भारत का दबाव लाया रंग, पाकिस्तान ने माना हाफिज है सबसे बड़ा खतरा

नई दिल्ली। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान हमेशा से ये कहता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होता है। जमात उद दावा के मुखिया हाफिज सईद के बारे में पाकिस्तान हमेशा भारत से सबूतों की मांग करता रहा है। लेकिन दमादम कलंदर की दरगाह पर हालिया आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के सुर बदले नजर आ रहे हैं। भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार हाफिज सईद के बारे में भी पाकिस्तान के बोल में बदलाव आ रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अब हाफिज सईद पाकिस्तान के लिए भी खतरा बन चुका है।

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नजरबंद हाफिज पर भारत की टिप्पणी

हाफिज सईद की नजरबंदी पर भारत सरकार की तरफ से बेहद सधी टिप्पणी आई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अगर पहले के इतिहास पर नजर डालें तो आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की नीति ढुलनमुल रही है। पहली बार पाकिस्तान ने आतंकवाद निरोधक अधिनियम के तहत हाफिज पर कार्रवाई की है, जो सराहनीय है। लेकिन पाकिस्तान को पुख्ता तौर पर कदम उठाने होंगे ताकि आतंक के विषबेल को समूल नष्ट किया जा सके। हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान में एक टीवी शो के दौरान उसे आमने सामने देखा था। उसी वक्त मैंने कहा कि हाफिज की गिरफ्तारी होनी चाहिेए। मणिशंकर अय्यर ने बताया कि शो खत्म होने के बाद कुछ लोग उनके पास आए और कहा कि आप ने अच्छी बात कही है, हाफिज सईद के खिलाफ हर हाल में कार्रवाई होनी चाहिए।

आतंकियों की फंडिंग पर लगे लगाम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ये भी कहा कि ऐसा लग रहा है कि भारत और अंतरराष्ट्रीय जगत के दबाव में अब पाकिस्तान आतंकवाद के दुष्प्रभाव को महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकी गतिविधियों को लगाम लगाने के लिए आतंकी समूहों की आर्थिक कमर तोड़नी होगी। वैश्विक स्तर पर ये सहमति बनी है कि एक समन्वित प्रयास के जरिए आतंकी संगठनों की फंडिंग पर लगाम लगाया जाए।

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‘भारत से लोकतांत्रिक आदर्श सीखे पाकिस्तान’

पाकिस्तान में नए सेना प्रमुख कमर बाजवा के कमान संभालने के बाद घुसपैठ के मामलों में कमी नहीं आई है। लेकिन सीमा पार से फायरिंग पर कुछ हद तक लगाम लगी है। जानकारों का कहना है कि पाक के नए सेना प्रमुख कमर बाजवा का मानना है कि पाकिस्तान को बहुत हद तक भारत के लोकतंत्र से सीखने की जरूरत है। कमर बाजवा ने कहा था कि पाकिस्तान में सेना और राजनीतिज्ञों को एक दूसरे के कामकाज में सीमित मात्रा में ही दखल देना चाहिए।

 

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