भारत से वियतनाम तक 95% बढ़ा गया है HIV INFECTION, जानिए कैसे बचे..

UN रिपोर्ट के अनुसार, एशिया और प्रांत महाद्वीप के 10 देशों में बढ़ा HIV Infection UN रिपोर्ट के अनुसार एशिया के भारत-पाक और चीन समेत 10 देशों के लोग 95% नए HIV संक्रमण से पीड़ित हैं  ।भारत से वियतनाम तक 95% बढ़ा गया है HIV INFECTION, जानिए कैसे बचे..खुद के ‌लिए मुसीबत बन जाते हैं ऐसी हथेली वाले लोग, जानें कैसे

संयुक्त राष्ट्र ने एचआईवी/ एड्स, को समाप्त करने के लिए लक्ष्य बनाया है। जिसके तहत 90-90-90 के हिसाब से 2014 के डाटा का व्यापक विश्लेषण जारी है, ताकि 2020 तक HIV संक्रमित लोगों को उनकी स्थिति के बारे में पता चल सके। सभी HIV संक्रमित लोगों में से 90 प्रतिशत एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) तक पहुंच रहे हैं और एआरटी लेने वालों में 90 प्रतिशत वायरल दब गए हैं। रिपोर्ट के जरिए यह जानकारी दी गई है ।रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक HIV वायरस से पीड़ित सभी लोगों में आधे से ज्यादा लोग इलाज करा सकते हैं, जबकि 2005 से एड्स के कारण हो रही मौतों की संख्या अब आधी हो गई है।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र में, भारत, चीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, वियतनाम, म्यांमार, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस, थाईलैंड और मलेशिया में नए संक्रमण हो रहे हैं। इन 10 देशों में 2016 के सभी नए एचआईवी संक्रमणों का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा था।रिपोर्ट में भारत के बारे में कहा गया है कि भारत के 26 शहरों से सैंपल सर्वे में पाया गया कि HIV की स्थिति 41% है, जो लोग अपने HIV स्थिति को जानते थे, उनमें से केवल 52 प्रतिशत एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी तक पहुंचे हैं और 83 प्रतिशत लोगों का इलाज करवाने से वायरल दब गया । समलैंगिक पुरुषों और HIV संक्रमित पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले अन्य पुरुषों में 30 फीसदी लोग अपनी HIV स्थिति को जानते थे, जबकि 68 फीसदी लोगों को HIV की स्थिति जानने के लिए संबधित अस्पताल में भेजा गया रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व के देशों, उत्तरी अफ्रीका, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में स्थिति खराब रही है, जहां एड्स से संबंधित मौतें स्पष्ट रूप से बढ़ी हैं। हालांकि अल्जीरिया, मोरक्को और बेलारूस में 2010 से 2016 तक बड़ी संख्या में लोगों ने HIV का इलाज करवाया है ।

रिपोर्ट में यह भी पता चलता है कि विश्व स्तर पर, HIV से जी रहे 30 प्रतिशत लोगों को अब भी उनकी स्थिति के बारे में नहीं पता है, और करीब 17 लाख एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी तक पहुंचने में असमर्थ हैं । आधे से अधिक लोगों में वायरल नहीं दबाया जा सका ।

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