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने कहा कि वहां पर अस्थायी मंदिर बना हुआ है, जिसकी विधि-विधान से पूजा होती है. सत्येन्द्र दास ने आगे कहा, ‘हमारी भारतीय संस्कृति का विनाश करने के लिए बहुत से विदेशी आए, लेकिन इसका विनाश नहीं हो पाया क्योंकि हमारी संस्कृति इतनी मजबूत है कि इसको जड़ से नहीं उखाड़ा जा सकता.सत्येंद्र ने कहा कि मंदिर बनना चाहिए, वह अस्थायी रूप में है, बस उसे भव्य रूप देना है, लेकिन यह सोच कि मंदिर नहीं बना तो भारतीय संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी यह सही नहीं है. हमारी संस्कृति की जड़ें बहुत मजबूत है. समय आने पर भव्य राममंदिर का निर्माण हो जाएगा. गौतरतलब है कि राम मंदिर मुद्दे को लेकर विपक्ष भी आरएसएस और सरकार पर हमलावर रुख अख्तियार किये हुए है.  

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